नोएडा हेट क्राइम केस पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, यूपी पुलिस की जांच पर उठाए सवाल, कहा- हमारे साथ लुका-छिपी मत खेलो
- Shiv Kumar
- 22 Apr, 2026
नई दिल्ली। नोएडा के चर्चित 2021 हेट क्राइम मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यूपी पुलिस की जांच पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने साफ कहा कि जांच अधिकारी सही तरीके से पेश नहीं हो रहे और उनका रवैया अदालत के साथ ठीक नहीं है। सुनवाई के दौरान बेंच ने यह भी टिप्पणी की कि जांच अधिकारी का व्यवहार “लुका-छिपी” जैसा लग रहा है, जो स्वीकार्य नहीं है। इस मामले में अदालत ने राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश देते हुए दो हफ्ते का समय दिया है, ताकि सभी जरूरी कदम उठाए जा सकें। अगली सुनवाई 19 मई को तय की गई है।
जांच में खामियों पर कोर्ट की कड़ी टिप्पणी
सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने यूपी सरकार से कई तीखे सवाल पूछे। कोर्ट ने पूछा कि एफआईआर में धारा 153-बी क्यों नहीं जोड़ी गई, जबकि यह राष्ट्रीय एकता के खिलाफ भड़काऊ बयानबाजी से जुड़ी है। साथ ही धारा 295-ए धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने से संबंधित मामलों में लागू होती है। कोर्ट ने यह भी कहा कि 16 फरवरी को दिए गए आदेश के बावजूद अब तक इन धाराओं को सही तरीके से शामिल नहीं किया गया है, जो गंभीर लापरवाही दर्शाता है।
राज्य सरकार को दो हफ्ते का समय
सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने कोर्ट को बताया कि ट्रायल कोर्ट ने आगे की जांच की अनुमति दे दी है और पुलिस आवश्यक धाराएं जोड़ देगी। हालांकि, याचिकाकर्ता के वकील ने दावा किया कि धारा 153-बी को दोबारा हटा दिया गया है। इस पर कोर्ट ने जांच अधिकारी को तलब करने की बात कही, लेकिन राज्य सरकार के अनुरोध पर फिलहाल दो हफ्ते का समय दे दिया। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि उसे अधिकारियों को बार-बार बुलाकर फटकार लगाने में कोई रुचि नहीं है, लेकिन निर्देशों का पालन होना जरूरी है।
पांच साल पुराने मामले से जुड़ा विवाद
यह मामला मुस्लिम धर्मगुरु काजिम अहमद शेरवानी से जुड़ा है। आरोप है कि 4 जुलाई 2021 को जब वह दिल्ली से अलीगढ़ जा रहे थे, तब कुछ लोगों ने उन्हें रास्ते में लिफ्ट दी और बाद में उनके साथ मारपीट की। शिकायत के मुताबिक, आरोपियों ने उनकी दाढ़ी खींची, टोपी उतारी और धार्मिक पहचान को लेकर अपमानजनक व्यवहार किया। इस घटना के बाद मामला हेट क्राइम के रूप में सामने आया था, जिस पर अब सुप्रीम कोर्ट सख्त रुख अपनाए हुए है।
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