नोएडा में 12 साल बाद प्रोजेक्ट इंजीनियर की हो सकती है बहाली, यादव सिंह केबलिंग घोटाले से जुड़ा है मामला, हाईकोर्ट के आदेश पर दिया सबमिशन

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नोएडा के 954 करोड़ अंडरग्राउंड केबलिंग घोटाले में सस्पेंड प्रोजेक्ट इंजीनियर की बहाली पर प्रक्रिया शुरू हो गई है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद सब्मिशन दिया गया है और प्राधिकरण अब रिपोर्ट शासन को भेजकर अंतिम निर्णय का इंतजार कर रहा है।

नोएडा प्राधिकरण में 12 साल पहले सामने आए 954 करोड़ रुपये के अंडरग्राउंड केबलिंग घोटाले मामले में बड़ा अपडेट सामने आया है। इस मामले में सस्पेंड चल रहे प्रोजेक्ट इंजीनियर रामेंद्र सिंह की बहाली की संभावना बनती नजर आ रही है। दरअसल, हाईकोर्ट के आदेश के बाद रामेंद्र सिंह ने प्राधिकरण में अपना सब्मिशन दाखिल कर दिया है। चूंकि उनका सस्पेंशन शासन स्तर से हुआ था, इसलिए अब नोएडा प्राधिकरण इस सब्मिशन के साथ अपनी रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजेगा, जिसके बाद आगे का निर्णय लिया जाएगा। इस पूरे मामले पर एक बार फिर प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।


तीन अधिकारियों पर विभागीय जांच, जल्द होंगे सवाल-जवाब

इस घोटाले से जुड़े नोएडा प्राधिकरण के तीन अधिकारियों—आरपी सिंह, निजामुद्दीन और प्रमोद—के खिलाफ विभागीय जांच शुरू हो चुकी है। बताया जा रहा है कि ओएसडी स्तर के अधिकारी इस पूरे मामले की जांच कर रहे हैं और जल्द ही इन अधिकारियों से ग्राउंड स्तर पर पूछताछ की जाएगी। जांच पूरी होने के बाद इसकी रिपोर्ट भी शासन को भेजी जाएगी। अधिकारियों की भूमिका और जिम्मेदारी को लेकर कई अहम बिंदुओं पर जांच केंद्रित है, जिससे इस पुराने मामले में नए खुलासों की संभावना भी जताई जा रही है।


2020 में जारी हुई थी चार्जशीट, कई अधिकारी आए थे घेरे में

गौरतलब है कि वर्ष 2020 में अंडरग्राउंड केबलिंग प्रकरण में कथित तौर पर चहेती कंपनियों को टेंडर देने और लाभ पहुंचाने के आरोप में यादव सिंह समेत 20 अन्य अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट जारी की गई थी। उसी चार्जशीट में प्रोजेक्ट इंजीनियर रामेंद्र सिंह का नाम भी शामिल था। उस समय वह प्राधिकरण के इलेक्ट्रिकल मेंटेनेंस-2 डिवीजन में तैनात थे। जांच में नाम आने के बाद शासन ने उन्हें सस्पेंड कर दिया था, जिसके खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।


शासन को भेजी जाएगी रिपोर्ट, बहाली पर अंतिम फैसला बाकी

प्राधिकरण की एसीईओ वंदना त्रिपाठी ने बताया कि प्रोजेक्ट इंजीनियर की ओर से सब्मिशन प्राप्त हो चुका है और इसे शासन को रिपोर्ट के साथ भेजा जाएगा। अब अंतिम फैसला शासन स्तर पर लिया जाएगा कि बहाली की जाए या नहीं। इस मामले ने एक बार फिर नोएडा प्राधिकरण की कार्यप्रणाली और पुराने घोटालों की जांच प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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