नोएडा में अलग डिप्टी रजिस्ट्रार की मांग क्यों हुई तेज? हाईराइज सोसायटीज में बढ़ते विवादों की पड़ताल
- Shiv Kumar
- 11 Apr, 2026
प्रदेश के शो विंडो शहर कहे जाने वाले नोएडा में आज लाखों लोग ग्रुप हाउसिंग और हाईराइज सोसायटियों में रहते हैं। जैसे-जैसे आबादी बढ़ रही है, वैसे-वैसे सोसायटियों के भीतर विवाद भी तेजी से सामने आ रहे हैं। खासकर एओए के गठन, चुनाव प्रक्रिया, मेंटेनेंस फीस और पैसों के लेन-देन को लेकर आए दिन नए झगड़े देखने को मिल रहे हैं। इन विवादों को सुलझाने के लिए यूपी अपार्टमेंट एक्ट-2010 में कई नियम बनाए गए हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही नजर आती है। गौतमबुद्ध नगर की 800 से ज्यादा सोसायटियों में शिकायतों का समय पर निपटारा नहीं हो पा रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह मानी जा रही है कि पूरे क्षेत्र के लिए सिर्फ एक ही डिप्टी रजिस्ट्रार तैनात है, जिससे काम का दबाव काफी ज्यादा बढ़ गया है और लोगों को समय पर राहत नहीं मिल पा रही है।
एक ही अधिकारी पर बढ़ा काम का दबाव
गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद जैसे तेजी से विकसित हो रहे जिलों के लिए सिर्फ एक डिप्टी रजिस्ट्रार की तैनाती होना बड़ी समस्या बनती जा रही है। दोनों जिलों में सैकड़ों सोसायटियां हैं, जहां हर दिन नई शिकायतें और विवाद सामने आते हैं। ऐसे में एक ही अधिकारी के पास सभी मामलों की सुनवाई और निपटारा करना मुश्किल हो जाता है। कई बार फाइलें महीनों तक लंबित रहती हैं, जिससे लोगों की परेशानी बढ़ती जाती है। अधिकारियों पर काम का बोझ इतना ज्यादा हो गया है कि समय पर सुनवाई संभव नहीं हो पाती। यही वजह है कि अब स्थानीय लोग और सोसायटी के पदाधिकारी अलग डिप्टी रजिस्ट्रार की मांग को जोर-शोर से उठा रहे हैं।
800 से ज्यादा सोसायटियों में लंबित हैं शिकायतें
नोएडा और आसपास के इलाकों में 800 से ज्यादा सोसायटियां हैं, जिनमें रहने वाले लोग अक्सर एओए चुनाव, रखरखाव और अन्य प्रशासनिक मामलों को लेकर शिकायत दर्ज कराते हैं। लेकिन इन शिकायतों का समाधान समय पर नहीं हो पाता है। कई मामलों में तो पक्षकारों को बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं। इससे लोगों का समय और पैसा दोनों बर्बाद होता है। लंबित मामलों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है, जिससे यह साफ है कि मौजूदा व्यवस्था इस बोझ को संभालने में सक्षम नहीं है। यही कारण है कि इस मुद्दे को अब गंभीरता से उठाया जा रहा है।
किसानों नहीं, अब सोसायटी निवासियों की बढ़ी चिंता
पहले जहां जमीन और किसानों से जुड़े मुद्दे ज्यादा चर्चा में रहते थे, अब शहरी इलाकों में रहने वाले सोसायटी निवासी अपनी समस्याओं को लेकर परेशान हैं। हाईराइज सोसायटियों में रहने वाले लोगों को छोटी-छोटी बातों के लिए भी लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। एओए के गठन से लेकर वित्तीय पारदर्शिता तक कई ऐसे मुद्दे हैं, जिन पर अक्सर विवाद हो जाता है। इन विवादों का समाधान जल्दी न होने से सोसायटी का माहौल भी खराब होता है। लोग चाहते हैं कि एक स्थानीय स्तर पर अधिकारी हो, जो उनकी समस्याओं को तुरंत समझकर हल कर सके।
