जमीन अधिग्रहण के लिए नोएडा में तीनों प्राधिकरण का मुआवजा दर होगा बराबर, लैंड पूल पॉलिसी को एडॉप्ट करने की तैयारी

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न्यू नोएडा बसाने की प्रक्रिया तेज हो गई है। लैंड पूल नीति लागू होने से जमीन अधिग्रहण आसान होगा और किसानों को विकसित भूखंड मिलेंगे। सरकार तीनों प्राधिकरणों में समान मुआवजा दर लागू करने की तैयारी भी कर रही है।

नोएडा और प्रस्तावित न्यू नोएडा क्षेत्र में जमीन अधिग्रहण को आसान बनाने के लिए लैंड पूल नीति को अपनाने की तैयारी तेज हो गई है। नोएडा प्राधिकरण के सीईओ कृष्णा करुणेश ने बताया कि इस संबंध में शासन को प्रस्ताव भेजा गया है और मंजूरी मिलते ही इसे नीति में शामिल कर लिया जाएगा। इससे जमीन लेने की प्रक्रिया सरल होगी और तीनों प्राधिकरणों में मुआवजे की दर भी समान हो सकेगी। न्यू नोएडा के विकास को लेकर प्रशासनिक स्तर पर भी तेजी से तैयारियां चल रही हैं।


लैंड पूल नीति से भू-स्वामियों को क्या मिलेगा फायदा
लैंड पूल नीति के तहत किसानों और भू-स्वामियों को अपनी जमीन देने के बदले विकसित भूखंड दिए जाएंगे। योजना के अनुसार, जमीन देने वाले भू-स्वामी को विकसित भूमि का 25 प्रतिशत हिस्सा वापस आवंटित होगा। इसमें औद्योगिक उपयोग के लिए लगभग 80 प्रतिशत, आवासीय के लिए 12 प्रतिशत और व्यावसायिक उपयोग के लिए 8 प्रतिशत भूखंड शामिल होंगे। जब तक विकसित प्लॉट नहीं मिलते, तब तक किसानों को प्रति एकड़ प्रति माह 5000 रुपये मुआवजा भी मिलेगा। आवंटन लॉटरी के जरिए होगा और भूखंडों में बिजली, पानी, सीवरेज, सड़क और कचरा निस्तारण जैसी सुविधाएं प्राधिकरण की ओर से विकसित की जाएंगी।


हाइब्रिड मॉडल से होगा जमीन अधिग्रहण
न्यू नोएडा के लिए करीब 80 गांवों की जमीन अधिग्रहित की जानी है। इसके लिए हाइब्रिड मॉडल पर विचार किया जा रहा है, जिसमें आपसी सहमति और लैंड पूल दोनों तरीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है। इस मॉडल पर लखनऊ में प्रस्तुतीकरण भी दिया जा चुका है और अंतिम फैसला शासन स्तर पर लिया जाएगा। प्रशासन ने अधिग्रहण प्रक्रिया को सुचारु बनाने के लिए तीन नायब तहसीलदारों की नियुक्ति की भी तैयारी कर ली है। न्यू नोएडा का मास्टर प्लान लगभग 209 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में लागू होगा, जिसकी अधिसूचना पहले ही जारी की जा चुकी है।


चार चरणों में विकसित होगा न्यू नोएडा
प्राधिकरण की योजना के अनुसार, न्यू नोएडा को चार चरणों में बसाया जाएगा। पहले चरण में 2023 से 2027 के बीच लगभग 3165 हेक्टेयर भूमि विकसित होगी। इसके बाद 2027 से 2032 तक 3798 हेक्टेयर, फिर 2032 से 2037 तक करीब 5908 हेक्टेयर और अंतिम चरण में 2037 से 2041 के बीच 8230 हेक्टेयर क्षेत्र को विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण में मुआवजे की दर को एक समान करने पर भी काम चल रहा है, ताकि किसानों में असमानता की शिकायत खत्म हो और विकास कार्यों में तेजी आ सके।

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