93 की उम्र में थम गई सियासत की दमदार आवाज, मोहसिना किदवई के इंतकाल से राजनीतिक जगत में शोक की लहर

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कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और मेरठ से तीन बार सांसद रहीं मोहसिना किदवई का 93 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनके निधन से सियासी जगत में शोक की लहर है। उन्होंने कई केंद्रीय मंत्रालयों में अहम भूमिका निभाई और लंबे समय तक पार्टी को दिशा दी।

नोएडा। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और मेरठ से तीन बार लोकसभा सांसद रहीं Mohsina Kidwai का आज निधन हो गया। उन्होंने सुबह करीब 4 बजे अस्पताल में अंतिम सांस ली। 93 वर्षीय किदवई लंबे समय से बीमार चल रही थीं। उनके निधन की खबर मिलते ही राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई। कई बड़े नेताओं ने उनके योगदान को याद करते हुए श्रद्धांजलि दी है। उनका जनाजा आज दोपहर 3 बजे नोएडा सेक्टर-40 स्थित आवास से उठेगा, जबकि शाम 5 बजे दिल्ली के निजामुद्दीन कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।


राजनीति में लंबा सफर, कई अहम जिम्मेदारियां निभाईं

मोहसिना किदवई का जन्म 1 जनवरी 1932 को उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में हुआ था। उन्होंने कम उम्र में ही राजनीति में कदम रखा और धीरे-धीरे राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई। वह 1978 के उपचुनाव में पहली बार मेरठ से लोकसभा सांसद बनीं। इसके बाद 1980 और 1984 में भी उन्होंने जीत हासिल की। इसके अलावा उन्होंने राज्यसभा सदस्य के रूप में भी दो कार्यकाल पूरे किए। Indira Gandhi और Rajiv Gandhi की सरकारों में उन्होंने केंद्रीय मंत्री के रूप में स्वास्थ्य, शहरी विकास, पर्यटन और नागरिक उड्डयन जैसे अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली।


कांग्रेस में मजबूत पकड़, संगठन को दिया दिशा

कांग्रेस पार्टी में मोहसिना किदवई का कद काफी ऊंचा था। वह कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की सदस्य रहीं और अखिल भारतीय कांग्रेस समिति (AICC) की महासचिव के तौर पर भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई। संगठन को मजबूत करने और नए नेताओं को आगे बढ़ाने में उनका योगदान महत्वपूर्ण माना जाता है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता Manish Tewari ने उनके निधन पर दुख जताते हुए कहा कि किदवई का स्वभाव बेहद सौम्य और विनम्र था। उनका जाना पार्टी के लिए अपूरणीय क्षति है।


सादगी और समर्पण के लिए जानी जाती थीं

मोहसिना किदवई अपने सादगीपूर्ण जीवन और जनसेवा के लिए जानी जाती थीं। उन्होंने अपने राजनीतिक करियर में कई अहम जिम्मेदारियां निभाईं और देश की सेवा की। उनके योगदान को लंबे समय तक याद किया जाएगा। उनके निधन से न सिर्फ कांग्रेस पार्टी बल्कि पूरे राजनीतिक जगत को एक बड़ी क्षति हुई है।

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