नोएडा में NHM कर्मचारियों का वेतन अटका, हड़ताल की चेतावनी

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नोएडा में एनएचएम के 800 से ज्यादा कर्मचारियों को दो महीने से वेतन नहीं मिला है। कर्मचारियों ने 21 मई से हड़ताल की चेतावनी दी है। वेतन भुगतान में देरी से स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।

नोएडा में NHM कर्मचारियों की सैलरी अटकने से स्वास्थ्य विभाग में नाराजगी बढ़ती जा रही है। जिले में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत काम कर रहे 800 से ज्यादा संविदा कर्मचारियों ने दो महीने से वेतन न मिलने पर हड़ताल की चेतावनी दे दी है। कर्मचारियों का कहना है कि लगातार ड्यूटी करने के बावजूद समय पर मानदेय नहीं मिलने से परिवार चलाना मुश्किल हो गया है। बच्चों की फीस, किराया, राशन और रोजमर्रा के खर्च पूरे करना चुनौती बन गया है। शुक्रवार को यूपी एनएचएम संविदा कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर जल्द भुगतान की मांग की। कर्मचारियों ने साफ कहा है कि अगर 20 मई तक वेतन जारी नहीं हुआ तो 21 मई से जिलेभर में “नो पे-नो वर्क” नीति लागू की जाएगी। ऐसे में सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवाओं पर भी असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। कर्मचारियों का कहना है कि वे लंबे समय से शासन और अधिकारियों से गुहार लगा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है।


नोएडा NHM वेतन विवाद: दो महीने से सैलरी नहीं, हड़ताल की चेतावनी
नोएडा में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत काम कर रहे संविदा कर्मचारियों का वेतन पिछले दो महीने से अटका हुआ है। इस वजह से कर्मचारियों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। कर्मचारियों का कहना है कि समय पर वेतन न मिलने से घर चलाना मुश्किल हो गया है। कई कर्मचारियों को बच्चों की फीस, किराया और जरूरी खर्चों के लिए उधार तक लेना पड़ रहा है। संघ के पदाधिकारियों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि जल्द भुगतान नहीं हुआ तो स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि कई बार अधिकारियों को समस्या बताने के बावजूद कोई समाधान नहीं निकला। अब आंदोलन का रास्ता अपनाने की तैयारी की जा रही है। इस विवाद ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।


क्या है पूरा मामला?
पूरा मामला नोएडा में NHM के तहत कार्यरत संविदा कर्मचारियों के लंबित वेतन से जुड़ा है। जिले में तैनात डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ, डेटा ऑपरेटर और अन्य स्वास्थ्य कर्मचारी पिछले दो महीने से वेतन का इंतजार कर रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि लगातार ड्यूटी करने और मरीजों की सेवा देने के बावजूद उन्हें समय पर भुगतान नहीं मिल रहा। इस मुद्दे को लेकर संघ के पदाधिकारी कई बार अधिकारियों से मिले, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। कर्मचारियों का कहना है कि सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की बात करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों की परेशानियों को नजरअंदाज किया जा रहा है। अब कर्मचारियों ने सामूहिक रूप से आंदोलन की चेतावनी देकर प्रशासन पर दबाव बढ़ाना शुरू कर दिया है।


कर्मचारियों को कब से नहीं मिला वेतन
एनएचएम कर्मचारियों के अनुसार उन्हें पिछले दो महीनों से वेतन नहीं मिला है। मार्च और अप्रैल का मानदेय अब तक जारी नहीं हुआ, जिससे कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। खासतौर पर ऐसे समय में जब स्कूलों में नया सत्र शुरू हुआ है, कर्मचारियों के सामने बच्चों की फीस और किताबों का खर्च उठाना मुश्किल हो गया है। कई कर्मचारियों का कहना है कि बैंक की ईएमआई और घरेलू खर्च भी समय पर नहीं चुका पा रहे हैं। वेतन रुकने की वजह से मानसिक तनाव भी बढ़ रहा है। कर्मचारियों ने बताया कि वे लगातार अधिकारियों से संपर्क कर रहे हैं, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिल रहा है। यही वजह है कि अब कर्मचारियों का गुस्सा खुलकर सामने आने लगा है।


कितने कर्मचारी प्रभावित
इस वेतन संकट से जिले में 800 से ज्यादा संविदा कर्मचारी प्रभावित बताए जा रहे हैं। इनमें वरिष्ठ चिकित्सक, स्टाफ नर्स, लैब टेक्नीशियन, डेटा एंट्री ऑपरेटर और कई अन्य कर्मचारी शामिल हैं। ये सभी कर्मचारी सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं का अहम हिस्सा हैं और अस्पतालों से लेकर स्वास्थ्य केंद्रों तक अपनी सेवाएं दे रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि कोविड काल में भी उन्होंने पूरी ईमानदारी से काम किया था, लेकिन अब उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा। इतनी बड़ी संख्या में कर्मचारियों के प्रभावित होने से स्वास्थ्य सेवाओं पर भी असर पड़ने की संभावना है। अगर हड़ताल होती है तो अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में कामकाज बाधित हो सकता है, जिससे आम मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ सकती है।


