नोएडा स्पोर्ट्स सिटी में 70 फीसदी स्पोर्ट फैसिलिटी पूरी होने पर ही मिलेगा फ्लैट पजेशन, 9000 करोड़ बकाया, नक्शा अप्रूवल पर हटी रोक

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नोएडा स्पोर्ट्स सिटी प्रोजेक्ट्स में अब बिना 70 प्रतिशत खेल सुविधाएं विकसित किए फ्लैट पजेशन नहीं मिलेगा। प्राधिकरण ने नए नियम लागू कर दिए हैं। इससे होमबायर्स को राहत मिलेगी और रुके हुए प्रोजेक्ट्स को गति मिलने की उम्मीद है।

नोएडा के स्पोर्ट्स सिटी प्रोजेक्ट्स में लंबे समय से फंसे होमबायर्स के लिए राहत भरी खबर आई है, लेकिन इसके साथ ही प्राधिकरण ने बिल्डरों पर सख्ती भी बढ़ा दी है। संशोधित लेआउट प्लान को मंजूरी देते हुए साफ कर दिया गया है कि अब बिना खेल सुविधाएं विकसित किए फ्लैट का पजेशन नहीं दिया जा सकेगा। इस फैसले से जहां एक ओर खरीदारों को उम्मीद मिली है, वहीं बिल्डरों को तय नियमों का पालन करना अनिवार्य हो गया है। लंबे समय से अटके प्रोजेक्ट्स को अब नई दिशा मिलने की संभावना जताई जा रही है।


70% स्पोर्ट्स एरिया अनिवार्य, तभी मिलेगा ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट

नए नियमों के तहत बिल्डरों को पहले कुल निर्धारित क्षेत्र के 70 प्रतिशत हिस्से में स्पोर्ट्स सुविधाएं विकसित करनी होंगी। इसके बाद ही उन्हें रेजिडेंशियल टावरों के लिए ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट मिलेगा और फ्लैट पजेशन संभव हो पाएगा। CREDAI Western UP के अध्यक्ष दिनेश गुप्ता के मुताबिक, रजिस्ट्री और मैप अप्रूवल पर लगी रोक हटने से हजारों खरीदारों को राहत मिलेगी। इससे न सिर्फ रुके हुए प्रोजेक्ट्स को गति मिलेगी, बल्कि रियल एस्टेट सेक्टर में नए निवेश की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। यह फैसला उन खरीदारों के लिए खास है, जो वर्षों से अपने घर का इंतजार कर रहे थे।


बकाया वसूली के लिए सख्त नियम, प्राधिकरण के पास गिरवी रहेंगे फ्लोर

प्राधिकरण ने बकाया रकम की वसूली सुनिश्चित करने के लिए भी सख्त कदम उठाए हैं। नई व्यवस्था के तहत जिन प्रोजेक्ट्स के नक्शे पास होंगे, उनके फर्स्ट और सेकंड फ्लोर प्राधिकरण के पास गिरवी रहेंगे। यह हिस्सा अधिकतम 20 प्रतिशत तक हो सकता है। अगर बिल्डर तय समय पर भुगतान नहीं करते हैं, तो इन फ्लोर पर प्राधिकरण का मालिकाना हक हो जाएगा। इसके बाद प्राधिकरण इन फ्लोर को सीधे खरीदारों को बेच सकेगा। इस कदम का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि बिल्डर अपनी वित्तीय जिम्मेदारियों से पीछे न हटें और प्रोजेक्ट समय पर पूरे हों।


40 हजार फ्लैट और 9 हजार करोड़ दांव पर, अब प्रोजेक्ट्स को मिलेगी रफ्तार

स्पोर्ट्स सिटी योजना के तहत पांच परियोजनाओं में कुल 46 प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं, जिनमें करीब 40 हजार फ्लैट बनाए जाने हैं। इन प्रोजेक्ट्स पर बिल्डरों का लगभग 9 हजार करोड़ रुपये बकाया है। यह योजना 2011-12 में शुरू हुई थी, जिसका मकसद बड़े स्तर पर खेल सुविधाएं विकसित करना था। हालांकि अब तक ज्यादातर बिल्डरों ने सिर्फ रिहायशी टावरों पर ध्यान दिया। अब नए नियम लागू होने के बाद उम्मीद है कि प्रोजेक्ट्स तेजी से पूरे होंगे और होमबायर्स को जल्द उनका घर मिल सकेगा।

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