नोएडा में मुस्लिम धर्म गुरू पर हमले का मामला, सवालों के घेरे में यूपी सरकार, सुप्रीम कोर्ट ने किया जवाब तलब
- Shiv Kumar
- 04 Feb, 2026
नोएडा में मुस्लिम मौलवी पर कथित हमले के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने साफ कहा कि केवल जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर देना, सही कानूनी धाराओं में एफआईआर दर्ज न करने का विकल्प नहीं हो सकता। अदालत ने राज्य सरकार से स्पष्ट रुख अपनाने और कानून के मुताबिक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है।
यह मामला दिल्ली निवासी काज़ीम अहमद शेरवानी की याचिका से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2021 में उनकी पहचान के आधार पर उनके साथ मारपीट और दुर्व्यवहार किया गया, लेकिन पुलिस ने शिकायत के बावजूद उचित धाराओं में मुकदमा दर्ज नहीं किया।
हेट क्राइम से जुड़ी धाराएं न जोड़ने पर कोर्ट सख्त
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद एफआईआर तो दर्ज की गई, लेकिन उसमें घृणा अपराध से जुड़ी महत्वपूर्ण धाराएं शामिल नहीं की गईं। इस पर जस्टिस संदीप मेहता ने टिप्पणी करते हुए कहा कि उचित धाराओं के बिना जांच आगे बढ़ना मुश्किल हो जाता है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि कानून के तहत कुछ धाराओं में आगे बढ़ने के लिए सरकारी मंजूरी जरूरी है, तो भी पहले सही धाराओं में एफआईआर दर्ज करना आवश्यक है। अदालत ने कहा कि जांच अधिकारी पर विभागीय कार्रवाई करना एफआईआर की कमी को पूरा नहीं कर सकता। इस दौरान राज्य सरकार के वकील ने भी माना कि उचित धाराओं में मामला दर्ज होना चाहिए था।
सरकार से मांगा जवाब, एक सप्ताह का समय
सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार से पूछा कि यदि मंजूरी से इनकार किया जा सकता है, तो क्या एफआईआर दर्ज करने से भी इनकार किया जा सकता है? इस पर सरकारी पक्ष ने माना कि मामला दर्ज होना चाहिए था। कोर्ट ने राज्य सरकार को एक सप्ताह के भीतर स्पष्ट निर्देश लेकर अदालत के समक्ष पेश होने का आदेश दिया है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि इस मामले को देशभर की घटनाओं से जोड़कर सामान्य निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा, क्योंकि यह एक व्यक्तिगत मामला है। कोर्ट ने साफ किया कि फिलहाल सुनवाई का दायरा इसी मामले तक सीमित रहेगा और आगे की कार्रवाई राज्य सरकार के जवाब के बाद तय होगी।
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