ग्रेटर नोएडा में मजदूर का मोबाइल हैक, खाते से 90 हजार रुपये किए पार, एनीडेस्क एप से हुआ कांड

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ग्रेटर नोएडा के दनकौर में साइबर ठगी का मामला सामने आया, जहां एनीडेस्क ऐप के जरिए मोबाइल हैक कर मजदूर के खाते से 90 हजार रुपये निकाल लिए गए। पुलिस ने शिकायत के बाद जांच शुरू कर दी है और आरोपी की तलाश जारी है।

ग्रेटर नोएडा के दनकौर क्षेत्र में साइबर ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक मजदूर के बैंक खाते से करीब 90 हजार रुपये उड़ा लिए गए। पीड़ित रवि कुमार, जो नवादा गांव के निवासी हैं, मजदूरी करके अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं। शनिवार को उनके साथ यह घटना हुई, जब उनका मोबाइल फोन अचानक अपने आप एक्टिव हो गया और कुछ ही मिनटों में उनके खाते से बड़ी रकम निकल गई। इस घटना के बाद इलाके में चिंता का माहौल है और लोगों में साइबर सुरक्षा को लेकर डर भी बढ़ गया है।


मोबाइल अपने आप चला, खाते से पैसे गायब
रवि कुमार ने बताया कि उनका मोबाइल फोन जेब में रखा था, तभी अचानक फोन अपने आप चलने लगा। स्क्रीन पर बिना छुए ही कई गतिविधियां होने लगीं। कुछ ही देर में उनके मोबाइल पर बैंक से मैसेज आने लगे, जिनमें पैसे निकलने की जानकारी थी। जब उन्होंने ध्यान से देखा, तो उनके खाते से करीब 90 हजार रुपये निकल चुके थे। यह देखकर वह घबरा गए और तुरंत बैंक पहुंचे, जहां जांच में पुष्टि हुई कि यह ट्रांजैक्शन ऑनलाइन माध्यम से किया गया है। इस घटना ने उन्हें पूरी तरह से हिला दिया।


एनीडेस्क ऐप के जरिए फोन हैक होने का शक
पीड़ित का आरोप है कि किसी अज्ञात साइबर अपराधी ने उनके मोबाइल को ‘एनीडेस्क’ ऐप के जरिए हैक किया। यह ऐप आमतौर पर रिमोट एक्सेस के लिए इस्तेमाल होता है, लेकिन ठग इसका गलत इस्तेमाल कर लोगों के फोन और बैंकिंग सिस्टम तक पहुंच बना लेते हैं। जैसे ही आरोपी ने फोन का कंट्रोल हासिल किया, उसने यूपीआई के जरिए खाते से पैसे ट्रांसफर कर लिए। इस तरह के मामलों में लोगों की छोटी सी लापरवाही बड़ा नुकसान कर सकती है।


पुलिस जांच में जुटी, आरोपी की तलाश जारी
घटना के बाद रवि कुमार ने सोमवार को दनकौर कोतवाली की साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपी की पहचान की जा रही है। बैंक ट्रांजैक्शन और डिजिटल डेटा की जांच की जा रही है, ताकि जल्द से जल्द आरोपी को पकड़ा जा सके। पुलिस का कहना है कि इस तरह के मामलों में सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।

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