सेक्टर-150 हादसा नहीं, लापरवाही का नतीजा, सेटेलाइट इमेज से उजागर हुई मौत के कुएं की पूरी तस्वीर
- Shiv Kumar
- 31 Jan, 2026
नोएडा के सेक्टर-150 के एससी-02/ए3 प्लॉट पर इंजीनियर युवराज की मौत अब सिर्फ एक दुर्घटना नहीं मानी जा रही है। एसआईटी जांच में सामने आई सैटेलाइट इमेज और दस्तावेजों ने साफ कर दिया है कि यह हादसा सालों से चली आ रही प्रशासनिक और निर्माण स्तर की गंभीर लापरवाही का नतीजा था। जांच रिपोर्ट के मुताबिक जिस बेसमेंट में पानी भरने से युवराज की जान गई, वह गड्ढा 2022 से ही खतरनाक रूप ले चुका था, लेकिन न बिल्डर ने सुध ली और न ही प्राधिकरण ने समय रहते कोई ठोस कदम उठाया।
2017 में खोदा गया गड्ढा, सुरक्षा इंतजाम पूरी तरह नदारद
एसआईटी रिपोर्ट के अनुसार साल 2017 में प्लॉट पर बेसमेंट निर्माण के लिए गड्ढा खोदा गया था। नियमों के तहत इतनी गहरी खुदाई के बाद साइट पर सरिया, बैरिकेडिंग और अन्य संरचनात्मक सुरक्षा इंतजाम जरूरी थे। लेकिन मौके पर न तो कोई सुरक्षा घेरा लगाया गया और न ही गड्ढे को ढकने या सुरक्षित करने की कोशिश की गई। यह गड्ढा सालों तक खुला पड़ा रहा और धीरे-धीरे खतरे में तब्दील होता चला गया। हैरानी की बात यह है कि इतने लंबे समय तक प्राधिकरण के निरीक्षण तंत्र ने भी इस पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की।
साल 2021 की तस्वीर, जिसमें एल शेप में बेसमेंट के लिए खोदा गया गड्ढा नजर आ रहा है।
2022-23 की सैटेलाइट इमेज ने खोली लापरवाही की परतें
जांच में सामने आई 2022 और 2023 की सैटेलाइट इमेज में साफ दिखाई देता है कि गड्ढे में पानी भरना शुरू हो चुका था। शुरुआत में इसे मामूली जलभराव मानकर नजरअंदाज किया गया, लेकिन समय के साथ पानी का स्तर लगातार बढ़ता गया। इसके बावजूद न तो बिल्डर ने पानी निकालने की व्यवस्था की और न ही प्राधिकरण ने सख्त कदम उठाए। रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि गड्ढे की स्थिति की जानकारी होने के बावजूद इसे सुरक्षित घोषित करने जैसी कोई कार्रवाई नहीं की गई।
साल 2026 की तस्वीर, जिसमें एल शेप में बेसमेंट पानी भरा हुआ नजर आ रहा है।
टूटी ड्रेनेज और यमुना की बाढ़ बनी मौत की वजह
एसआईटी जांच में पानी भरने की दो बड़ी वजहें सामने आई हैं। पहली, प्लॉट के पास मौजूद ड्रेनेज लाइन का टूटा होना, जिससे लगातार पानी बेसमेंट में जाता रहा। दूसरी, 2023 में यमुना नदी में आई भीषण बाढ़, जिसके कारण हिंडन नदी में बैक-फ्लो हुआ। इसी बैक-फ्लो का पानी बेसमेंट तक पहुंच गया और गड्ढा धीरे-धीरे तालाब में बदल गया। हालात इतने बिगड़ चुके थे कि यह जगह किसी के लिए भी जानलेवा साबित हो सकती थी।
नोटिस कागजों तक सीमित, अब कार्रवाई की तैयारी
प्राधिकरण की ओर से बिल्डर को कई बार नोटिस जारी किए गए, जिनमें पानी निकालने और साइट सुरक्षित करने के निर्देश थे। लेकिन ये नोटिस फाइलों से बाहर नहीं निकल सके। एसआईटी ने हाल ही में प्राधिकरण से करीब 20 नए सवालों के जवाब मांगे, जिनमें अनुमति, वर्क ऑर्डर, साइट सुपरविजन और रिपोर्टिंग चेन शामिल है। सूत्रों के मुताबिक सभी जवाब सौंप दिए गए हैं और सोमवार तक जिम्मेदार अधिकारियों व बिल्डर पर कड़ी कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है।
Leave a Reply
Your email address will not be published. Required fields are marked *






