ई-लैंड मैनेजमेंट सिस्टम की देखरेख के लिए डीएमआईसी नियुक्त करेगा आईटी कंसल्टेंट, 6 मार्च को खुलेगी टेक्निकल बिड
- Shiv Kumar
- 13 Feb, 2026
ग्रेटर नोएडा में 750 एकड़ में विकसित हो रही इंडस्ट्रियल टाउनशिप के डिजिटल सिस्टम को और आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। DMIC Integrated Industrial Township Greater Noida Noida Limited ने अपने इलेक्ट्रॉनिक लैंड मैनेजमेंट सिस्टम (e-LMS) और आधिकारिक वेबसाइट के रखरखाव व अपग्रेड के लिए तीन साल के लिए आईटी कंसल्टेंट नियुक्त करने का फैसला किया है। परियोजना की अनुमानित लागत करीब तीन करोड़ रुपये बताई जा रही है। जारी आरएफपी के अनुसार इच्छुक कंपनियां 3 मार्च तक आवेदन कर सकती हैं, जबकि टेक्निकल बिड 6 मार्च को खोली जाएंगी। प्राधिकरण का कहना है कि डिजिटल सेवाओं को तेज, सुरक्षित और अधिक भरोसेमंद बनाना इस पहल का मुख्य उद्देश्य है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म से संचालित हो रही पूरी टाउनशिप व्यवस्था
e-LMS सिस्टम इंडस्ट्रियल टाउनशिप का मुख्य डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसके माध्यम से भूखंड आवंटन, बिल्डिंग प्लान अप्रूवल और भुगतान जैसी प्रक्रियाएं पूरी तरह ऑनलाइन संचालित होती हैं। औद्योगिक इकाइयां अपने नक्शे, ड्रॉइंग और जरूरी अनुपालन दस्तावेज भी इसी पोर्टल पर अपलोड करती हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के कारण उद्योगों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते और प्रक्रियाएं तेज होती हैं। नया आईटी कंसल्टेंट सिस्टम के संचालन और मेंटेनेंस को और बेहतर बनाएगा, ताकि उद्योगों को निर्बाध सेवाएं मिल सकें और भविष्य की जरूरतों के अनुसार प्लेटफॉर्म को समय-समय पर अपडेट भी किया जा सके।
पारदर्शिता और सुरक्षित भुगतान पर रहेगा विशेष फोकस
अधिकारियों के मुताबिक e-LMS सिस्टम प्राधिकरण और अलॉटियों के बीच मुख्य डिजिटल कड़ी का काम करता है, जहां से सभी स्वीकृतियां और भुगतान प्रक्रियाएं संचालित होती हैं। नए कंसल्टेंट की जिम्मेदारी सिस्टम की सुरक्षा, भुगतान प्रोसेसिंग की निगरानी और पारदर्शिता सुनिश्चित करना भी होगी। इससे रियल-टाइम ट्रैकिंग और वित्तीय लेन-देन की निगरानी आसान होती है। डिजिटल जांच और अनुमोदन प्रक्रियाएं तेज होने से निवेशकों का भरोसा भी मजबूत होता है। अधिकारियों का मानना है कि अपग्रेड के बाद निवेशकों और उद्योगों को पहले से ज्यादा सुविधाजनक और सुरक्षित डिजिटल अनुभव मिलेगा।
24x7 सपोर्ट, डेटा सुरक्षा और डिजास्टर रिकवरी की व्यवस्था
नियुक्त एजेंसी को सिस्टम के लिए 24x7 इमरजेंसी सपोर्ट देना अनिवार्य होगा। तकनीकी खराबी, सिस्टम डाउनटाइम या साइबर हमले जैसी स्थिति में तत्काल समाधान उपलब्ध कराना भी अनुबंध का हिस्सा होगा। साथ ही नियमित डेटा बैकअप, सिक्योरिटी ऑडिट, एसएसएल मैनेजमेंट और सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप डेटा सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी। वेबसाइट परफॉर्मेंस सुधार, सॉफ्टवेयर अपडेट, बग फिक्सिंग और डेटाबेस मेंटेनेंस का कार्य भी इसी के जिम्मे रहेगा। अधिकारियों का कहना है कि मजबूत डिजास्टर रिकवरी प्लान से किसी भी आपात स्थिति में सेवाएं जल्दी बहाल की जा सकेंगी।
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