ग्रेटर नोएडा के दी विजडम ट्री स्कूल पर बेनामी संपत्ति का साया, 125 करोड़ की इमारत पर लटकी कुर्की की तलवार, 700 बच्चों के भविष्य पर चिंता

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ग्रेटर नोएडा के विजडम ट्री स्कूल की 125 करोड़ की इमारत को बेनामी घोषित किया गया है। जांच के बीच 700 छात्रों के भविष्य को लेकर अभिभावकों में चिंता बढ़ गई है।

ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा वेस्ट स्थित ‘द विजडम ट्री स्कूल’ इन दिनों बड़े वित्तीय विवाद में घिर गया है। आयकर विभाग की बेनामी संपत्ति शाखा ने स्कूल की करीब 125 करोड़ रुपये की इमारत को बेनामी संपत्ति घोषित कर दिया है। हालांकि फिलहाल स्कूल में पढ़ाई सामान्य रूप से जारी है, लेकिन इस कार्रवाई के बाद अभिभावकों और छात्रों के बीच असमंजस और चिंता का माहौल बन गया है। करीब 700 बच्चों की पढ़ाई पर संभावित असर को लेकर परिजन परेशान हैं और भविष्य को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं।


गुमनाम शिकायत से शुरू हुई जांच, 6 महीने तक चली पड़ताल
पूरे मामले की शुरुआत एक गुमनाम शिकायत से हुई, जिसमें आरोप लगाया गया था कि स्कूल के निर्माण में काले धन का इस्तेमाल किया गया है। आयकर विभाग ने इस सूचना को गंभीरता से लेते हुए विस्तृत जांच शुरू की, जो करीब छह महीने तक चली। इस दौरान विभाग ने दस्तावेजों, बैंक ट्रांजैक्शन और संबंधित लोगों के बयानों की गहन जांच की। जांच आगे बढ़ने के साथ कई ऐसे तथ्य सामने आए, जिन्होंने इस पूरे प्रोजेक्ट की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए। सूत्रों के अनुसार, 27 मार्च को विभाग ने आधिकारिक नोटिस जारी कर इमारत को बेनामी संपत्ति घोषित कर दिया।


तीन फर्जी कंपनियों के जरिए निवेश का आरोप
जांच में सामने आया कि स्कूल प्रोजेक्ट में सीधे निवेश के बजाय तीन कथित फर्जी कंपनियों के माध्यम से धन लगाया गया। आरोप है कि विभिन्न कारोबारियों से नकद रकम लेकर उसे इन कंपनियों के जरिए लोन या निवेश के रूप में दिखाया गया, ताकि काले धन को वैध बनाया जा सके। कई निवेशकों ने भी कथित तौर पर नकद निवेश की बात स्वीकार की है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, यह पूरा नेटवर्क सुनियोजित तरीके से तैयार किया गया था।


बिल्डर और फाउंडेशन की भूमिका पर सवाल
मामले में सतनाम बिल्डर और ‘द विजडम ट्री स्कूल फाउंडेशन’ की भूमिका भी जांच के केंद्र में है। आरोप है कि बिल्डर ने अपने परिवार और सहयोगियों के साथ मिलकर फाउंडेशन बनाई और उसी के जरिए स्कूल का संचालन और निवेश दर्शाया गया। बिल्डर का खुद कंपनी में निदेशक होना हितों के टकराव की ओर इशारा करता है। अब आयकर विभाग इस बिल्डर के अन्य प्रोजेक्ट्स की भी जांच कर रहा है।


अभिभावकों में बढ़ी चिंता, भविष्य को लेकर संशय
करीब 15 हजार वर्ग मीटर में फैले इस चार मंजिला स्कूल परिसर की कीमत 125 करोड़ रुपये आंकी गई है। इतने बड़े मामले के सामने आने के बाद अभिभावकों की चिंता लगातार बढ़ रही है। कई अभिभावक अपने बच्चों का ट्रांसफर सर्टिफिकेट (TC) लेने के लिए स्कूल पहुंच रहे हैं। उनका कहना है कि अगर भविष्य में कुर्की की कार्रवाई होती है, तो बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है।


प्रशासन का आश्वासन, पढ़ाई नहीं होगी प्रभावित
जिला विद्यालय निरीक्षक राजेश कुमार सिंह ने कहा कि फिलहाल स्कूल में पढ़ाई सुचारू रूप से चल रही है। यदि भविष्य में कोई कार्रवाई होती है, तो बच्चों को अन्य स्कूलों में शिफ्ट कराया जाएगा, ताकि उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो। वहीं, स्कूल प्रबंधन ने इस पूरे मामले पर चुप्पी साध रखी है, जिससे स्थिति को लेकर और भी अनिश्चितता बढ़ गई है।

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