नोएडा में अब तय जगहों पर डॉग फीडिंग की व्यवस्था, 1200 स्थानों पर लगेंगे फीडिंग बोर्ड, AOA व RWA की भी जिम्मेदारी तय

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सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद नोएडा में 1200 डॉग फीडिंग पॉइंट विकसित किए जाएंगे। प्राधिकरण चरणबद्ध तरीके से बोर्ड लगाकर तय स्थानों पर ही फीडिंग सुनिश्चित करेगा। योजना पर करोड़ों रुपये खर्च होंगे और निगरानी की जिम्मेदारी एओए व आरडब्ल्यूए को दी जाएगी।

नोएडा में आवारा कुत्तों को लेकर चल रही बहस के बीच अब प्राधिकरण ने ठोस कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट के 22 अगस्त के आदेश के बाद शहरभर में डॉग फीडिंग पॉइंट चिन्हित कर वहां बोर्ड लगाने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। इसका उद्देश्य है कि कुत्तों को केवल निर्धारित स्थानों पर ही खाना खिलाया जाए, ताकि कॉलोनियों और सेक्टरों में होने वाले विवाद कम हों। अक्सर देखा गया है कि सड़कों या पार्किंग क्षेत्र में फीडिंग को लेकर निवासी और पशु प्रेमियों के बीच तकरार होती है। इसी समस्या के समाधान के लिए यह व्यवस्था लागू की जा रही है।


सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद चरणबद्ध अमल

Supreme Court of India ने अपने आदेश में देशभर की नगर निकायों को निर्देश दिया था कि सेक्टर या सोसाइटी के आसपास डॉग फीडिंग के लिए तय स्थान चिन्हित किए जाएं और सार्वजनिक सड़कों पर अनियंत्रित फीडिंग रोकी जाए। साथ ही स्पष्ट साइनबोर्ड लगाने के भी निर्देश दिए गए थे। अदालत ने कहा था कि बिना व्यवस्था के फीडिंग से लोगों को असुविधा, सुरक्षा और साफ-सफाई से जुड़ी समस्याएं बढ़ती हैं। अब Noida Authority ने इस आदेश को लागू करने के लिए चरणबद्ध तरीके से काम शुरू किया है। पहले चरण में कई सेक्टरों में बोर्ड लगाए जाएंगे। यह काम जनस्वास्थ्य विभाग के माध्यम से कराया जा रहा है और इस चरण में करीब 1.18 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। लक्ष्य 180 दिनों में कार्य पूरा करने का है।


1200 फीडिंग पॉइंट की योजना, एओए-आरडब्ल्यूए को जिम्मेदारी

सितंबर 2025 में प्राधिकरण ने लगभग 1200 तय फीडिंग पॉइंट विकसित करने की योजना बनाई थी, जिस पर करीब 2.5 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। पूरे शहर में सर्वे कर सुरक्षित और स्थायी स्थान चिन्हित किए गए हैं। जिन इलाकों में कुत्तों की संख्या अधिक है, वहां एओए और आरडब्ल्यूए से सलाह ली जा रही है। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि वह केवल स्थान चिन्हित कर बुनियादी ढांचा और बोर्ड लगाएगा, जबकि देखरेख और निगरानी की जिम्मेदारी संबंधित एओए और आरडब्ल्यूए की होगी। अधिकारियों का कहना है कि इससे कॉलोनियों में कुत्तों की भीड़ नियंत्रित होगी, झगड़े कम होंगे और साफ-सफाई की स्थिति बेहतर होगी।

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