UGC को लेकर सड़कों पर उतरी करणी सेना, ग्रेनो कलेक्ट्रेट का किया घेराव, किसान संगठन भी हुए शामिल
- Shiv Kumar
- 27 Jan, 2026
नोएडा में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों के विरोध में बुधवार को राष्ट्रवादी करणी सेना के नेतृत्व में ग्रेटर नोएडा कलेक्ट्रेट पर जोरदार प्रदर्शन किया गया। इस प्रदर्शन में करणी सेना के साथ-साथ कई किसान संगठन और स्वर्ण समाज से जुड़े संगठन भी शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने पैदल मार्च करते हुए कलेक्ट्रेट तक विरोध मार्च निकाला और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कलेक्ट्रेट पहुंचने के बाद प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा और यूजीसी के नए नियमों को तत्काल वापस लेने की मांग की।
“नए नियम समाज में बढ़ा रहे हैं खाई”
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए करणी सेना के नेता करण ठाकुर ने कहा कि यूजीसी के नए नियम समाज को जोड़ने की बजाय जातियों के बीच खाई पैदा कर रहे हैं। उनका कहना था कि यह नियम शिक्षा के माहौल को बिगाड़ने वाले हैं और इससे छात्रों में असुरक्षा की भावना पैदा होगी। करण ठाकुर ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि केंद्र सरकार ने इन नियमों को जल्द वापस नहीं लिया तो करणी सेना और स्वर्ण समाज मिलकर बड़े स्तर पर आंदोलन करेगा। उन्होंने यह भी ऐलान किया कि आने वाले दिनों में जंतर-मंतर पर भी इस मुद्दे को लेकर बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा।
“सवर्ण समाज के शोषण की साजिश”
प्रदर्शन के दौरान गीता भाटी ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि इस तरह का कानून लाकर सरकार ने बड़ी गलती की है। उन्होंने कहा कि नए नियमों से सवर्ण समाज का शोषण होगा और शिक्षा संस्थानों में छात्रों और शिक्षकों पर झूठे मुकदमे दर्ज किए जाने की आशंका बढ़ जाएगी। गीता भाटी ने दावा किया कि इस माहौल में विश्वविद्यालयों के छात्र मानसिक दबाव और डिप्रेशन में जा सकते हैं, क्योंकि किसी भी तरह का गलत आरोप उन पर लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यह कानून शिक्षा को भय के वातावरण में धकेल देगा, जो किसी भी समाज के लिए घातक है।
पुलिस रही मुस्तैद, शांतिपूर्ण रहा प्रदर्शन
प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन ने कलेक्ट्रेट परिसर और आसपास भारी पुलिस बल तैनात किया था, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना न हो। पुलिस की मौजूदगी में प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट कहा कि जब तक यूजीसी के नए नियम वापस नहीं लिए जाते, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा। ज्ञापन सौंपने के बाद प्रदर्शनकारियों ने सरकार से इस कानून पर पुनर्विचार करने की मांग दोहराई।
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