टीईटी अनिवार्य किए जाने का नोएडा में विरोध, शिक्षकों ने काली पट्टी बांधकर बच्चों को पढ़ाया, कहा- टीचर्स पर अनुचित दबाव

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जेवर में शिक्षकों ने टीईटी अनिवार्यता के विरोध में काली पट्टी बांधकर पढ़ाया। 26 फरवरी को सूरजपुर जिला मुख्यालय पर धरने का ऐलान किया गया है। शिक्षकों ने सरकार से वार्ता कर सेवा दे रहे अध्यापकों के लिए व्यावहारिक समाधान निकालने की मांग की है।

ग्रेटर नोएडा के जेवर क्षेत्र में जूनियर हाईस्कूल सहित अन्य विद्यालयों के शिक्षकों ने काली पट्टी बांधकर शिक्षण कार्य किया। यह विरोध सेवारत शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा अनिवार्य किए जाने के फैसले के खिलाफ था। प्रदर्शन का नेतृत्व जिलाध्यक्ष निरंजन नागर ने किया। शिक्षकों का कहना है कि वे वर्षों से पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ छात्रों को शिक्षा दे रहे हैं। ऐसे में लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों पर अचानक नई शर्त लागू करना उचित नहीं है। उनका आरोप है कि इस निर्णय से शिक्षकों में असंतोष बढ़ रहा है और मनोबल प्रभावित हो रहा है। हालांकि विरोध के बावजूद विद्यालयों में पठन-पाठन सामान्य रूप से चलता रहा।


शिक्षा प्रभावित किए बिना जताया विरोध

प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित करना नहीं है। उन्होंने शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात सरकार तक पहुंचाने की कोशिश की। शिक्षकों का कहना है कि शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के वे समर्थक हैं, लेकिन पहले से सेवा दे रहे अध्यापकों को अचानक परीक्षा की अनिवार्यता में शामिल करना व्यावहारिक नहीं है। उनका मानना है कि सरकार को इस फैसले पर पुनर्विचार कर सेवा अवधि और अनुभव को भी महत्व देना चाहिए। विरोध के दौरान सभी विद्यालयों में नियमित कक्षाएं संचालित हुईं, जिससे छात्रों की पढ़ाई पर कोई असर नहीं पड़ा।


26 फरवरी को सूरजपुर में धरना

जिलाध्यक्ष निरंजन नागर ने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा। इसी क्रम में 26 फरवरी को दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक जिला मुख्यालय सूरजपुर पर धरना-प्रदर्शन की घोषणा की गई है। इस दौरान मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा जाएगा। शिक्षकों ने सरकार से वार्ता कर व्यावहारिक समाधान निकालने की मांग की है। उनका कहना है कि संवाद के माध्यम से ही इस मुद्दे का हल संभव है, ताकि शिक्षा व्यवस्था और शिक्षकों दोनों के हित सुरक्षित रह सकें।

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