नोएडा हादसे में 10 सवालों के जवाब ढूंढ रही पुलिस, पिता ने बताया आंखों देखा हाल, घटना के तुरंत बाद मौके पर क्यों नहीं पहुंचे अधिकारी?

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नोएडा में युवराज की डूबकर मौत के मामले में एसआईटी जांच तेज हो गई है। पिता के बयान से लापरवाही उजागर हुई। मुख्यमंत्री योगी की नाराजगी के बाद नोएडा प्राधिकरण के सीईओ को हटाया गया है।

नोएडा सेक्टर-150 में इंजीनियर युवराज मेहता की डूबकर मौत के मामले में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे सिस्टम की गंभीर लापरवाही सामने आती जा रही है। युवराज के पिता राजकुमार ने एसआईटी के सामने उस रात का दर्दनाक मंजर बयां किया। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपनी आंखों के सामने बेटे को कार समेत पानी में डूबते देखा। मौके पर करीब 80 कर्मचारी मौजूद थे, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि कोई भी उसे बचाने के लिए पानी में नहीं उतरा। इसी बयान के बाद मामले की गंभीरता और बढ़ गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी हादसे पर गहरी नाराजगी जताते हुए नोएडा प्राधिकरण के सीईओ लोकेश एम को हटा दिया है।


पौने दो घंटे तक क्यों नहीं बची जान, हर स्तर की भूमिका जांच के घेरे में
एसआईटी इस बात की गहन जांच कर रही है कि पौने दो घंटे तक चले रेस्क्यू के बावजूद युवराज की जान क्यों नहीं बचाई जा सकी। सवाल उठ रहे हैं कि एनडीआरएफ को सूचना देने में देरी क्यों हुई और घटना के बाद नोएडा के सीनियर अफसर मौके पर क्यों नहीं पहुंचे। इसके अलावा सोसायटी वासियों द्वारा पहले लिखे गए तीन पत्रों पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई और उनकी मांगों के अनुसार सुधार कार्य क्यों नहीं कराए गए। एसआईटी यह भी देख रही है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या ठोस तैयारियां की गईं और डार्क स्पॉट सर्वे में इस स्थान को कैसे नजरअंदाज कर दिया गया।


प्राधिकरण और पुलिस की लापरवाही पर उठे गंभीर सवाल
जांच में यह भी सामने आया है कि एक ओर पुलिस एफआईआर दर्ज कर रही है, वहीं दूसरी ओर प्राधिकरण के पास यह तक स्पष्ट डेटा नहीं है कि संबंधित प्लॉट किसका है। सवाल यह भी है कि तय समय में प्लॉट पर निर्माण कार्य क्यों पूरा नहीं हुआ और नियमों के तहत आवंटन निरस्त क्यों नहीं किया गया। तैराकी प्रशिक्षण का प्रावधान होने के बावजूद कोई कर्मचारी पानी में क्यों नहीं उतरा, गोताखोर और स्टीमर समय पर क्यों नहीं पहुंचे, इन सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। इतने संसाधन और कर्मचारी मौजूद होने के बावजूद एक बच्चे को बचाया क्यों नहीं जा सका, यह सवाल जांच का केंद्र बना हुआ है।


पांच दिन में रिपोर्ट, दोषियों पर सख्त कार्रवाई का भरोसा
मीटिंग के बाद एसआईटी अधिकारियों ने बताया कि उन्हें पांच दिन के भीतर सभी पहलुओं की जांच कर यह स्पष्ट करना है कि किसकी गलती से यह हादसा हुआ और क्या ऐसे कदम थे, जिनसे इसे रोका जा सकता था। सिविक अथॉरिटी से लेकर पुलिस अथॉरिटी तक, सभी के रोल की जांच की जा रही है। इसके बाद रिपोर्ट शासन को सौंपी जाएगी। दोपहर करीब सवा 12 बजे एसआईटी टीम नोएडा प्राधिकरण पहुंची, जहां बोर्ड रूम में करीब साढ़े 12 बजे बैठक शुरू हुई। मीटिंग में कमिश्नर लक्ष्मी सिंह, एसीईओ कृष्णा करुणेश और डीएम मेधा रूपम से सवाल-जवाब किए गए। इसके बाद टीम सेक्टर-150 स्थित घटना स्थल पहुंची और शाम पांच से साढ़े सात बजे तक समीक्षा बैठक चली। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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