ग्रेटर नोएडा में 1 अप्रैल से पानी हुआ महंगा, 10% बढ़ा वाटर टैक्स, घर खर्च में बढ़ गया बोझ

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ग्रेटर नोएडा में 1 अप्रैल से पेयजल शुल्क में 10 प्रतिशत बढ़ोतरी लागू हो गई है, जिससे आवासीय और व्यावसायिक सभी उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा। प्राधिकरण इसे जरूरी बता रहा है, जबकि लोग महंगाई के बीच इस फैसले का विरोध कर रहे हैं।

ग्रेटर नोएडा के लोगों के लिए महंगाई के बीच एक और झटका देने वाली खबर सामने आई है। 1 अप्रैल से शहर में पेयजल शुल्क में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी लागू कर दी गई है, जिसका असर हर वर्ग के लोगों पर पड़ेगा। चाहे घर हो, दुकान हो या फैक्ट्री, सभी को अब पानी के लिए पहले से ज्यादा पैसे चुकाने होंगे। यह फैसला कोई नया नहीं है, बल्कि प्राधिकरण की पुरानी नीति के तहत हर साल किया जाता है। इसके बावजूद इस बार बढ़ती महंगाई के कारण लोगों में ज्यादा नाराजगी देखने को मिल रही है। शहर के कई परिवार पहले से ही बिजली, गैस और रोजमर्रा के खर्चों से जूझ रहे हैं, ऐसे में पानी का महंगा होना सीधे घरेलू बजट पर असर डाल रहा है। लोगों का कहना है कि जब सुविधाओं में खास सुधार नहीं दिखता, तो हर साल शुल्क बढ़ाना समझ से परे है।


भूखंड के आकार के आधार पर तय होता है पानी का शुल्क
ग्रेटर नोएडा में पानी का बिल भूखंड के आकार के आधार पर तय किया जाता है। यानी जितना बड़ा प्लॉट होगा, उतना ज्यादा शुल्क देना पड़ेगा। उदाहरण के तौर पर 60 वर्ग मीटर के भूखंड के लिए पिछले वित्तीय वर्ष में करीब 2,280 रुपये का शुल्क तय था, जो अब 10 प्रतिशत बढ़ोतरी के बाद और ज्यादा हो जाएगा। इसका मतलब है कि छोटे घरों से लेकर बड़े मकानों तक सभी पर असर पड़ेगा, लेकिन बड़े भूखंड और व्यावसायिक इकाइयों पर इसका बोझ ज्यादा देखने को मिलेगा। दुकानदारों, फैक्ट्री मालिकों और छोटे कारोबारियों के लिए यह बढ़ोतरी सीधी लागत बढ़ाने वाली है। इसका असर आगे चलकर आम लोगों तक भी पहुंच सकता है, क्योंकि व्यवसायी बढ़े हुए खर्च को अपनी सेवाओं और सामान की कीमतों में जोड़ सकते हैं।


हर साल बढ़ोतरी की पुरानी नीति, लेकिन लोगों में बढ़ रहा विरोध
पेयजल शुल्क में हर साल 10 प्रतिशत बढ़ोतरी का नियम वर्ष 2013 में हुई बोर्ड बैठक में तय किया गया था। उसी के तहत हर वित्तीय वर्ष में नई दरें लागू की जाती हैं। हालांकि इस नियम को लेकर अब लोगों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। कई आवासीय कल्याण संघों और सामाजिक संगठनों ने इस फैसले का विरोध किया है। लोगों का कहना है कि अगर हर साल शुल्क बढ़ाया जा रहा है, तो सुविधाओं में भी उसी अनुपात में सुधार दिखना चाहिए। कई इलाकों में पानी की सप्लाई, गुणवत्ता और दबाव को लेकर शिकायतें पहले से ही बनी हुई हैं। ऐसे में बढ़ी हुई दरें लोगों को और परेशान कर रही हैं।


प्राधिकरण का पक्ष, खर्च बढ़ने का दिया तर्क
वहीं प्राधिकरण के अधिकारियों का कहना है कि यह बढ़ोतरी पहले से तय नीति के अनुसार की गई है और इसे रोकना संभव नहीं है। उनका कहना है कि पानी की आपूर्ति, रखरखाव और ढांचे पर लगातार खर्च बढ़ रहा है, जिसे पूरा करने के लिए शुल्क बढ़ाना जरूरी है। अधिकारियों के अनुसार, शहर के विकास और बेहतर सुविधाएं देने के लिए यह कदम उठाया गया है। हालांकि आम लोगों का कहना है कि खर्च का बोझ केवल जनता पर डालना सही नहीं है और इसके लिए कोई संतुलित समाधान निकाला जाना चाहिए।


महंगाई के दौर में बढ़ता आर्थिक दबाव
आज के समय में जब हर जरूरी चीज महंगी हो रही है, ऐसे में पानी का महंगा होना लोगों के लिए बड़ी चिंता का कारण बन गया है। बिजली, गैस, राशन और अन्य खर्चों के साथ अब पानी का बिल भी बढ़ने से परिवारों का मासिक बजट बिगड़ सकता है। खासकर मध्यम वर्ग और छोटे कारोबारियों के लिए यह फैसला ज्यादा मुश्किल पैदा करने वाला है। लोगों को अब अपने खर्चों में कटौती करनी पड़ सकती है या अतिरिक्त आय के साधन तलाशने पड़ सकते हैं। कुल मिलाकर यह बढ़ोतरी शहर के हर वर्ग को प्रभावित करने वाली है और आने वाले समय में इसका असर और ज्यादा साफ नजर आएगा।

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