नगाड़ा प्रतियोगिता में भराना टीम ने मारी बाजी, गिरधरपुर में आयोजित पारंपरिक होली गायन कार्यक्रम में हुआ आयोजन
- Shiv Kumar
- 06 Apr, 2026
ग्रेटर नोएडा क्षेत्र के गिरधरपुर गांव में रविवार को पारंपरिक होली गायन और नगाड़ा प्रतियोगिता का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में आसपास के कई गांवों की टीमों ने हिस्सा लिया, जिससे पूरे क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल बन गया। ग्रामीणों की बड़ी संख्या में मौजूदगी ने कार्यक्रम को खास बना दिया। प्रतियोगिता के दौरान प्रतिभागियों ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह लिया और पारंपरिक संस्कृति की झलक पेश की। होली के गीतों और नगाड़ों की गूंज से पूरा वातावरण जीवंत नजर आया। इस तरह के आयोजनों से गांवों में सामाजिक एकता भी मजबूत होती है और नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जुड़ने का अवसर मिलता है।
पूर्व मंत्री वेदराम भाटी ने किया शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ वेदराम भाटी ने किया। उन्होंने प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन हमारी सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि आज के समय में जब आधुनिकता तेजी से बढ़ रही है, तब इस तरह के कार्यक्रम हमारी परंपराओं को बचाए रखने का माध्यम बनते हैं। उन्होंने सभी टीमों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि प्रतियोगिता में जीत-हार से ज्यादा महत्वपूर्ण भागीदारी होती है। इस दौरान उन्होंने आयोजकों की भी सराहना की और कहा कि ऐसे प्रयास समाज को जोड़ने का काम करते हैं।
भराना गांव की टीम रही अव्वल, कड़ा मुकाबला देखने को मिला
नगाड़ा प्रतियोगिता में विभिन्न गांवों की टीमों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला। सभी प्रतिभागियों ने अपनी-अपनी कला का बेहतरीन प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता के परिणामों में भराना गांव की टीम ने पहला स्थान हासिल किया। वहीं डेरा फतेहपुर की टीम दूसरे स्थान पर रही और जुनेदपुर की टीम ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। प्रतिभागियों के जोश और उत्साह ने पूरे आयोजन को यादगार बना दिया। निर्णायकों ने प्रदर्शन के आधार पर विजेताओं का चयन किया, जिसे सभी ने सराहा।
विजेता टीमों को किया गया सम्मानित, ग्रामीणों में उत्साह
कार्यक्रम के अंत में विजेता टीमों को सम्मानित किया गया और उन्हें पुरस्कार प्रदान किए गए। इस मौके पर बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे और सभी ने आयोजन की सराहना की। लोगों ने कहा कि इस तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रम गांवों की पहचान होते हैं और इन्हें आगे भी जारी रखा जाना चाहिए। आयोजन ने एक बार फिर यह साबित किया कि ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी परंपराएं पूरी जीवंतता के साथ निभाई जा रही हैं।
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