नोएडा में युवराज मौत मामले में PIL दाखिल, अब 17 मार्च को होगी सुनवाई, रिस्पॉन्स टीम को लेकर प्राधिकरण से मांगा जवाब
- Shiv Kumar
- 24 Feb, 2026
नोएडा में बार-बार सामने आ रही गंभीर घटनाओं को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दाखिल जनहित याचिका पर सख्त रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने राज्य सरकार और संबंधित एजेंसियों से विस्तृत जवाब तलब किया है। अदालत ने साफ कहा है कि अगली सुनवाई तक यह बताया जाए कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए हैं। मामले की अगली तारीख 17 मार्च 2026 तय की गई है। सुनवाई के दौरान नोएडा प्राधिकरण और राज्य सरकार की ओर से समय मांगा गया, ताकि काउंटर एफिडेविट दाखिल किया जा सके। अदालत ने स्पष्ट संकेत दिए कि जवाब सिर्फ औपचारिक न होकर ठोस कार्रवाई के साथ होना चाहिए।
जनहित याचिका में उठाए गए गंभीर सवाल
यह पीआईएल याचिकाकर्ता हिमांशु जायसवाल की ओर से दाखिल की गई है। याचिका में नोएडा क्षेत्र में लगातार सामने आ रही घटनाओं को लेकर सार्वजनिक सुरक्षा, भवनों की संरचनात्मक स्थिति और आपदा प्रबंधन व्यवस्था पर सवाल उठाए गए हैं। अदालत में बताया गया कि कई मामलों में प्रशासनिक लापरवाही और समन्वय की कमी सामने आई है। इसी को देखते हुए याचिका में उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग, जिला प्रशासन, पुलिस आयुक्त, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ को भी पक्षकार बनाया गया है। अदालत के निर्देश के बाद अब इन एजेंसियों के बीच समन्वय और जवाबदेही को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कोर्ट ने कहा है कि अगली सुनवाई तक प्रस्तावित सुधारात्मक कदमों का पूरा ब्योरा पेश किया जाए।
सेक्टर-150 हादसे के बाद दायर हुई याचिका
बताया जा रहा है कि यह याचिका 16 जनवरी को नोएडा के सेक्टर-150 में युवराज की मौत के बाद दायर की गई थी। युवराज की बेसमेंट में भरे पानी में डूबने से जान चली गई थी। इस घटना के बाद नोएडा प्राधिकरण, जिला प्रशासन, अग्निशमन विभाग और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एसआईटी का गठन किया था। पांच दिनों की जांच और 150 से अधिक लोगों के बयान के आधार पर रिपोर्ट शासन को सौंप दी गई है। हालांकि अब तक प्राधिकरण के तत्कालीन सीईओ लोकेश एम और एक जेई को हटाने के अलावा कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई है, जिसे लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। अब सबकी नजर 17 मार्च की सुनवाई पर है, जहां अदालत यह देखेगी कि सरकार और संबंधित एजेंसियां सुधार के लिए क्या ठोस कदम उठा रही हैं।
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