नोएडा में करोड़ों खर्च कर बनाया गया स्काईवॉक होगा अस्थाई, प्राधिकरण के फैसले पर उठे सवाल
- Shiv Kumar
- 11 Feb, 2026
नोएडा के यात्रियों को जल्द बड़ी राहत मिलने वाली है, क्योंकि एक्वा लाइन के सेक्टर-51 और ब्लू लाइन के सेक्टर-52 मेट्रो स्टेशन को जोड़ने वाला स्काईवॉक जल्द ही शुरू किया जाएगा। नोएडा प्राधिकरण के सीईओ कृष्णा करुणेश ने बताया कि निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है और इसे प्राथमिकता के आधार पर जनता के लिए खोला जाएगा। हालांकि यह सुविधा स्थायी नहीं होगी, क्योंकि भविष्य में यहां बनने वाले विशाल मॉल के अंदर से ही दोनों स्टेशनों को जोड़ा जाएगा, जिसके बाद मौजूदा स्काईवॉक को हटाया जाना तय है।
मॉल निर्माण के बाद बदलेगी कनेक्टिविटी की व्यवस्था
सेक्टर-51 में स्वीडन की कंपनी IKEA को करीब 49,675 वर्गमीटर जमीन पर बड़े मॉल के निर्माण की मंजूरी दी गई है, जिसे इंगका सेंटर्स के नाम से विकसित किया जा रहा है। प्राधिकरण और कंपनी के बीच हुए समझौते के अनुसार मॉल के डिजाइन में ही दोनों मेट्रो स्टेशनों को आपस में जोड़ने की व्यवस्था की गई है। इसी वजह से मौजूदा स्काईवॉक को 2029 के बाद हटाया जा सकता है। अगर किसी कारण से ऐसा संभव नहीं हुआ, तो 2035 तक इसे अनिवार्य रूप से हटाना होगा। यानी करीब 40 करोड़ रुपये की लागत से बना यह स्काईवॉक केवल अस्थायी समाधान है।
निर्माण में देरी और नई तकनीकी चुनौतियां आईं सामने
स्काईवॉक का निर्माण जून 2023 में शुरू हुआ था और इसे महज पांच महीनों में पूरा किया जाना था, लेकिन डेढ़ साल बीतने के बाद भी काम पूरी तरह खत्म नहीं हो सका। अब सेक्टर-51 की ओर मेट्रो स्टेशन के पास बीम आने से तकनीकी समस्या खड़ी हो गई है। इसके समाधान के लिए स्ट्रक्चर टेस्टिंग कर भार को दूसरे बीम पर शिफ्ट करने की योजना बनाई जा रही है। सवाल यह भी उठ रहा है कि जिस ढांचे को कुछ वर्षों में हटाया जाना है, उसके लिए इतनी बड़ी तकनीकी और वित्तीय कवायद क्यों की जा रही है।
पहले बने वॉक-वे का भी नहीं मिल पा रहा लाभ
स्काईवॉक बनने से पहले दोनों स्टेशनों को जोड़ने के लिए करीब 2 करोड़ रुपये खर्च कर वॉक-वे बनाया गया था। शुरुआती दिनों में इस मार्ग पर ई-रिक्शा भी चलते थे, जिससे यात्रियों को राहत मिलती थी। लेकिन स्काईवॉक का निर्माण शुरू होने के बाद यह सुविधा बंद कर दी गई और अब लोग पैदल चलने को मजबूर हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब स्थायी कनेक्टिविटी पहले से प्रस्तावित थी, तो अस्थायी व्यवस्था पर इतना खर्च क्यों किया गया। फिलहाल यात्रियों को स्काईवॉक के शुरू होने का इंतजार है।
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