ग्रेटर नोएडा में आरटीई दाखिलों पर डीएम सख्त, बैठक में नहीं पहुंचे 10 स्कूल, नोटिस जारी

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ग्रेटर नोएडा में आरटीई दाखिलों को लेकर डीएम कार्यालय में हुई बैठक में 10 स्कूलों के प्रतिनिधि अनुपस्थित रहे। प्रशासन ने सभी स्कूलों को नोटिस जारी कर अगली सुनवाई में उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं।

ग्रेटर नोएडा में आरटीई के तहत बच्चों के दाखिलों को लेकर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिलाधिकारी कार्यालय में आयोजित अहम बैठक में शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने उन स्कूलों की समीक्षा की, जिन पर आरटीई के तहत दाखिला न देने के आरोप हैं। इस बैठक में 40 निजी स्कूलों के प्रतिनिधियों को बुलाया गया था, लेकिन 10 स्कूलों से कोई भी प्रतिनिधि उपस्थित नहीं हुआ। इसे गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों ने संबंधित स्कूलों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों ने साफ कहा कि आरटीई के तहत चयनित बच्चों का दाखिला हर हाल में सुनिश्चित कराया जाएगा। बैठक में मौजूद स्कूल प्रतिनिधियों को भी कड़ी चेतावनी दी गई कि नियमों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रशासन अब इस मामले में लगातार निगरानी रखने की तैयारी कर रहा है ताकि किसी भी पात्र बच्चे का प्रवेश न रुके।


अनुपस्थित स्कूलों पर प्रशासन की कार्रवाई

बैठक में अनुपस्थित रहने वाले स्कूलों की सूची भी जारी की गई है। इनमें ग्रेटर नोएडा का दरबारी लाल फाउंडेशन स्कूल, नोएडा सेक्टर-122 का दिल्ली पब्लिक स्कूल, सेक्टर-150 का रामाज्ञा स्कूल, शांति इंटरनेशनल स्कूल, स्टेप बाय स्टेप स्कूल, ग्रेनो वेस्ट का बीजीएस विजय नाथम स्कूल, डेल्टा-2 का रामज्ञा स्कूल, नॉलेज पार्क-5 का सेंट मेरी स्कूल, नोएडा का एपीजे स्कूल और बिरला बॉन्ग स्कूल शामिल हैं। प्रशासन ने इन सभी स्कूलों को अगली सुनवाई में उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि अगर इसके बाद भी स्कूल सहयोग नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ आगे की कार्रवाई की जाएगी। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया कि आरटीई कानून के तहत गरीब और जरूरतमंद बच्चों को शिक्षा का अधिकार देना सभी स्कूलों की जिम्मेदारी है और इसमें किसी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।


आरटीई दाखिलों को लेकर प्रशासन का सख्त संदेश

बैठक के दौरान अधिकारियों ने कहा कि सरकार की मंशा है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को भी बेहतर शिक्षा मिल सके। इसी उद्देश्य से आरटीई कानून लागू किया गया है। जिलाधिकारी कार्यालय में हुई समीक्षा बैठक में यह भी निर्देश दिए गए कि जिन बच्चों का चयन हो चुका है, उनके प्रवेश में किसी तरह की देरी न हो। प्रशासन का मानना है कि कई स्कूल जानबूझकर प्रक्रिया को लंबा खींच रहे हैं, जिससे अभिभावकों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। अधिकारियों ने कहा कि यदि किसी स्कूल ने नियमों का उल्लंघन किया तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। जिला प्रशासन अब नियमित रूप से इस प्रक्रिया की समीक्षा करेगा और जरूरत पड़ने पर स्कूल प्रबंधन के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।

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