नोएडा में इस बड़े मॉल के मालिक गिरफ्तार, 2015 में दर्ज हुआ था धोखाधड़ी का केस, कोर्ट ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा

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ग्रेटर नोएडा के ग्रैंड वेनिस मॉल के मालिक मोंटू भसीन को धोखाधड़ी मामले में पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हुई कार्रवाई में अदालत ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।

ग्रेटर नोएडा के चर्चित ग्रैंड वेनिस प्रोजेक्ट से जुड़े धोखाधड़ी मामले में बड़ा एक्शन लेते हुए बीटा-2 कोतवाली पुलिस ने ग्रैंड वेनिस मॉल के मालिक सतेंद्र भसीन उर्फ मोंटू भसीन को शुक्रवार को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने आरोपी को सूरजपुर स्थित सीजेएम कोर्ट में पेश किया, जहां से अदालत ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। यह मामला वर्ष 2015 में दर्ज हुआ था और लंबे समय से इसकी जांच चल रही थी। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक आरोपी के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी था, लेकिन इसके बावजूद वह लगातार अदालत में पेश नहीं हो रहा था। इसी कारण पुलिस उसकी तलाश में जुटी हुई थी। इस कार्रवाई के बाद ग्रैंड वेनिस प्रोजेक्ट से जुड़े निवेशकों में भी चर्चा तेज हो गई है।


सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हुई कार्रवाई

अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि 2 अप्रैल 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने सतेंद्र भसीन की जमानत रद्द करते हुए उन्हें एक सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया था। साथ ही स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि यदि वह तय समय में सरेंडर नहीं करते हैं, तो उत्तर प्रदेश पुलिस उन्हें गिरफ्तार करे। इसके बावजूद आरोपी ने अदालत के आदेशों का पालन नहीं किया। बताया गया कि 8 अप्रैल को समय बढ़ाने की याचिका भी खारिज कर दी गई थी, लेकिन उसके बाद भी उन्होंने आत्मसमर्पण नहीं किया। अभियोजन पक्ष का आरोप है कि आरोपी ने कई कानूनी प्रक्रियाओं का सहारा लेकर मामले को लंबा खींचने की कोशिश की। साथ ही उनके खिलाफ दर्ज अन्य एफआईआर की जानकारी भी अदालत से छिपाई गई।


निवेशकों ने लगाए धोखाधड़ी और फंड डायवर्जन के आरोप

ग्रैंड वेनिस प्रोजेक्ट से जुड़े कई निवेशकों ने मोंटू भसीन पर धोखाधड़ी, फंड डायवर्जन और आवंटन में गड़बड़ी के गंभीर आरोप लगाए हैं। मामले में पुलिस पहले ही मुख्य चार्जशीट और पूरक चार्जशीट अदालत में दाखिल कर चुकी है। वहीं बचाव पक्ष के अधिवक्ता अमित चौहान ने पुलिस रिमांड का विरोध करते हुए कहा कि यह मामला करीब 10 साल पुराना है और इसकी जांच लगभग पूरी हो चुकी है। उन्होंने अदालत को बताया कि वर्ष 2019 में मुख्य चार्जशीट दाखिल हो चुकी थी, जबकि 2022 और 2025 में पूरक चार्जशीट भी पेश की जा चुकी हैं। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि सभी जरूरी दस्तावेज और साक्ष्य पहले से अदालत के पास मौजूद हैं, इसलिए पुलिस रिमांड की आवश्यकता नहीं है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आरोपी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया।

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