एनसीआर में होम बायर्स से धोखाधड़ी के मामले में सख्त एक्शन, अब सीबीआई करेगी मामले की जांच, नोएडा प्राधिकरण से मांगे बिल्डर्स के दस्तावेज

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नोएडा सबवेंशन स्कीम घोटाले में सीबीआई ने जांच तेज करते हुए प्राधिकरण से बिल्डरों और प्रोजेक्ट्स से जुड़े दस्तावेज मांगे हैं। हजारों होमबायर्स प्रभावित हैं और कई परियोजनाओं में गड़बड़ियों की जांच जारी है, जिससे आगे बड़ी कार्रवाई की उम्मीद बढ़ी है।

 नोएडा और ग्रेटर नोएडा में सबवेंशन स्कीम के जरिए घर खरीदारों से जुड़े विवादों में अब जांच एजेंसियों की सक्रियता तेज होती दिखाई दे रही है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने एक बार फिर नोएडा प्राधिकरण में दस्तक देकर बिल्डरों और उनकी कंसोर्टियम कंपनियों से जुड़े प्रोजेक्ट्स की विस्तृत जानकारी मांगी है। खास तौर पर संवेशन स्कीम के तहत चलाए गए प्रोजेक्ट्स की सूची, ब्रोशर और परियोजनाओं के विवरण को चार्ट के रूप में उपलब्ध कराने को कहा गया है। प्राधिकरण अब इन दस्तावेजों को तैयार कर एजेंसी को सौंपने की प्रक्रिया में जुट गया है, जिससे बिल्डर लॉबी की परेशानियां बढ़ सकती हैं।


सबवेंशन स्कीम में फंसे हजारों होमबायर्स, जांच में तेजी
दिल्ली-एनसीआर के हजारों घर खरीदार इस स्कीम के कारण लंबे समय से परेशान हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद सीबीआई ने हाल ही में 22 कंपनियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर 47 ठिकानों पर छापेमारी की थी। जांच में सामने आया कि कई बिल्डरों ने वित्तीय संस्थानों के साथ मिलकर योजनाओं के जरिए खरीदारों को राहत देने का वादा किया, लेकिन बाद में फ्लैट भी नहीं दिए और ईएमआई का बोझ खरीदारों पर डाल दिया गया। एजेंसी अब उन सभी दस्तावेजों को खंगाल रही है जो प्राधिकरण के पास जमा हैं। शुरुआती जांच में कई परियोजनाओं में गड़बड़ियों के संकेत मिले, जिसके बाद दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तेज की जा रही है।


कैसे काम करती थी स्कीम और कहां हुई बड़ी गड़बड़ी
सबवेंशन स्कीम करीब 2014 के आसपास लाई गई थी, जिसमें बिल्डर कब्जा मिलने तक खरीदार की ईएमआई देने का वादा करते थे। इस योजना ने शुरुआत में खरीदारों को आकर्षित किया, लेकिन बाद में कई परियोजनाओं में निर्माण कार्य रुक गया। आरोप है कि कुछ मामलों में बैंकों ने बिना उचित मूल्यांकन के बिल्डरों को पूरी लोन राशि जारी कर दी। इसके बाद बिल्डरों ने ईएमआई देना बंद कर दिया और फ्लैट भी नहीं दिए गए। परिणामस्वरूप खरीदार कर्ज में डूब गए और कई प्रोजेक्ट अधूरे रह गए। अब एजेंसियां इन सभी वित्तीय लेनदेन और समझौतों की परतें खोल रही हैं।


करीब 40 परियोजनाओं के खरीदार प्रभावित, आगे और कार्रवाई संभव
नोएडा, ग्रेटर नोएडा और आसपास के इलाकों की लगभग 40 परियोजनाओं के हजारों खरीदार अब भी अपने घर का इंतजार कर रहे हैं। सीबीआई स्पोर्ट्स सिटी प्रोजेक्ट सहित कई अन्य परियोजनाओं से जुड़े मामलों की भी जांच कर रही है। पिछले कुछ महीनों में जांच एजेंसी की टीमें कई बार प्राधिकरण दफ्तर पहुंच चुकी हैं। अधिकारियों का मानना है कि दस्तावेजों की गहन जांच के बाद और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। खरीदारों को उम्मीद है कि इस बार जांच से उन्हें राहत मिलेगी और वर्षों से अटकी परियोजनाओं को लेकर ठोस कार्रवाई सामने आएगी।

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