ग्रेटर नोएडा में एक और बीजेपी नेता ने दिया इस्तीफा, यूजीसी को लेकर पांच नेता पहले ही छोड़ चुके हैं पार्टी
- Shiv Kumar
- 02 Feb, 2026
ग्रेटर नोएडा के जेवर क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी को उस समय झटका लगा जब थोरा गांव में पार्टी के शक्ति केंद्र प्रभारी समेत पांच बूथ अध्यक्षों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। शनिवार को हुई इस घटना के बाद स्थानीय राजनीतिक माहौल में हलचल तेज हो गई है। इस्तीफा देने वाले नेताओं का कहना है कि UGC से जुड़े मुद्दे को लेकर क्षेत्र में लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं और पार्टी कार्यकर्ताओं को जनता के बीच नाराजगी का सामना करना पड़ रहा है। गांव और आसपास के इलाकों में इस फैसले की चर्चा तेजी से फैल रही है और इसे आगामी स्थानीय राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है।
शक्ति केंद्र प्रभारी ने बताया इस्तीफे का कारण
इस्तीफा देने वालों में थोरा गांव के शक्ति केंद्र प्रभारी राम प्रकाश प्रमुख रूप से शामिल हैं। उन्होंने बताया कि UGC से जुड़े फैसले के कारण सवर्ण समाज में गहरी नाराजगी देखी जा रही है। उनका कहना है कि यह समाज लंबे समय से बीजेपी का समर्थक रहा है, लेकिन हालिया स्थिति में उन्हें जनता के बीच पार्टी की योजनाओं और नीतियों को समझाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। राम प्रकाश ने आरोप लगाया कि इस एक्ट के जरिए समाज को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया है, जिससे लोगों में असंतोष बढ़ा है। उन्होंने कहा कि लगातार विरोध और दबाव के कारण उन्होंने पद से हटने का फैसला लिया।
पांच बूथ अध्यक्षों ने भी छोड़ी जिम्मेदारी
राम प्रकाश के साथ-साथ बूथ अध्यक्ष खुशीराम, संजू, सुधीर, वीरेंद्र और प्रथिराय ने भी पार्टी पदों से इस्तीफा दे दिया। स्थानीय लोगों के अनुसार, गांवों में इस मुद्दे पर चर्चाएं तेज हैं और कई जगहों पर विरोध की आवाजें भी उठ रही हैं। हालांकि, पार्टी की ओर से अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि जल्द स्थिति को संभाला नहीं गया तो इसका असर आगामी चुनावी समीकरणों पर भी पड़ सकता है। वहीं, कुछ स्थानीय कार्यकर्ताओं का कहना है कि बातचीत के जरिए स्थिति को सामान्य बनाने की कोशिशें भी शुरू हो सकती हैं।
स्थानीय स्तर पर बढ़ सकती है राजनीतिक हलचल
क्षेत्र के कई ग्रामीणों का कहना है कि इस्तीफे का यह कदम स्थानीय राजनीति को प्रभावित कर सकता है। गांवों में पार्टी संगठन की सक्रियता बूथ स्तर पर ही मजबूत होती है और जब इसी स्तर पर पदाधिकारी हटते हैं तो संगठन को नुकसान उठाना पड़ सकता है। फिलहाल देखना होगा कि पार्टी नेतृत्व इस मामले को कैसे संभालता है और नाराज कार्यकर्ताओं को मनाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं। स्थानीय स्तर पर यह मुद्दा आने वाले दिनों में और भी गरमा सकता है।
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