नोएडा में प्रॉपर्टी खरीदना हुआ महंगा, प्राधिकरण ने बढ़ाईं दरें
- Shiv Kumar
- 11 May, 2026
नोएडा में अब घर, फ्लैट, प्लॉट या औद्योगिक भूखंड खरीदना पहले से ज्यादा महंगा हो गया है। नोएडा प्राधिकरण ने आवासीय, औद्योगिक, संस्थागत और ग्रुप हाउसिंग संपत्तियों की दरों में 11 प्रतिशत तक बढ़ोतरी कर दी है। नई दरें लागू होने के बाद अब प्राधिकरण की ओर से होने वाले सभी नए आवंटन बढ़ी हुई कीमतों पर किए जाएंगे। पिछले कुछ वर्षों में जहां 5 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखने को मिलती थी, वहीं इस बार सीधे 11 प्रतिशत की वृद्धि ने खरीदारों और निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इसका असर मध्यम वर्गीय परिवारों पर सबसे ज्यादा पड़ सकता है, जो लंबे समय से नोएडा में घर खरीदने का सपना देख रहे हैं। प्राधिकरण का कहना है कि विकास परियोजनाओं की लागत, निर्माण सामग्री की बढ़ती कीमत और इंफ्रास्ट्रक्चर पर होने वाले खर्च को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। हालांकि व्यावसायिक संपत्तियों की दरों को स्थिर रखा गया है, लेकिन आवासीय और औद्योगिक सेक्टर में यह बदलाव सीधे लोगों की जेब पर असर डालने वाला माना जा रहा है।
नोएडा संपत्ति दर वृद्धि: घर और कारोबार करना हुआ महंगा
नोएडा प्राधिकरण के इस फैसले के बाद शहर में संपत्ति खरीदना पहले से कहीं ज्यादा महंगा हो गया है। नई दरें लागू होने के बाद अब आवासीय प्लॉट, फ्लैट और औद्योगिक भूखंडों की कीमतों में बड़ा अंतर देखने को मिलेगा। खास बात यह है कि इस बार बढ़ोतरी सिर्फ प्रतीकात्मक नहीं बल्कि 11 प्रतिशत तक की गई है, जो पिछले कई वर्षों की तुलना में सबसे ज्यादा मानी जा रही है। रियल एस्टेट विशेषज्ञों का कहना है कि इससे मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए घर खरीदना मुश्किल हो सकता है। वहीं कारोबारियों और उद्योगपतियों को भी नए प्रोजेक्ट शुरू करने में ज्यादा निवेश करना पड़ेगा। नोएडा जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहर में प्रॉपर्टी पहले ही महंगी मानी जाती है और अब इस फैसले ने खरीदारों की चिंता और बढ़ा दी है।
प्राधिकरण ने कितनी बढ़ाई दरें
नोएडा प्राधिकरण ने अलग-अलग श्रेणियों की संपत्तियों पर नई दरें लागू की हैं। आवासीय और औद्योगिक संपत्तियों में लगभग 11 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की गई है। उदाहरण के तौर पर बी श्रेणी की आवासीय संपत्तियों की दर 92,620 रुपये प्रति वर्ग मीटर से बढ़ाकर 1,02,810 रुपये कर दी गई है। वहीं सी और डी श्रेणी की संपत्तियों में भी हजारों रुपये प्रति वर्ग मीटर की वृद्धि की गई है। ग्रुप हाउसिंग परियोजनाओं में भी कीमतें बढ़ी हैं, जिससे बिल्डरों की लागत और ज्यादा बढ़ सकती है। हालांकि ए प्लस श्रेणी में कोई बदलाव नहीं किया गया। औद्योगिक सेक्टर में भी फेज-1 और फेज-2 के भूखंडों की कीमतें बढ़ा दी गई हैं। इससे आने वाले समय में औद्योगिक निवेश की लागत भी बढ़ सकती है।
नई दरें कब से लागू
प्राधिकरण द्वारा तय की गई नई दरें गुरुवार से प्रभावी कर दी गई हैं। इसका मतलब है कि अब से होने वाले सभी नए आवंटन और आवेदन बढ़ी हुई कीमतों पर ही किए जाएंगे। जिन लोगों ने पहले आवेदन नहीं किया था, उन्हें अब ज्यादा रकम चुकानी पड़ेगी। अधिकारियों के अनुसार यह फैसला बोर्ड बैठक में मंजूरी मिलने के बाद लागू किया गया है। नई दरों का असर सिर्फ नई खरीद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि संपत्ति ट्रांसफर शुल्क और अन्य प्रक्रियाओं पर भी पड़ेगा। ऐसे में अब संपत्ति से जुड़ा हर काम थोड़ा महंगा हो सकता है। कई लोग उम्मीद कर रहे थे कि इस बार मामूली बढ़ोतरी होगी, लेकिन अचानक 11 प्रतिशत तक की वृद्धि ने बाजार में चर्चा तेज कर दी है।
किन संपत्तियों पर पड़ेगा असर?
