अब नोएडा की सड़कों पर घरेलू सहायिकाएं और गिग वर्कर्स, काम के घंटे तय करने, बेहतर वेतन और सम्मान की मांग
- Shiv Kumar
- 16 Apr, 2026
नोएडा की हाईराइज सोसायटियों में काम करने वाली घरेलू सहायिकाएं अब अपनी समस्याओं को लेकर खुलकर सामने आने लगी हैं। मंगलवार और बुधवार को अलग-अलग सेक्टरों में इन सहायिकाओं ने प्रदर्शन किया, जिससे सोसायटियों में रहने वाले लोगों को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। लंबे समय से कम वेतन, तय काम के घंटे न होने और कड़े नियमों से परेशान सहायिकाएं अब संगठित होकर अपनी आवाज उठा रही हैं। सेक्टर-74 की सुपरटेक केपटाउन, सेक्टर-121 की क्लियो काउंटी और सेक्टर-137 समेत कई जगहों पर महिलाओं ने एकजुट होकर विरोध जताया। उनका कहना है कि उन्हें काम के बदले उचित मेहनताना नहीं मिलता और कई बार सम्मानजनक व्यवहार भी नहीं किया जाता। बढ़ती महंगाई के बीच उनकी मांग है कि सैलरी बढ़ाई जाए और काम के नियम स्पष्ट किए जाएं, ताकि उन्हें भी बेहतर जीवन जीने का मौका मिल सके।
सैलरी और काम के घंटे तय करने की मांग तेज
घरेलू सहायिकाओं की सबसे बड़ी मांग यही है कि उनके काम के घंटे तय किए जाएं और उसी के अनुसार उन्हें वेतन दिया जाए। उनका कहना है कि कई घरों में उनसे ज्यादा काम लिया जाता है, लेकिन पैसे उतने नहीं मिलते। कुछ मामलों में तो सुबह से शाम तक काम करने के बावजूद उन्हें तय समय का कोई स्पष्ट हिसाब नहीं दिया जाता। ऐसे में उन्हें शोषण का सामना करना पड़ता है। सहायिकाएं चाहती हैं कि हर सोसायटी में एक समान नियम लागू हों, जिससे उन्हें अपने अधिकारों के लिए बार-बार लड़ना न पड़े। यह मुद्दा अब सिर्फ वेतन का नहीं बल्कि सम्मान और अधिकारों का भी बन गया है।
कई सोसायटियों में लगातार दूसरे दिन भी प्रदर्शन
मंगलवार को शुरू हुआ यह प्रदर्शन बुधवार को भी जारी रहा। सेक्टर-137 की पूर्वांचल सोसायटी, इकोसिटी सोसायटी और आसपास के इलाकों में घरेलू सहायिकाएं एकत्र होकर अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतर आईं। इससे सोसायटी के भीतर रहने वाले लोगों को दैनिक कामकाज में दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कई घरों में कामकाज प्रभावित हुआ और लोगों को खुद ही घर के काम संभालने पड़े। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया जाएगा, तब तक वे इस तरह विरोध जारी रखेंगी।
सोसायटी के नियमों से बढ़ रही परेशानी
घरेलू सहायिकाओं ने सोसायटियों में लागू कड़े नियमों पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि कई जगहों पर प्रवेश और निकास को लेकर सख्त पाबंदियां हैं, जिससे उन्हें बार-बार जांच और रोक-टोक का सामना करना पड़ता है। पहचान पत्र दिखाने की अनिवार्यता और लिफ्ट के इस्तेमाल पर रोक जैसी शर्तें भी उनकी परेशानी बढ़ाती हैं। कई सहायिकाएं कहती हैं कि उन्हें सर्विस लिफ्ट का ही इस्तेमाल करने को कहा जाता है, जिससे समय भी ज्यादा लगता है। इन नियमों के चलते उनका काम और मुश्किल हो जाता है और उन्हें सम्मानजनक माहौल नहीं मिल पाता।
महिला गिग वर्कर्स भी उतरीं सड़क पर
सेक्टर-60 में स्थित अर्बन कंपनी के ट्रेनिंग सेंटर के बाहर भी करीब 40 महिला गिग वर्कर्स ने प्रदर्शन किया। ये महिलाएं ब्यूटी, मसाज और क्लीनिंग जैसी सेवाएं देने का काम करती हैं। उनका कहना है कि प्लेटफॉर्म पर काम तो मिलता है, लेकिन कोई तय समय नहीं होता। वे चाहती हैं कि उनके लिए निश्चित काम के घंटे तय किए जाएं और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। इसके अलावा उन्होंने महिला कर्मचारियों की विशेष जरूरतों को ध्यान में रखने की भी मांग की है। उनका कहना है कि सिर्फ सैलरी बढ़ाना ही समाधान नहीं है, बल्कि काम करने की परिस्थितियों में भी सुधार जरूरी है।
11 घंटे काम, फिर भी नहीं मिलता सम्मान
कई सहायिकाओं का आरोप है कि उन्हें रोजाना 10 से 11 घंटे तक काम करना पड़ता है, जबकि नियमों के अनुसार आठ घंटे काम तय है। इसके बावजूद उन्हें न तो ओवरटाइम मिलता है और न ही पर्याप्त आराम। सबसे बड़ी समस्या यह है कि उन्हें काम के दौरान बुनियादी सुविधाएं भी नहीं मिलतीं। घर-घर जाकर काम करने के कारण उन्हें बैठने की जगह, पीने का पानी या वॉशरूम जैसी सुविधाओं के लिए भी संघर्ष करना पड़ता है। कई बार ग्राहक वॉशरूम इस्तेमाल करने से मना कर देते हैं, जिससे उन्हें और ज्यादा परेशानी होती है।
प्रदर्शन से सोसायटी निवासियों को भी हुई परेशानी
घरेलू सहायिकाओं के प्रदर्शन का असर सोसायटी में रहने वाले लोगों पर भी पड़ा है। कई घरों में काम रुक गया, जिससे लोगों को खुद ही सफाई और अन्य काम करने पड़े। ऑफिस जाने वाले लोगों को समय की दिक्कत हुई और बुजुर्गों को भी परेशानी झेलनी पड़ी। हालांकि कई निवासी सहायिकाओं की मांगों को सही भी मान रहे हैं और उनका समर्थन कर रहे हैं। उनका कहना है कि अगर उनकी समस्याएं समय पर सुलझा दी जाएं, तो इस तरह की स्थिति पैदा ही नहीं होगी।
क्या निकलेगा इस विवाद का समाधान?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस विवाद का समाधान कैसे निकलेगा। घरेलू सहायिकाएं अपनी मांगों पर अड़ी हुई हैं और प्रशासन की ओर से अभी तक कोई ठोस पहल सामने नहीं आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या का हल तभी संभव है, जब सोसायटी प्रबंधन, निवासी और सहायिकाएं मिलकर कोई संतुलित रास्ता निकालें। काम के घंटे तय करना, उचित वेतन देना और सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित करना इस दिशा में अहम कदम हो सकते हैं। अगर जल्द समाधान नहीं निकला, तो आने वाले दिनों में ऐसे प्रदर्शन और बढ़ सकते हैं।
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