डीएनडी से जेवर एयरपोर्ट तक बनेगी नई सड़क, 31.4 किमी एलिवेटेड रोड से कनेक्टिविटी, 4300 करोड़ रुपये होंगे खर्च, 6 लाख लोगों को होगा फायदा

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डीएनडी से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक 31.437 किमी लंबा नया रोड नेटवर्क बनाने की योजना तैयार की गई है। करीब 4300 करोड़ रुपए की इस परियोजना से रोजाना 6 लाख वाहन चालकों को फायदा मिलेगा और नोएडा एक्सप्रेसवे पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा।

दिल्ली से नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा तक कनेक्टिविटी को और बेहतर बनाने के लिए बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर प्लान तैयार किया गया है। इस योजना के तहत डीएनडी से घरबरा तक 31.437 किलोमीटर लंबा आधुनिक रोड नेटवर्क विकसित किया जाएगा। यह प्रोजेक्ट तीन हिस्सों में बनाया जाएगा और इसके निर्माण पर करीब 4300 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। प्राधिकरण के मुताबिक, यह अभी प्रारंभिक लेआउट है, जिसमें आगे संशोधन संभव है। इस रोड के बनने से दिल्ली-नोएडा और आसपास के शहरों के बीच यात्रा और भी आसान हो जाएगी।


तीन हिस्सों में तैयार होगा पूरा प्रोजेक्ट
इस रोड इंफ्रास्ट्रक्चर को तीन भागों में विकसित किया जाएगा। पहला हिस्सा डीएनडी टोल प्लाजा से सेक्टर-94 तक करीब 5 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड-1 होगा। दूसरा हिस्सा 28 किलोमीटर लंबा बंधा रोड एलाइनमेंट होगा, जबकि तीसरा हिस्सा सेक्टर-151 से घरबरा तक 9.2 किलोमीटर का एलिवेटेड-2 होगा। पूरे प्रोजेक्ट में करीब 14.2 किलोमीटर हिस्सा एलिवेटेड रहेगा। इसके अलावा एक बड़ा फ्लाईओवर, कई इंटरचेंज और अन्य आधुनिक सुविधाएं भी शामिल होंगी, जिससे ट्रैफिक मैनेजमेंट बेहतर हो सकेगा।


6 लाख वाहन चालकों को मिलेगा सीधा फायदा
इस प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद रोजाना करीब 6 लाख से ज्यादा वाहन चालकों को राहत मिलने की उम्मीद है। दिल्ली से ग्रेटर नोएडा, आगरा और लखनऊ जाने वाले वाहन इस रोड का इस्तेमाल कर सकेंगे। साथ ही Noida Expressway पर ट्रैफिक का दबाव भी काफी कम हो जाएगा। कालिंदी कुंज से एयरपोर्ट जाने वाले यात्रियों के लिए भी यह नया मार्ग बड़ा विकल्प बनेगा और शहर के अंदरूनी सेक्टरों में लगने वाले जाम से भी राहत मिलेगी।


डीपीआर तैयार, जुलाई तक फाइनल ड्राफ्ट
इस प्रोजेक्ट की डीपीआर तैयार करने का काम अल्मोडज कंसल्टेंट को दिया गया है। कंपनी ने एक महीने में प्रारंभिक ड्राफ्ट प्राधिकरण को सौंप दिया है और अब जुलाई तक फाइनल रिपोर्ट दी जाएगी। इसके बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू होगी और निर्माण कार्य करीब दो साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। अधिकारियों का मानना है कि यह प्रोजेक्ट नोएडा और ग्रेटर नोएडा के इंफ्रास्ट्रक्चर को नई दिशा देगा।

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