सरकारी स्कूलों में डिजिटल शिक्षा की नई पहल, ग्रेटर नोएडा में शुरू हुआ डिजी विद्या शाला कार्यक्रम

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ग्रेटर नोएडा के तुगलपुर स्थित सरकारी स्कूल में डिजी विद्या शाला कार्यक्रम की शुरुआत हुई। इसका उद्देश्य कक्षा चार से आठ तक के छात्रों की हिंदी, अंग्रेजी और गणित में पठन-लेखन व गणितीय समझ को डिजिटल माध्यम से मजबूत करना है।

ग्रेटर नोएडा के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की शिक्षा को मजबूत और आधुनिक बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। इसी कड़ी में बुधवार को ग्रेटर नोएडा के तुगलपुर स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय में डिजी विद्या शाला कार्यक्रम की शुरुआत की गई। इस पहल का मुख्य उद्देश्य कक्षा चार से आठ तक के छात्रों की पठन-लेखन क्षमता और गणितीय समझ को बेहतर बनाना है, ताकि बच्चे मजबूत बुनियादी शिक्षा के साथ आगे की पढ़ाई के लिए तैयार हो सकें। कार्यक्रम के शुभारंभ के मौके पर शिक्षा विभाग और कार्यक्रम से जुड़े संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। डिजिटल तकनीक के जरिए बच्चों को उनकी जरूरत के अनुसार पढ़ाने की इस पहल को शिक्षा में सकारात्मक बदलाव की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है।


कंप्यूटर आधारित पढ़ाई से बढ़ रही बच्चों की समझ

जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी राहुल पंवार ने बताया कि सीएसआर के तहत संचालित डिजी विद्या शाला कार्यक्रम पिछले एक साल से जिले के कई सरकारी स्कूलों में सफलतापूर्वक चल रहा है। उन्होंने कहा कि कंप्यूटर आधारित शिक्षण प्रणाली से बच्चों की बुनियादी समझ में लगातार सुधार देखने को मिला है। डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से बच्चे पढ़ाई में ज्यादा रुचि ले रहे हैं और विषयों को बेहतर तरीके से समझ पा रहे हैं। इसका सीधा असर उनकी परीक्षा की तैयारी पर भी पड़ रहा है। बीएसए ने कहा कि तकनीक आधारित पढ़ाई से कमजोर छात्रों को भी आगे बढ़ने का अवसर मिल रहा है, जिससे शिक्षा में समानता को बढ़ावा मिल रहा है।


डिजिटल और व्यक्तिगत सीखने से शिक्षा में बदलाव

ग्रुप के उपाध्यक्ष पीयूष झा ने कहा कि संस्था का लक्ष्य डिजिटल और व्यक्तिगत सीखने को कक्षा तक पहुंचाकर शिक्षा में वास्तविक और टिकाऊ बदलाव लाना है। उन्होंने बताया कि डिजी विद्या शाला सिर्फ तकनीक का इस्तेमाल भर नहीं है, बल्कि यह बच्चों के आत्मविश्वास को बढ़ाने और उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने का माध्यम भी है। एजुकेशनल इनिशिएटिव्स के सह-संस्थापक श्रीधर राजगोपालन और प्रथम इन्फोटेक फाउंडेशन के सीईओ प्रेम यादव ने बताया कि यह कार्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान को मजबूत करता है। डिजिटल माध्यम से बच्चों को उनकी क्षमता के अनुसार सीखने का मौका मिल रहा है, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता में लगातार सुधार हो रहा है।


हिंदी, अंग्रेजी और गणित पर रहेगा खास फोकस

यह तकनीक आधारित व्यक्तिगत सीखने वाला कार्यक्रम प्रथम इन्फोटेक फाउंडेशन और एजुकेशनल इनिशिएटिव्स के सहयोग से संचालित किया जा रहा है। इसमें माइंडस्पार्क नामक पर्सनलाइज्ड एडेप्टिव लर्निंग प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो हर छात्र की सीखने की गति और स्तर के अनुसार अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराता है। इसके जरिए हिंदी, अंग्रेजी और गणित जैसे मुख्य विषयों में बच्चों को व्यक्तिगत सुधारात्मक सहायता दी जा रही है। शिक्षकों का मानना है कि इस पहल से सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों की शैक्षणिक स्थिति में आने वाले समय में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।

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