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नोएडा पुलिस ने सपा नेताओं को किया हाउस अरेस्ट, माता प्रसाद पांडेय, अतुल प्रधान समेत डेलिगेशन को ले गए पुलिस लाइन

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ग्रेटर नोएडा में मजदूरों के प्रदर्शन के बीच सपा नेताओं को हाउस अरेस्ट कर दिया गया। मजदूरों से मिलने जा रहे प्रतिनिधिमंडल को पुलिस ने रोककर पुलिस लाइन भेज दिया। इस कार्रवाई से सियासत गरमा गई और सरकार पर मजदूरों की आवाज दबाने के आरोप लगे।

ग्रेटर नोएडा में शुक्रवार को उस वक्त सियासी माहौल गरमा गया, जब समाजवादी पार्टी के कई नेताओं को घर में ही नजरबंद कर दिया गया। ये नेता उन मजदूरों से मिलने जा रहे थे, जो अपनी मेहनत की पूरी मजदूरी और अन्य मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। लेकिन पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही रोक दिया और आगे बढ़ने नहीं दिया। इस कार्रवाई से नाराज सपा नेताओं ने सरकार पर मजदूरों की आवाज दबाने का आरोप लगाया। सड़कों पर पुलिस की सख्ती और नेताओं की नाराजगी ने पूरे इलाके का माहौल तनावपूर्ण बना दिया।


मजदूरों की आवाज उठाने पहुंचे नेता, रास्ते में ही रोक दिए गए

विधानसभा में विपक्ष के नेता माता प्रसाद पांडे अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ मजदूरों से मिलने नोएडा पहुंचे थे। उनके साथ कई वरिष्ठ नेता भी मौजूद थे। लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने की इजाजत नहीं दी और रोककर पुलिस लाइन भेज दिया गया। माता प्रसाद पांडे ने आरोप लगाया कि मजदूरों के साथ अन्याय हुआ है और जब उन्होंने अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाई, तो उन पर लाठीचार्ज किया गया। उन्होंने कहा कि मजदूरों को उनकी पूरी मजदूरी तक नहीं मिल रही है, जिसकी शिकायत पहले भी की गई थी, लेकिन सरकार ने इस ओर ध्यान नहीं दिया।


सरकार पर गंभीर आरोप, कहा- समस्या बढ़ी तो लाठीचार्ज किया गया

सपा नेताओं का कहना है कि अगर समय रहते श्रमिकों की समस्याओं का समाधान कर लिया जाता, तो स्थिति इतनी खराब नहीं होती। उन्होंने श्रम विभाग के अधिकारियों पर भी लापरवाही का आरोप लगाया और कहा कि मजदूरों की समस्याओं को नजरअंदाज किया गया। माता प्रसाद पांडे ने कहा कि जब हालात बिगड़ गए, तब सरकार ने समाधान की जगह बल प्रयोग का रास्ता चुना। फिलहाल उन्हें और अन्य नेताओं को पुलिस लाइन में रखा गया है। इस कार्रवाई को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं में भी नाराजगी देखी जा रही है।


प्रदर्शन कर रहे मजदूरों के समर्थन में उतरे कई संगठन, धरने पर बैठे नेता

नोएडा में चल रहे मजदूरों के प्रदर्शन को लेकर सियासत तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा गठित प्रतिनिधिमंडल में कई बड़े नेता शामिल थे, जो मजदूरों की समस्याओं को समझने के लिए मौके पर पहुंचना चाहते थे। वहीं, एक अन्य राजनीतिक दल के प्रतिनिधि भी डीएनडी पर पहुंचे, जहां पहले से भारी पुलिस बल तैनात था। पुलिस द्वारा रोके जाने पर ये लोग वहीं धरने पर बैठ गए। इससे साफ है कि मजदूरों का मुद्दा अब सिर्फ सामाजिक नहीं, बल्कि सियासी रूप भी ले चुका है।

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