अखलाक मॉब लिंचिंग केस में बड़ा अपडेट, ट्रांसफर याचिका खारिज, आरोपियों के अर्जी निरस्त

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ग्रेटर नोएडा के अखलाक मॉब लिंचिंग मामले में जिला न्यायालय ने आरोपियों की ट्रांसफर याचिका खारिज कर दी है। अब मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में ही होगी, जहां गवाही की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

ग्रेटर नोएडा के बहुचर्चित अखलाक मॉब लिंचिंग मामले में आरोपियों को बड़ा झटका लगा है। गौतमबुद्ध नगर के जिला न्यायाधीश अतुल श्रीवास्तव की अदालत ने आरोपियों की ओर से दायर स्थानांतरण याचिका को खारिज कर दिया है। इसके साथ ही यह साफ हो गया है कि अब इस संवेदनशील मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट (एफटीसी-1) में ही जारी रहेगी। अदालत के इस फैसले को न्यायिक प्रक्रिया के लिहाज से अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे लंबे समय से लंबित इस केस में सुनवाई की रफ्तार तेज होने की उम्मीद है।


एफटीसी-1 में ही चलेगी सुनवाई
जिला न्यायाधीश के आदेश के बाद अब यह मामला एफटीसी-1 के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सौरभ द्विवेदी की अदालत में सुना जाएगा। गुरुवार को अदालत में गवाही की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाना है। बताया जा रहा है कि अदालत दैनिक आधार पर सुनवाई के अपने पूर्व आदेश पर कायम है। इससे पहले 8 जनवरी को आरोपियों की ओर से याचिका दायर कर मांग की गई थी कि मामले को किसी अन्य अदालत में स्थानांतरित किया जाए। यह याचिका उस समय दाखिल की गई थी, जब अखलाक की पत्नी इकरामन फास्ट ट्रैक कोर्ट में अपना बयान दर्ज कराने पहुंची थीं।


अब तक किसने दिया बयान
अब तक इस मामले में केवल अखलाक की बेटी शाइस्ता के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। वहीं, अखलाक की पत्नी इकरामन और बेटे दानिश के बयान अभी दर्ज होना बाकी हैं। अदालत के फैसले के बाद माना जा रहा है कि अब जल्द ही शेष गवाहों की गवाही भी दर्ज कराई जाएगी। न्यायिक सूत्रों के अनुसार, फास्ट ट्रैक कोर्ट का उद्देश्य इस मामले का निपटारा समयबद्ध तरीके से करना है, ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके।


क्या था आरोपियों का तर्क
छह आरोपी—विनय, शिवम, सौरभ, संदीप, गौरव और हरिओम—की ओर से दायर स्थानांतरण याचिका में दावा किया गया था कि पुलिस ने उनके खिलाफ झूठे आरोप लगाए हैं और उन्हें गलत तरीके से फंसाया गया है। याचिका में यह भी कहा गया था कि उत्तर प्रदेश सरकार ने निर्दोष लोगों के खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस लेने के निर्देश दिए थे। हालांकि, इससे पहले एफटीसी अदालत ने धारा 321 सीआरपीसी के तहत मामला वापस लेने की अर्जी को खारिज कर दिया था। इसी आधार पर जिला न्यायालय ने भी स्थानांतरण याचिका को निरस्त कर दिया। अदालत के इस फैसले के बाद अब सभी की निगाहें आगामी सुनवाई और गवाहों के बयानों पर टिकी हैं, जो इस मामले की दिशा तय कर सकते हैं।

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