नई दरों का असर लगभग सभी प्रमुख श्रेणियों की संपत्तियों पर देखने को मिलेगा। इसमें आवासीय प्लॉट, ग्रुप हाउसिंग परियोजनाएं, औद्योगिक भूखंड और संस्थागत जमीन शामिल हैं। खासकर वे लोग ज्यादा प्रभावित होंगे जो नोएडा में नया घर खरीदने या निवेश करने की योजना बना रहे थे। बिल्डरों की लागत बढ़ने से फ्लैट की कीमतों में भी इजाफा हो सकता है। वहीं औद्योगिक सेक्टर में भूखंड महंगे होने से छोटे और मध्यम उद्योगों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। हालांकि व्यावसायिक संपत्तियों की दरों में इस बार कोई बदलाव नहीं किया गया है। प्राधिकरण का कहना है कि कमर्शियल प्रॉपर्टी में फिलहाल मांग कमजोर है, इसलिए उनकी कीमतें स्थिर रखी गई हैं।
आवासीय प्लॉट और फ्लैट
आवासीय संपत्तियों की नई दरों ने घर खरीदने वालों की चिंता बढ़ा दी है। नोएडा के अलग-अलग सेक्टरों में प्लॉट और फ्लैट की कीमतें पहले ही काफी ऊंची थीं और अब नई वृद्धि के बाद यह और महंगे हो जाएंगे। खासकर मध्यम आय वर्ग के लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं। कई परिवार वर्षों से घर खरीदने की योजना बना रहे थे, लेकिन अब उन्हें ज्यादा बजट तैयार करना होगा। ग्रुप हाउसिंग परियोजनाओं में भी नई दरें लागू होने से बिल्डर अपनी लागत ग्राहकों पर डाल सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में फ्लैट की कीमतों में भी वृद्धि देखने को मिल सकती है। हालांकि ईडब्ल्यूएस और श्रमिक कुंज जैसी योजनाओं में राहत देकर निम्न आय वर्ग को कुछ सहूलियत देने की कोशिश की गई है।
व्यावसायिक संपत्तियां
दिलचस्प बात यह है कि इस बार व्यावसायिक संपत्तियों की दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया। प्राधिकरण का कहना है कि पिछले कुछ समय से कमर्शियल प्रॉपर्टी में निवेश की रफ्तार धीमी रही है। ऐसे में कीमतें बढ़ाने से बाजार और कमजोर पड़ सकता था। विशेषज्ञों के मुताबिक यह फैसला कारोबारियों को राहत देने वाला है। मॉल, ऑफिस स्पेस और दुकानों की खरीद में पहले से ही सुस्ती देखने को मिल रही है। अगर यहां भी कीमतें बढ़तीं तो नए निवेश पर असर पड़ सकता था। हालांकि आवासीय और औद्योगिक संपत्तियों की कीमतें बढ़ने का अप्रत्यक्ष असर व्यावसायिक बाजार पर भी पड़ सकता है, क्योंकि कुल निवेश लागत में बढ़ोतरी होगी। आने वाले समय में बाजार की स्थिति के आधार पर प्राधिकरण आगे कोई नया फैसला ले सकता है।
लोगों और कारोबारियों पर क्या असर होगा?
नई दरों का सीधा असर आम लोगों और कारोबारियों दोनों पर पड़ेगा। घर खरीदने वालों को अब ज्यादा कीमत चुकानी होगी, जबकि उद्योग लगाने वालों की लागत भी बढ़ जाएगी। इससे छोटे निवेशकों के लिए नोएडा में प्रॉपर्टी खरीदना मुश्किल हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में बिल्डर भी फ्लैट और प्लॉट की कीमतें बढ़ा सकते हैं। कारोबारियों के लिए औद्योगिक भूखंड महंगे होने का मतलब है कि नई फैक्ट्री या यूनिट लगाने का खर्च बढ़ जाएगा। इससे उत्पादों की लागत और रोजगार पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि प्राधिकरण का तर्क है कि विकास कार्यों के लिए फंड जुटाने के लिए यह बढ़ोतरी जरूरी थी।
घर बनाने की लागत बढ़ेगी
नई दरों के लागू होने के बाद घर बनाना पहले से ज्यादा महंगा हो जाएगा। जमीन की कीमत बढ़ने के साथ-साथ निर्माण सामग्री, मजदूरी और अन्य खर्च भी लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में नया घर बनाने वालों को कुल परियोजना लागत में बड़ा अंतर देखने को मिल सकता है। बिल्डरों पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ेगा, जिसका असर फ्लैट की कीमतों पर दिखाई देगा। खासकर मध्यम वर्ग के लोग, जो सीमित बजट में घर खरीदने की योजना बनाते हैं, उनके लिए यह फैसला मुश्किलें बढ़ा सकता है। रियल एस्टेट विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में नोएडा के कई सेक्टरों में प्रॉपर्टी की कीमतें और बढ़ सकती हैं।
बिजनेस निवेश पर प्रभाव
औद्योगिक भूखंडों की कीमतों में बढ़ोतरी से कारोबारियों के लिए निवेश महंगा हो जाएगा। नई फैक्ट्री लगाने या विस्तार करने की योजना बना रही कंपनियों को अब ज्यादा पूंजी लगानी पड़ेगी। छोटे उद्योगों पर इसका असर ज्यादा पड़ सकता है, क्योंकि उनकी निवेश क्षमता सीमित होती है। हालांकि बड़े उद्योगपति इसे लंबे समय के निवेश के तौर पर देख रहे हैं। नोएडा का बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और दिल्ली-एनसीआर से जुड़ाव अब भी निवेशकों को आकर्षित करता है। लेकिन लागत बढ़ने से कुछ कंपनियां वैकल्पिक शहरों की ओर भी रुख कर सकती हैं।
रियल एस्टेट बाजार में क्या बदलाव आएंगे?