NHM कर्मचारियों ने क्या चेतावनी दी?
एनएचएम कर्मचारियों ने साफ चेतावनी दी है कि अगर 20 मई तक लंबित वेतन जारी नहीं किया गया तो 21 मई से पूरे जिले में कार्य बहिष्कार किया जाएगा। कर्मचारियों ने “नो पे-नो वर्क” नीति अपनाने का ऐलान किया है। इसका मतलब है कि वेतन न मिलने तक कर्मचारी काम नहीं करेंगे। संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि कई बार शांतिपूर्ण तरीके से मांग उठाने के बावजूद समाधान नहीं निकला, इसलिए अब आंदोलन ही आखिरी रास्ता बचा है। कर्मचारियों ने कहा कि वे स्वास्थ्य सेवाओं को बाधित नहीं करना चाहते, लेकिन लगातार आर्थिक संकट झेलने के बाद अब मजबूरी में हड़ताल करनी पड़ रही है। इस चेतावनी के बाद स्वास्थ्य विभाग में हलचल तेज हो गई है।


21 मई से हड़ताल की तैयारी
संविदा कर्मचारी संघ ने 21 मई से हड़ताल की तैयारी शुरू कर दी है। कर्मचारियों को आंदोलन के लिए संगठित किया जा रहा है और सभी स्वास्थ्य केंद्रों तक इसकी जानकारी पहुंचाई जा रही है। संघ का कहना है कि अगर समय रहते वेतन जारी नहीं हुआ तो जिलेभर में कर्मचारी एक साथ काम बंद कर देंगे। कर्मचारियों का दावा है कि इस हड़ताल में बड़ी संख्या में स्वास्थ्य कर्मी शामिल होंगे। इससे ओपीडी सेवाओं, जांच और अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं पर असर पड़ सकता है। कर्मचारियों ने कहा कि वे लंबे समय से धैर्य बनाए हुए थे, लेकिन अब हालात ऐसे हो गए हैं कि आंदोलन करना जरूरी हो गया है। प्रशासन पर अब जल्द फैसला लेने का दबाव बढ़ गया है।


कर्मचारियों की मुख्य मांगें
वेतन भुगतान के अलावा कर्मचारियों ने कई अन्य मांगें भी उठाई हैं। इनमें समान कार्य के लिए समान वेतन, डीए और ईपीएफ की सुविधा, रिक्त पदों पर अंतर्जनपदीय स्थानांतरण और कोविड कर्मचारियों के समायोजन की मांग शामिल है। इसके अलावा कर्मचारियों ने संविदा कर्मचारी की मृत्यु होने पर परिवार के सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति देने की भी मांग रखी है। संघ का कहना है कि लंबे समय से संविदा कर्मचारी अस्थिर स्थिति में काम कर रहे हैं, लेकिन उन्हें स्थायी कर्मचारियों जैसी सुविधाएं नहीं मिलतीं। कर्मचारियों ने सरकार से उनकी समस्याओं को गंभीरता से लेकर जल्द समाधान करने की अपील की है ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने।


स्वास्थ्य सेवाओं पर क्या असर पड़ सकता है?
अगर एनएचएम कर्मचारी हड़ताल पर जाते हैं तो जिले की स्वास्थ्य सेवाओं पर सीधा असर पड़ सकता है। सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में मरीजों को इलाज के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। कई जरूरी सेवाएं प्रभावित होने की संभावना है क्योंकि एनएचएम कर्मचारी स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं। खासतौर पर ग्रामीण और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में दिक्कत ज्यादा बढ़ सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में कर्मचारियों का कार्य बहिष्कार मरीजों के लिए गंभीर समस्या बन सकता है। प्रशासन फिलहाल स्थिति संभालने की कोशिश में जुटा है ताकि स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित न हों।


मरीजों को होने वाली परेशानी
हड़ताल होने की स्थिति में सबसे ज्यादा परेशानी आम मरीजों को उठानी पड़ सकती है। सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने वाले गरीब और जरूरतमंद लोगों के सामने बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है। ओपीडी में भीड़ बढ़ सकती है और जांच रिपोर्ट मिलने में देरी हो सकती है। टीकाकरण, लैब जांच और प्राथमिक उपचार जैसी सेवाएं भी प्रभावित हो सकती हैं। मरीजों और उनके परिजनों को निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ सकता है, जिससे आर्थिक बोझ बढ़ेगा। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार और प्रशासन को जल्द समाधान निकालना चाहिए ताकि मरीजों को किसी तरह की परेशानी न झेलनी पड़े।


