नोएडा हादसे में युवराज की मौत का मामला, SIT ने सीएम योगी को सौंपी जांच रिपोर्ट, अधिकारियों पर गिरेगी गाज

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नोएडा के सेक्टर-150 में युवराज मेहता की मौत मामले में SIT ने 600 पन्नों की रिपोर्ट सीएम योगी को सौंपी। रिपोर्ट में जलभराव, रेस्क्यू में देरी और प्रशासनिक लापरवाही को मौत की बड़ी वजह बताया गया है।

नोएडा के सेक्टर-150 में इंजीनियर युवराज मेहता की कार जलभराव में डूबने से हुई मौत के मामले में गठित विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी अंतिम रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंप दी है। सात दिनों तक चली गहन जांच के बाद तैयार यह रिपोर्ट प्रशासनिक तंत्र की गंभीर लापरवाही और आपसी समन्वय की कमी की ओर साफ इशारा करती है। रिपोर्ट में बताया गया है कि यदि समय पर सही कदम उठाए जाते, तो युवराज की जान बचाई जा सकती थी। करीब 600 पन्नों की इस विस्तृत रिपोर्ट के आधार पर बड़े स्तर पर सख्त कार्रवाई के संकेत मिल रहे हैं। अब इस पूरे मामले में अगला फैसला मुख्यमंत्री स्तर पर लिया जाएगा, जिस पर प्रदेश की नजरें टिकी हुई हैं।


600 पन्नों की रिपोर्ट में सिस्टम की परत-दर-परत जांच

एसआईटी को नोएडा प्राधिकरण, पुलिस विभाग और जिला प्रशासन की ओर से लगभग 600 पन्नों का लिखित जवाब सौंपा गया था। इन दस्तावेजों में जलभराव की पूर्व चेतावनी से जुड़े रिकॉर्ड, स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज प्लान, कंट्रोल रूम की कार्यप्रणाली, ड्यूटी रोस्टर, कॉल डिटेल्स, रेस्क्यू रिस्पॉन्स टाइम और मौके पर मौजूद अधिकारियों की जिम्मेदारियों का पूरा ब्योरा शामिल है। जांच टीम ने हर दस्तावेज को आपस में क्रॉस-वेरिफाई किया और उसके बाद ही निष्कर्ष निकाले। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कई अहम जानकारियां पहले से मौजूद थीं, लेकिन उन्हें गंभीरता से नहीं लिया गया। कागजों पर तैयार योजनाएं जमीनी स्तर पर लागू नहीं हुईं, जिसका सीधा खामियाजा एक निर्दोष युवक को अपनी जान देकर चुकाना पड़ा।


रेस्क्यू में दो घंटे की देरी, समन्वय की भारी कमी

जांच के दौरान सबसे बड़ा और गंभीर सवाल यह उभरा कि हादसे के बाद युवराज को कार से बाहर निकालने में लगभग दो घंटे का समय क्यों लग गया। एसआईटी की रिपोर्ट के मुताबिक, शुरुआती समय में रेस्क्यू सिस्टम पूरी तरह से सक्रिय ही नहीं हुआ। एसडीआरएफ, पुलिस और स्थानीय प्रशासन के बीच समन्वय की स्पष्ट कमी सामने आई। कंट्रोल रूम से समय पर निर्देश जारी नहीं किए गए और मौके पर मौजूद टीमों ने स्थिति की गंभीरता को समझने में देर कर दी। रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि पहले आधे घंटे में प्रभावी रेस्क्यू शुरू हो जाता, तो परिणाम अलग हो सकता था।


ड्रेनेज प्लान फाइलों में, सड़क पर दिखी हकीकत

एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में यह भी उजागर किया है कि जिस स्थान पर यह दर्दनाक हादसा हुआ, वहां जल निकासी की स्थायी योजना पहले से प्रस्तावित थी। लेकिन यह योजना सिर्फ फाइलों तक सीमित रह गई। प्लॉट आवंटन से लेकर हादसे के दिन तक ड्रेनेज सिस्टम को दुरुस्त करने के लिए कोई ठोस काम नहीं किया गया। जांच के दायरे में उस समय तैनात वरिष्ठ अधिकारियों, जूनियर इंजीनियरों और संबंधित विभागों की भूमिका को शामिल किया गया है। सूत्रों के मुताबिक रिपोर्ट में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम स्पष्ट रूप से दर्ज हैं। अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रिपोर्ट का अध्ययन कर अंतिम फैसला लेंगे, जिसमें निलंबन, विभागीय कार्रवाई और आपराधिक मुकदमे तक के निर्देश संभव हैं। युवराज मेहता की मौत अब एक हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की विफलता की मिसाल बन चुकी है।

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