न्यू नोएडा के लिए जमीन अधिग्रहण शुरू, मुआवजे के लिए 800 करोड़ रिजर्व, 80 गांवों की जमीन पर बसेगा नया शहर

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न्यू नोएडा परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण शुरू होने जा रहा है। 80 गांवों की जमीन ली जाएगी और किसानों को मुआवजा दिया जाएगा। चार चरणों में शहर विकसित होगा, जिससे क्षेत्र में बड़े स्तर पर विकास और रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

ग्रेटर नोएडा। न्यू नोएडा (डीएनजीआईआर) को बसाने की दिशा में अब बड़ा कदम उठाया गया है। प्राधिकरण ने जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी कर ली है। इसके लिए मुआवजा दर तय कर फाइल को आगे बढ़ा दिया गया है, जो यमुना विकास प्राधिकरण की तर्ज पर करीब 4300 रुपये प्रति वर्गमीटर रहने की संभावना है। इस परियोजना के लिए करीब 800 करोड़ रुपये का बजट भी रिजर्व रखा गया है। अधिकारियों का कहना है कि स्टाफ की नियुक्ति के साथ ही गांववार अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। इससे हजारों किसानों और क्षेत्र के विकास पर सीधा असर पड़ेगा और नया शहर बसाने की योजना को गति मिलेगी।


चार चरणों में विकसित होगा न्यू नोएडा, बड़ा मास्टर प्लान तैयार
प्राधिकरण के मुताबिक न्यू नोएडा को करीब 209.11 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में विकसित किया जाएगा। इस विशाल परियोजना को चार चरणों में पूरा करने की योजना बनाई गई है। पहले चरण में 2023 से 2027 तक 3165 हेक्टेयर जमीन विकसित की जाएगी। इसके बाद 2027 से 2032 तक 3798 हेक्टेयर, 2032 से 2037 तक 5908 हेक्टेयर और अंतिम चरण में 2037 से 2041 तक 8230 हेक्टेयर जमीन पर विकास कार्य किए जाएंगे। इस मास्टर प्लान को पहले ही अधिसूचना के जरिए मंजूरी मिल चुकी है। लखनऊ में प्राधिकरण ने इसका प्रेजेंटेशन भी दिया है, जिसमें हाइब्रिड मॉडल के जरिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया समझाई गई है। इस मॉडल के तहत विकास को तेज और व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने की तैयारी है।


80 गांव होंगे प्रभावित, किसानों से सीधे संवाद की तैयारी
इस परियोजना के तहत करीब 80 गांवों की जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा। किसानों को मुआवजा देने के साथ-साथ उनसे एग्रीमेंट टू सेल भी किया जा सकता है। प्राधिकरण की योजना है कि गांवों में कैंप लगाकर किसानों को अधिग्रहण की पूरी प्रक्रिया और फायदे समझाए जाएं। अधिकारियों का कहना है कि यहां आने वाली इंडस्ट्री और इंफ्रास्ट्रक्चर से रोजगार और विकास के नए अवसर पैदा होंगे। इसके अलावा किसानों की सहमति से प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की कोशिश की जा रही है, ताकि किसी तरह का विवाद न हो और परियोजना समय पर पूरी हो सके।

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