नोएडा की बेटी करिश्मा चौहान ने रचा इतिहास, UPPCS में हासिल की 17वीं रैंक, रिजल्ट देख छलक पड़े परिवार के आंसू

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नोएडा की करिश्मा चौहान ने यूपीपीसीएस परीक्षा में 17वीं रैंक हासिल कर बड़ी सफलता पाई। कई साल की मेहनत, असफलताओं और परिवार के सहयोग के बाद उन्होंने यह मुकाम हासिल किया और अब समाज सेवा के लिए काम करने का लक्ष्य रखा है।

नोएडा की बेटी करिश्मा चौहान ने अपनी मेहनत और लगन से बड़ा मुकाम हासिल करते हुए यूपीपीसीएस परीक्षा में 17वीं रैंक हासिल की है। इस उपलब्धि के बाद परिवार में खुशी का माहौल है और बधाइयों का तांता लगा हुआ है। करिश्मा की सफलता उन युवाओं के लिए प्रेरणा बनकर सामने आई है, जो लगातार असफलताओं के बावजूद अपने लक्ष्य से नहीं भटकते। बताया जा रहा है कि करिश्मा पिछले कई सालों से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही थीं और आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई।


लगातार मेहनत और असफलताओं के बाद मिली सफलता
करिश्मा चौहान ने बताया कि उन्होंने करीब 5-6 साल तक लगातार तैयारी की। शुरुआत में वह यूपीएससी की तैयारी कर रही थीं और मेन्स तक पहुंचीं, लेकिन बाद में उन्होंने रणनीति बदलते हुए यूपीपीसीएस पर फोकस किया। पहले प्रयास में सफलता नहीं मिली, यहां तक कि प्रीलिम्स भी क्लियर नहीं हुआ। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और दूसरे प्रयास में 17वीं रैंक हासिल कर ली। करिश्मा का कहना है कि असफलता हर किसी को डगमगाती है, लेकिन सही सपोर्ट सिस्टम और खुद पर भरोसा हो तो सफलता जरूर मिलती है।


परिवार का साथ बना सबसे बड़ी ताकत
करिश्मा की इस सफलता के पीछे उनके परिवार का बड़ा योगदान रहा। उनके पिता ने बताया कि समाज के कई लोग बेटियों की पढ़ाई पर सवाल उठाते थे और शादी की सलाह देते थे, लेकिन उन्होंने हमेशा अपनी बेटी पर भरोसा रखा। वहीं उनकी मां ने घर की जिम्मेदारियां संभालते हुए करिश्मा को पढ़ाई के लिए पूरा समय दिया। करिश्मा भी कभी-कभी घर के काम में हाथ बंटाती थीं, लेकिन उनका मुख्य फोकस पढ़ाई पर ही रहा। रिजल्ट आने के समय का पल परिवार के लिए बेहद भावुक रहा, जब करिश्मा ने खुशी में शोर मचाया और सभी की आंखों में आंसू आ गए।


समाज के लिए काम करने का है सपना
सफलता हासिल करने के बाद करिश्मा ने अपने भविष्य के लक्ष्य भी साफ किए हैं। उनका कहना है कि वह महिला शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और जन शिकायत निवारण जैसे मुद्दों पर काम करना चाहती हैं। उनका मानना है कि प्रशासनिक सेवा में जाकर वह समाज के लिए बेहतर बदलाव ला सकती हैं। करिश्मा की यह उपलब्धि न सिर्फ उनके परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गर्व की बात है।

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