गाजियाबाद जाने की मजबूरी, बढ़ रही परेशानी
नोएडा के लोगों को अपनी शिकायत दर्ज कराने या समाधान के लिए गाजियाबाद जाना पड़ता है। यह दूरी और समय दोनों के लिहाज से परेशानी बढ़ाने वाला है। कई बार लोगों को एक ही मामले के लिए कई बार आना-जाना पड़ता है, जिससे उनका काफी समय खराब होता है। खास बात यह है कि गाजियाबाद जाकर भी समाधान की गारंटी नहीं होती। कई लोग बताते हैं कि वहां भी सुनवाई में देरी होती है या एक पक्षीय आदेश जारी हो जाता है, जिससे विवाद और बढ़ जाता है। इस वजह से लोग अब स्थानीय स्तर पर ही समाधान चाहते हैं।
पदाधिकारियों ने उठाई अलग डिप्टी रजिस्ट्रार की मांग
नोएडा फेडरेशन आफ अपार्टमेंट एसोसिएशन और अन्य संगठनों के पदाधिकारियों ने प्रशासन से अलग डिप्टी रजिस्ट्रार की तैनाती की मांग की है। उनका कहना है कि गौतमबुद्ध नगर में हाईराइज सोसायटियों की संख्या गाजियाबाद से भी ज्यादा है, ऐसे में यहां अलग अधिकारी होना जरूरी है। कई बार इस मुद्दे को प्रशासन के सामने रखा गया है, लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। इंटरनेट मीडिया पर भी इस मांग को लेकर चर्चा तेज हो गई है और लोग खुलकर अपनी राय रख रहे हैं।
तेजी से बढ़ रही हाईराइज सोसायटियों की संख्या
नोएडा में 130 से ज्यादा हाईराइज सोसायटियां और 650 से ज्यादा आरडब्ल्यूए मौजूद हैं। इसके अलावा न्यू नोएडा जैसे नए प्रोजेक्ट भी विकसित किए जा रहे हैं, जिससे आने वाले समय में सोसायटियों की संख्या और बढ़ेगी। ऐसे में अगर अभी से व्यवस्थाएं मजबूत नहीं की गईं, तो भविष्य में समस्या और भी गंभीर हो सकती है। अधिकारियों पर दबाव बढ़ेगा और लोगों को समाधान के लिए और ज्यादा इंतजार करना पड़ेगा। इसलिए विशेषज्ञ मानते हैं कि समय रहते इस दिशा में कदम उठाना जरूरी है।
स्थायी व्यवस्था की कमी से नहीं मिल रहा लाभ
फिलहाल जो व्यवस्था है, उसमें स्थायी डिप्टी रजिस्ट्रार की कमी साफ नजर आती है। कभी-कभी अस्थायी तौर पर अधिकारी की तैनाती होती है, लेकिन इससे लोगों को ज्यादा फायदा नहीं मिल पाता। कई बार कार्यालय में पर्याप्त स्टाफ भी नहीं होता, जिससे काम प्रभावित होता है। लोगों का कहना है कि सिर्फ अधिकारी ही नहीं, बल्कि एक पूरा कार्यालय और स्टाफ भी होना चाहिए, ताकि काम सुचारू रूप से चल सके। इससे शिकायतों का निपटारा जल्दी हो सकेगा और लोगों को राहत मिलेगी।
भविष्य को देखते हुए जरूरी है बड़ा फैसला
गौतमबुद्ध नगर जैसे तेजी से विकसित हो रहे जिले के लिए यह जरूरी हो गया है कि प्रशासन भविष्य को ध्यान में रखते हुए बड़े फैसले ले। अगर अभी से अलग डिप्टी रजिस्ट्रार की नियुक्ति कर दी जाती है, तो आने वाले समय में होने वाली समस्याओं को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इससे न केवल लोगों को राहत मिलेगी, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था भी मजबूत होगी। स्थानीय लोगों और पदाधिकारियों की मांग है कि इस मुद्दे पर जल्द से जल्द फैसला लिया जाए, ताकि शहर में रहने वाले लाखों लोगों को बेहतर सुविधा मिल सके।
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