अस्पतालों की व्यवस्था
नोएडा के सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में बड़ी संख्या में NHM कर्मचारी तैनात हैं। ये कर्मचारी रोजाना मरीजों की जांच, रिकॉर्ड संभालने, लैब कार्य और अन्य स्वास्थ्य सेवाओं में अहम भूमिका निभाते हैं। अगर कर्मचारी हड़ताल पर जाते हैं तो अस्पतालों की व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। कई विभागों में काम का दबाव बढ़ जाएगा और नियमित सेवाएं धीमी पड़ सकती हैं। अस्पताल प्रशासन फिलहाल वैकल्पिक व्यवस्था बनाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में कर्मचारियों की कमी को पूरा करना आसान नहीं होगा। यही वजह है कि प्रशासन भी जल्द समाधान निकालने में जुटा हुआ है।


प्रशासन और विभाग का क्या कहना है?
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. नरेन्द्र कुमार ने कर्मचारियों के ज्ञापन को शासन तक पहुंचाने की बात कही है। अधिकारियों का कहना है कि वेतन भुगतान की प्रक्रिया पर काम किया जा रहा है और जल्द समाधान निकालने की कोशिश की जाएगी। विभाग का दावा है कि कर्मचारियों की समस्याओं को गंभीरता से लिया जा रहा है। हालांकि कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि भुगतान चाहिए। प्रशासन फिलहाल कर्मचारियों को समझाने और स्थिति को शांत रखने की कोशिश कर रहा है ताकि स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित न हों।


वेतन भुगतान पर अपडेट
विभागीय अधिकारियों के अनुसार वेतन भुगतान से जुड़ी फाइल शासन स्तर पर प्रक्रिया में है। कर्मचारियों को जल्द भुगतान करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि अभी तक कोई निश्चित तारीख घोषित नहीं की गई है। इसी वजह से कर्मचारियों में असंतोष बना हुआ है। कर्मचारी संघ का कहना है कि अगर जल्द स्पष्ट आदेश जारी नहीं हुआ तो आंदोलन तय है। वेतन भुगतान को लेकर लगातार बैठकों और बातचीत का दौर जारी है, लेकिन अब तक स्थिति पूरी तरह साफ नहीं हो पाई है।


अधिकारियों की प्रतिक्रिया
अधिकारियों ने कर्मचारियों से धैर्य बनाए रखने की अपील की है। उनका कहना है कि शासन स्तर पर मामला पहुंचा दिया गया है और जल्द समाधान निकलने की उम्मीद है। अधिकारियों ने यह भी कहा कि स्वास्थ्य सेवाएं बाधित न हों, इसके लिए सभी पक्षों से बातचीत की जा रही है। दूसरी तरफ कर्मचारी संगठन का कहना है कि अब केवल भरोसे से काम नहीं चलेगा। कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें अपने परिवार की जिम्मेदारियां निभानी हैं और बिना वेतन के यह संभव नहीं है। इसी कारण आंदोलन की तैयारी जारी है।


कर्मचारियों की समस्याएं क्या हैं?
एनएचएम कर्मचारियों का कहना है कि वे केवल वेतन की समस्या ही नहीं, बल्कि कई दूसरी परेशानियों का भी सामना कर रहे हैं। संविदा पर काम करने के कारण उन्हें नौकरी की सुरक्षा नहीं मिलती। समय पर भुगतान न होने से मानसिक और आर्थिक दबाव लगातार बढ़ रहा है। कई कर्मचारियों को उधार लेकर घर चलाना पड़ रहा है। इसके अलावा स्थायी कर्मचारियों जैसी सुविधाएं न मिलने से भी असंतोष है। कर्मचारियों का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं में अहम भूमिका निभाने के बावजूद उन्हें बराबरी का सम्मान और सुविधाएं नहीं मिल रहीं।


आर्थिक संकट
दो महीने से वेतन न मिलने के कारण कई कर्मचारियों के सामने आर्थिक संकट गहरा गया है। किराया, बच्चों की फीस, बिजली बिल और राशन जैसे जरूरी खर्च पूरे करना मुश्किल हो रहा है। कई कर्मचारियों ने बताया कि उन्हें कर्ज लेना पड़ रहा है। लगातार बढ़ती महंगाई ने परेशानी और बढ़ा दी है। कर्मचारियों का कहना है कि समय पर वेतन मिलना उनका अधिकार है और इसमें देरी से उनका पूरा पारिवारिक बजट बिगड़ जाता है। यही वजह है कि अब कर्मचारियों में नाराजगी तेजी से बढ़ रही है।


कामकाज पर असर
वेतन न मिलने का असर कर्मचारियों के मनोबल और कामकाज पर भी पड़ रहा है। कर्मचारियों का कहना है that आर्थिक तनाव के बीच पूरी क्षमता से काम करना मुश्किल हो जाता है। कई कर्मचारी मानसिक दबाव में हैं। अगर हड़ताल होती है तो अस्पतालों में कामकाज और ज्यादा प्रभावित हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारु रखने के लिए कर्मचारियों की समस्याओं का समय पर समाधान जरूरी है। ऐसे में प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती जल्द भुगतान कर हालात सामान्य बनाए रखने की है।

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