नोएडा में अपने घर का इंतजार कर रहे लोगों के लिए खुशखबरी, 1500 से अधिक फ्लैट मालिकों को जल्द मिलेगा मालिकाना हक

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नोएडा सेक्टर-137 की पैरामाउंट फ्लोराविले सोसाइटी में 1521 फ्लैटों की रजिस्ट्री का रास्ता साफ हो गया है। बिल्डर ने नोएडा प्राधिकरण में 80.48 करोड़ रुपये का बकाया जमा कर दिया है, जिसके बाद सभी टावरों को कंपलीशन सर्टिफिकेट मिल गया है।

नोएडा के सेक्टर-137 स्थित पैरामाउंट फ्लोराविले सोसाइटी में रहने वाले सैकड़ों फ्लैट खरीदारों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। लंबे समय से अटकी हुई फ्लैटों की रजिस्ट्री का रास्ता अब साफ हो गया है। बिल्डर ने नोएडा प्राधिकरण में बकाया के रूप में करीब 80 करोड़ 48 लाख रुपये जमा कर दिए हैं। इसके बाद प्राधिकरण ने सोसाइटी से जुड़े बाकी काम भी आगे बढ़ा दिए हैं। बताया जा रहा है कि यह परियोजना करीब 12.375 एकड़ जमीन पर विकसित की गई है, जिसमें कुल 16 टावर बनाए

गए हैं। इन टावरों में कुल 1521 फ्लैट हैं, जिनकी रजिस्ट्री लंबे समय से अटकी हुई थी। अब बकाया राशि जमा होने के बाद फ्लैट मालिकों को जल्द ही अपने घरों की रजिस्ट्री कराने का मौका मिलेगा, जिससे खरीदारों को बड़ी राहत मिली है।


बकाया जमा होने के बाद खत्म हुआ विवाद

जानकारी के मुताबिक इस परियोजना के 14 टावरों को 10 मार्च 2015 को ही कंपलीशन सर्टिफिकेट मिल गया था, लेकिन बिल्डर द्वारा प्राधिकरण का बकाया जमा नहीं करने की वजह से फ्लैटों की रजिस्ट्री की प्रक्रिया शुरू नहीं हो पा रही थी। इससे हजारों खरीदार परेशान थे। अब बिल्डर द्वारा करीब 80 करोड़ 48 लाख रुपये जमा करने के बाद यह विवाद खत्म हो गया है। बकाया राशि मिलने के बाद नोएडा प्राधिकरण ने बाकी दो टावरों का भी कंपलीशन सर्टिफिकेट जारी कर दिया है। इसके साथ ही अब पूरी परियोजना के सभी टावरों को आधिकारिक मंजूरी मिल चुकी है और रजिस्ट्री की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है। लंबे समय से इस मुद्दे को लेकर खरीदार लगातार आवाज उठा रहे थे।


अमिताभ कांत समिति की सिफारिशों के तहत जमा हुआ पैसा

नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार बिल्डर ने यह बकाया रकम अमिताभ कांत समिति की सिफारिशों के तहत लागू किए गए पैकेज के अंतर्गत जमा की है। दिलचस्प बात यह है कि पैरामाउंट फ्लोराविले परियोजना फिलहाल यूपी रेरा के दायरे में नहीं आती। हालांकि प्राधिकरण के साथ बकाया को लेकर चल रहा विवाद पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट तक भी पहुंच चुका है और वह मामला अभी विचाराधीन है। इसके बावजूद बिल्डर प्रबंधन का कहना है कि फ्लैट खरीदारों के हित को ध्यान में रखते हुए कंपनी ने यह राशि ‘अंडर प्रोटेस्ट’ जमा की है ताकि रजिस्ट्री की प्रक्रिया शुरू हो सके। अब जब बकाया जमा हो चुका है, तो खरीदारों को अपने आशियाने का कानूनी हक मिलने का रास्ता साफ हो गया है और रजिस्ट्री की प्रक्रिया भी नियमित रूप से शुरू हो चुकी है।

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