नोएडा का बजट हो सकता है 9000 करोड़, सिविल कंस्ट्रक्शन के लिए 2200 करोड़, मेंटीनेंस के लिए 2400 करोड़, रिव्यू बैठक में प्रस्ताव
- Shiv Kumar
- 02 Mar, 2026
नोएडा प्राधिकरण वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए करीब 9000 करोड़ रुपये का बजट तैयार कर रहा है। इस बार फोकस अधूरी परियोजनाओं को पूरा करने, नई योजनाओं को रफ्तार देने और न्यू नोएडा के भूमि अधिग्रहण पर रहेगा। सिविल कंस्ट्रक्शन यानी विभिन्न विकास परियोजनाओं के लिए लगभग 2200 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का अनुमान है, जबकि अनुरक्षण कार्यों पर करीब 2400 करोड़ रुपये खर्च हो सकते हैं। ग्रामीण विकास के लिए 250 करोड़ रुपये प्रस्तावित हैं। साथ ही न्यू नोएडा के लिए मुआवजा दर को भी बजट में शामिल किया जाएगा। सभी विभागों से विस्तृत बजट प्रस्ताव मांगे गए हैं, ताकि बोर्ड बैठक से पहले व्यापक समीक्षा की जा सके।
नई योजनाओं से बढ़ेगा राजस्व, न्यू नोएडा पर खास नजर
इस बार कमर्शियल, इंस्टीट्यूशनल और आईटी सेक्टर की नई स्कीम लॉन्च की गई हैं, जिससे प्राधिकरण को बड़े राजस्व की उम्मीद है। न्यू नोएडा में भूमि अधिग्रहण के लिए मुआवजा दर लगभग तय हो चुकी है और शासन से अंतिम मंजूरी मिलते ही प्रक्रिया शुरू की जाएगी। संभावना है कि बजट का बड़ा हिस्सा इसी मद में खर्च होगा। बोर्ड बैठक से पहले होने वाली समीक्षा में पिछले वित्तीय वर्ष के बजट, खर्च और प्राप्तियों पर चर्चा होगी। साथ ही अमिताभ कांत की कमेटी से जुड़े मामलों की प्रगति, रजिस्ट्री की स्थिति और बिल्डरों द्वारा 25 प्रतिशत बकाया जमा करने की जानकारी भी रखी जाएगी।
ग्रामीण विकास और सिविल कार्यों पर विशेष ध्यान
नोएडा के परिसीमन में आने वाले 81 गांवों के विकास के लिए इस बार करीब 250 करोड़ रुपये खर्च करने की तैयारी है। इसमें सड़क, नाली, पेयजल, पार्क और अन्य बुनियादी सुविधाओं का विकास शामिल रहेगा। पिछले वित्तीय वर्ष में यह बजट 224 करोड़ रुपये था। सिविल प्रोजेक्ट्स के लिए 2025-26 में लगभग 2400 करोड़ रुपये निर्धारित थे, जबकि 2024-25 में 1200 करोड़ रुपये आरक्षित किए गए थे। इस बार 2200 करोड़ रुपये के आसपास प्रावधान का अनुमान है, ताकि नई और रुकी परियोजनाओं को गति मिल सके। अनुरक्षण कार्यों के लिए भी समान राशि रखी जा सकती है, क्योंकि शहर में मेंटेनेंस का दायरा लगातार बढ़ रहा है।
जल विभाग और नीतिगत प्रस्तावों पर चर्चा
जल विभाग में इस बार राजस्व लक्ष्य की समीक्षा की जाएगी। 2023-24 में 120 करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले करीब 153 करोड़ रुपये की प्राप्ति हुई थी। वहीं 2024-25 में 150 करोड़ रुपये का लक्ष्य तय किया गया था। इस बार लक्ष्य को संतुलित तरीके से बढ़ाने पर विचार हो रहा है। इसके अलावा यूनिफाइड पॉलिसी, भूखंड आवंटन, निरस्तीकरण, लीज डीड, कब्जा और अतिक्रमण मुक्त भूमि से संभावित राजस्व पर भी चर्चा होगी। किसानों को भूमि अधिग्रहण के लिए दी जाने वाली मुआवजा दर तय करने का प्रस्ताव भी एजेंडे में शामिल किया जा सकता है।
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