किसानों की आवाज दबाना बर्दास्त नहीं, उन्हें नजरबंद करने के मामले की जांच हो, बोले- भारतीय किसान यूनियन क्रांति के नेता
- Shiv Kumar
- 28 Mar, 2026
गौतम बुद्ध नगर में आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दौरे के बीच एक नया विवाद खड़ा हो गया है। जहां एक तरफ नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के उद्घाटन को लेकर बड़े आयोजन की तैयारी है, वहीं दूसरी तरफ किसान नेताओं को नजरबंद किए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। भारतीय किसान यूनियन (क्रांति) ने इस कार्रवाई पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे लोकतंत्र के खिलाफ बताया है। संगठन का कहना है कि विकास के नाम पर किसानों की आवाज दबाना गलत है।
किसान नेताओं की नजरबंदी पर उठे सवाल
भारतीय किसान यूनियन (क्रांति) के प्रदेश अध्यक्ष परविंदर सिंह यादव ने प्रेस नोट जारी कर प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम के दौरान किसान नेताओं को उनके ही घरों में नजरबंद करना बेहद चिंताजनक है। उनका कहना है कि अगर किसान अपने क्षेत्र की समस्याओं को लेकर प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री से मिलना चाहते हैं, तो यह उनका अधिकार है। ऐसे में उन्हें रोकना और नजरबंद करना पूरी तरह से अनुचित है। उन्होंने इसे प्रशासन की असंवेदनशीलता बताते हुए कहा कि इस तरह की कार्रवाई लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और इससे किसानों में नाराजगी बढ़ेगी।
प्रशासन से जवाब की मांग, जांच की उठी मांग
संगठन ने गौतम बुद्ध नगर कमिश्नरेट से इस कार्रवाई को लेकर जवाब मांगा है। उनका सवाल है कि आखिर किसके आदेश पर किसान नेताओं को नजरबंद किया गया। उन्होंने कहा कि क्या सरकार यह समझती है कि इस तरह के कदम से किसानों की आवाज दबाई जा सकती है? संगठन का कहना है कि ऐसा सोचना पूरी तरह गलत है और किसान अपने हक के लिए हमेशा आवाज उठाते रहेंगे। भारतीय किसान यूनियन (क्रांति) ने इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों, इसके लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश बनाए जाएं।
विकास बनाम किसानों की आवाज का मुद्दा
किसान यूनियन ने यह भी कहा कि एक ओर सरकार विकास के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर किसानों के प्रतिनिधियों को ही कार्यक्रम से दूर रखा जा रहा है। उनका मानना है कि किसान देश की रीढ़ हैं और उनकी आवाज को दबाने की कोई भी कोशिश लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। संगठन ने स्पष्ट किया कि यह चेतावनी नहीं, बल्कि एक संदेश है कि किसानों की अनदेखी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस पूरे मामले ने एयरपोर्ट उद्घाटन जैसे बड़े आयोजन के बीच एक नया राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा खड़ा कर दिया है, जिस पर आने वाले समय में और बहस हो सकती है।
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