ग्रेटर नोएडा में बनेगी मेट्रो यूनिवर्सिटी, योगी कैबिनेट से मिली मंजूरी, मंत्रिमंडल ने निजी क्षेत्र में स्थापना का प्रस्ताव किया पारित
- Shiv Kumar
- 08 Apr, 2026
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा फैसला लिया गया है। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath की अध्यक्षता में लखनऊ में हुई कैबिनेट बैठक में ग्रेटर नोएडा में निजी क्षेत्र के तहत ‘मेट्रो विश्वविद्यालय’ की स्थापना को मंजूरी दे दी गई है। इस फैसले को प्रदेश में शिक्षा के विस्तार और आधुनिक सुविधाओं वाले संस्थानों को बढ़ावा देने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। सरकार का मानना है कि इससे छात्रों को बेहतर विकल्प मिलेंगे और क्षेत्र में शैक्षणिक माहौल मजबूत होगा।
निजी विश्वविद्यालय अधिनियम के तहत मिली स्वीकृति
प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री Yogendra Upadhyay ने जानकारी देते हुए बताया कि यह निर्णय उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2019 के प्रावधानों के तहत लिया गया है। उन्होंने कहा कि इस अधिनियम का उद्देश्य निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना, संचालन और नियमन के लिए पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करना है, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता बनी रहे। सरकार का फोकस है कि निजी निवेश के साथ-साथ गुणवत्ता और जवाबदेही भी सुनिश्चित की जाए, ताकि छात्रों को बेहतर शिक्षा मिल सके।
26.1 एकड़ जमीन पर बनेगा नया विश्वविद्यालय
मंत्री ने बताया कि इस विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए सनहिल हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड, नोएडा ने प्रस्ताव दिया था। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से आवंटित 26.1 एकड़ जमीन पर यह विश्वविद्यालय विकसित किया जाएगा। प्रस्ताव का विधिक परीक्षण करने के बाद इसे मंजूरी दी गई है। इसके साथ ही ‘उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय (संशोधन) अध्यादेश, 2026’ लागू करने और संस्था को संचालन प्राधिकार-पत्र जारी करने का भी निर्णय लिया गया है।
शिक्षा के क्षेत्र में नए अवसरों की उम्मीद
मेट्रो विश्वविद्यालय के स्थापित होने से न सिर्फ ग्रेटर नोएडा बल्कि पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के छात्रों को लाभ मिलने की उम्मीद है। इससे उच्च शिक्षा के नए अवसर पैदा होंगे और रोजगार के भी मौके बढ़ सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के संस्थानों से क्षेत्र में शैक्षणिक और आर्थिक विकास को गति मिलेगी।
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