नोएडा के स्काईवॉक में टेक्निकल फॉल्ट, जल्द दूर की जाएगी दिक्कत, बीम हटाने से पहले की जाएगी फ्रेमिंग
- Shiv Kumar
- 28 Feb, 2026
नोएडा में ब्लू लाइन के सेक्टर-52 और एक्वा लाइन के सेक्टर-51 मेट्रो स्टेशन को जोड़ने वाला बहुप्रतीक्षित स्काईवॉक अब जल्द शुरू होने की उम्मीद है। लंबे समय से तकनीकी कारणों से अटका यह प्रोजेक्ट अब फिर रफ्तार पकड़ता दिख रहा है। सेक्टर-51 स्टेशन की एंट्री पर मौजूद एक अहम बीम को लेकर तकनीकी समस्या सामने आई थी। यही बीम पूरे प्लेटफॉर्म और स्टेशन के हिस्से का भार संभाले हुए है, इसलिए इसे हटाने या बदलने में विशेष सावधानी बरती जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए पहले स्ट्रक्चर की जांच कराई गई है। अब समाधान के तौर पर नई फ्रेमिंग लगाने की तैयारी की जा रही है, जिससे स्काईवॉक को सुरक्षित तरीके से शुरू किया जा सके।
बीम की जगह लगेगा मजबूत फ्रेम, एक महीने में काम पूरा होने की उम्मीद
प्राधिकरण के अधिकारियों के मुताबिक, संबंधित बीम को सीधे हटाने के बजाय उसकी जगह विशेष स्टील फ्रेम लगाया जाएगा। इस फ्रेम का निर्माण लगभग पूरा कर लिया गया है और इसे अगले एक महीने के भीतर स्थापित करने की योजना है। फ्रेम लगने के बाद स्ट्रक्चर दोबारा जांचा जाएगा, ताकि किसी तरह की तकनीकी या सेफ्टी समस्या न रहे। सेक्टर-52 की ओर भी एक बीम मौजूद है, लेकिन उसे हटाने के बजाय रैंप का रूप देने पर विचार किया जा रहा है। इससे यात्रियों को सुगम आवागमन मिलेगा और संरचना की मजबूती भी बनी रहेगी। अधिकारी मानते हैं कि यह समाधान लंबे समय तक सुरक्षित कनेक्टिविटी सुनिश्चित करेगा।
आईआईटी से ली जाएगी सेफ्टी रिपोर्ट, 40 करोड़ खर्च के बाद अब अंतिम चरण
प्रोजेक्ट में सुरक्षा मानकों को लेकर कोई समझौता न हो, इसके लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) से सेफ्टी रिपोर्ट लेने का फैसला किया गया है। रिपोर्ट मिलने के बाद ही मौजूदा बीम हटाने और फ्रेम लगाने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। यह स्काईवॉक जून 2023 में बनना शुरू हुआ था और इसे पांच महीने में पूरा किया जाना था, लेकिन तकनीकी अड़चनों के कारण काम अधूरा रह गया। अब तक करीब 40 करोड़ रुपये इस परियोजना पर खर्च किए जा चुके हैं। फिलहाल यात्री दोनों स्टेशनों के बीच सड़क मार्ग से आवाजाही कर रहे हैं, जिससे समय और जोखिम दोनों बढ़ जाते हैं। प्राधिकरण के जीएम एसपी सिंह ने बताया कि रिपोर्ट से लेकर निर्माण कार्य तक की प्रक्रिया में करीब एक महीने का समय लगेगा, जिसके बाद स्काईवॉक आम जनता के लिए खोला जा सकता है।
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