नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को मिला सिक्योरिटी अप्रूवल, एजेंसियों ने जांच के बाद दी मंजूरी, NOC मिलने से अब फ्लाइट ऑपरेशन का रास्ता लगभग साफ

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नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को सुरक्षा मानकों पर खरा पाए जाने के बाद बीसीएएस से एनओसी मिल गई है। अब डीजीसीए की टीम निरीक्षण करेगी। एयरोड्रम लाइसेंस मिलने के बाद एयरपोर्ट से हवाई सेवाएं शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है।

उत्तर प्रदेश के नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। एयरपोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था को सभी मानकों के अनुरूप पाए जाने के बाद नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो (BCAS) ने सिक्योरिटी एनओसी जारी कर दी है। इसके साथ ही एयरपोर्ट को एयरोड्रम लाइसेंस मिलने का रास्ता लगभग साफ हो गया है। लाइसेंस मिलते ही यहां से हवाई सेवाएं शुरू की जा सकेंगी, जिसका लंबे समय से इंतजार किया जा रहा था। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड के अधिकारियों के मुताबिक सुरक्षा एजेंसियों ने एयरपोर्ट पर लगाए गए सभी उपकरणों और व्यवस्थाओं की विस्तृत जांच की। जांच के दौरान सुरक्षा मानकों को संतोषजनक पाया गया। इसके बाद गुरुवार देर शाम BCAS की ओर से सशर्त समग्र सुरक्षा व्यवस्था के तहत एनओसी जारी कर दी गई।


डीजीसीए की टीम जल्द करेगी निरीक्षण

अब अगला अहम कदम नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) की ओर से उठाया जाएगा। डीजीसीए की टीम जल्द ही एयरपोर्ट का निरीक्षण करेगी। निरीक्षण में रनवे, टर्मिनल, सुरक्षा व्यवस्था और अन्य तकनीकी मानकों की जांच की जाएगी। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड के नोडल अधिकारी शैलेंद्र भाटिया ने बताया कि इससे पहले नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो ने एयरपोर्ट के एंटी हाइजैक कंटीजेंसी प्लान को मंजूरी दी थी। उसी के आधार पर अब सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एनओसी जारी की गई है।


एंटी हाइजैक प्लान को माना जाता है सबसे अहम

किसी भी एयरपोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था में एंटी हाइजैक कंटीजेंसी प्लान बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यह योजना उस स्थिति में लागू होती है जब किसी विमान के हाईजैक होने या बम की सूचना जैसी आपात स्थिति सामने आती है। ऐसी परिस्थिति में एयरपोर्ट प्रशासन, विमानन कंपनियां, सुरक्षा एजेंसियां और सरकार मिलकर तुरंत कार्रवाई करती हैं। एयरपोर्ट पर लंबे समय से आधुनिक सुरक्षा उपकरणों को स्थापित करने और उनकी कार्यक्षमता की जांच की प्रक्रिया चल रही थी। जांच पूरी होने के बाद सभी व्यवस्थाएं तय मानकों के अनुरूप पाई गईं। अब डीजीसीए की अंतिम जांच और एयरोड्रम लाइसेंस मिलने के बाद यहां से हवाई उड़ानें शुरू होने का रास्ता साफ हो जाएगा।


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