नई दरों के बाद नोएडा के रियल एस्टेट बाजार में हलचल बढ़ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि कुछ समय के लिए खरीदारों की संख्या कम हो सकती है, क्योंकि लोग बढ़ी हुई कीमतों का असर समझने की कोशिश करेंगे। वहीं बिल्डर अपने प्रोजेक्ट की कीमतों में संशोधन कर सकते हैं। दूसरी ओर निवेशक इसे भविष्य में बेहतर रिटर्न का संकेत भी मान रहे हैं। नोएडा में लगातार बढ़ते इंफ्रास्ट्रक्चर और मेट्रो कनेक्टिविटी की वजह से संपत्तियों की मांग बनी रहने की उम्मीद है। हालांकि मध्यम वर्ग के लिए यह फैसला चिंता का कारण बन सकता है।
निवेशकों की प्रतिक्रिया
प्रॉपर्टी निवेशकों की प्रतिक्रिया इस फैसले पर मिली-जुली रही है। कुछ निवेशकों का मानना है कि नोएडा का बाजार अभी भी मजबूत है और यहां निवेश भविष्य में अच्छा रिटर्न दे सकता है। वहीं कुछ लोग अचानक हुई 11 प्रतिशत वृद्धि को ज्यादा मान रहे हैं। उनका कहना है कि इससे नए निवेशकों का उत्साह कम हो सकता है। खासकर छोटे निवेशकों के लिए बजट संभालना मुश्किल हो सकता है। रियल एस्टेट सलाहकारों का कहना है कि लंबे समय में नोएडा की बढ़ती मांग कीमतों को और ऊपर ले जा सकती है।
बाजार की संभावनाएं
नोएडा का रियल एस्टेट बाजार लगातार विस्तार कर रहा है। एयरपोर्ट, एक्सप्रेसवे, मेट्रो और नए औद्योगिक प्रोजेक्ट्स की वजह से यहां भविष्य की संभावनाएं मजबूत मानी जा रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद निवेश की मांग पूरी तरह खत्म नहीं होगी। नोएडा अभी भी दिल्ली-एनसीआर के सबसे तेजी से विकसित हो रहे शहरों में शामिल है। ऐसे में लंबी अवधि के निवेशक इसे बेहतर अवसर के रूप में देख रहे हैं। हालांकि आम खरीदारों को अब ज्यादा सोच-समझकर निवेश करना होगा।
प्राधिकरण ने क्या वजह बताई?
नोएडा प्राधिकरण का कहना है कि बढ़ती निर्माण लागत और विकास परियोजनाओं पर होने वाले भारी खर्च की वजह से दरें बढ़ाना जरूरी हो गया था। अधिकारियों के मुताबिक शहर में सड़क, सीवर, जलापूर्ति और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं पर लगातार खर्च बढ़ रहा है। इसके अलावा जमीन अधिग्रहण और रखरखाव की लागत भी बढ़ी है। प्राधिकरण का मानना है कि नई दरों से विकास कार्यों को गति देने में मदद मिलेगी और शहर की सुविधाओं को और बेहतर बनाया जा सकेगा।
विकास परियोजनाओं का खर्च
नोएडा में लगातार नई परियोजनाएं शुरू हो रही हैं, जिन पर भारी निवेश किया जा रहा है। सड़क चौड़ीकरण, मेट्रो विस्तार, सीवर लाइन और हरित क्षेत्र विकसित करने जैसे कामों में करोड़ों रुपये खर्च हो रहे हैं। प्राधिकरण का कहना है कि इन योजनाओं के लिए अतिरिक्त फंड की जरूरत थी। इसी वजह से संपत्तियों की कीमतों में बढ़ोतरी की गई है। अधिकारियों के अनुसार यह कदम शहर के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए उठाया गया है।
इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार
प्राधिकरण का दावा है कि नई दरों से मिलने वाली आय शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर को और मजबूत करने में इस्तेमाल होगी। बेहतर सड़कें, पार्क, जल निकासी व्यवस्था और यातायात सुधार जैसी योजनाओं पर तेजी से काम किया जाएगा। नोएडा लगातार बढ़ती आबादी और निवेश के कारण तेजी से विकसित हो रहा है। ऐसे में आधुनिक सुविधाएं बढ़ाना जरूरी माना जा रहा है। हालांकि लोगों का कहना है कि कीमतें बढ़ाने के साथ-साथ सुविधाओं में भी तेजी से सुधार दिखना चाहिए।
Leave a Reply
Your email address will not be published. Required fields are marked *






