नोएडा में LPG सिलेंडर की भारी किल्लत, एजेंसियों में लग रही लंबी लाइनें, बंद होने की कगार पर रेस्टोरेंट, सरकार से कालाबाजारी रोकने की मांग

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ग्रेटर नोएडा में गैस सिलेंडर की कमी से रेस्टोरेंट और स्ट्रीट फूड कारोबारियों को भारी परेशानी हो रही है। दुकानदारों का कहना है कि सिलेंडर या तो मिल नहीं रहे हैं या दोगुनी कीमत पर बिक रहे हैं, जिससे उनका कारोबार संकट में पड़ गया है।

ग्रेटर नोएडा में गैस सिलेंडर की कमी के कारण रेस्टोरेंट और स्ट्रीट फूड संचालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कारोबारियों का कहना है कि सिलेंडर या तो बाजार में मिल नहीं रहे हैं, और अगर मिल भी रहे हैं तो उनकी कीमत दोगुनी हो चुकी है। ऐसे में छोटे कारोबारियों के लिए अपना व्यवसाय चलाना मुश्किल हो गया है।की टीम ने ग्रेटर नोएडा के जगत फॉर्म मार्केट में रेस्टोरेंट और स्ट्रीट फूड संचालकों से बातचीत की। यहां कई दुकानदारों ने बताया कि सिलेंडर की कमी के कारण उनका काम प्रभावित हो रहा है और अगर जल्द समस्या का समाधान नहीं हुआ तो उन्हें दुकानें बंद करनी पड़ सकती हैं।


रेस्टोरेंट बंद होने की कगार पर

जगत फॉर्म मार्केट स्थित ओम रेस्टोरेंट के मालिक विशाल भाटी ने बताया कि उनके रेस्टोरेंट पर सिलेंडर की कमी का सीधा असर पड़ा है। उन्होंने कहा कि जरूरत के अनुसार गैस सिलेंडर नहीं मिल पा रहे हैं और जो सिलेंडर उपलब्ध हो रहे हैं, उनकी कीमत बहुत अधिक है। विशाल भाटी के मुताबिक सिलेंडर के दाम लगभग दोगुने हो गए हैं, जिसके कारण उन्हें अपने मेन्यू के कई आइटम की कीमतें भी बढ़ानी पड़ी हैं। उन्होंने कहा कि अगर एक-दो दिन में सिलेंडर की सप्लाई सामान्य नहीं हुई तो उन्हें रेस्टोरेंट बंद करना पड़ सकता है। उनके यहां करीब 12 से 15 कारीगर काम करते हैं, जिनकी रोजी-रोटी भी इस काम पर निर्भर है।


स्ट्रीट फूड कारोबारियों की भी बढ़ी चिंता

पाव भाजी, बिरयानी और डोसा बेचने वाले सौरभ ने भी बताया कि उन्हें रोजाना सिलेंडर की जरूरत पड़ती है, लेकिन बाजार में इसकी भारी कमी है। उन्होंने कहा कि जो सिलेंडर पहले करीब 1500 रुपये में मिल जाता था, वही अब करीब 3000 रुपये में मिल रहा है। टिक्की विक्रेता चंद्रभान ने भी चिंता जताते हुए कहा कि गैस सिलेंडर से ही उनका काम चलता है। उन्होंने बताया कि सिलेंडर मिलना मुश्किल हो गया है और अगर मिल भी रहा है तो बहुत महंगा है। चंद्रभान के अनुसार अगर यही स्थिति रही तो उन्हें अपना काम बंद करके गांव लौटना पड़ सकता है।

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