भूमि दरें बढ़ीं लेकिन किसानों का मुआवजा पुराना, विधायक धीरेंद्र सिंह ने उठाए सवाल, नोएडा प्रशासन को भेजा विस्तृत पत्र
- Shiv Kumar
- 12 May, 2026
नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में लगातार बढ़ रही भूमि दरों के बीच किसानों के मुआवजे को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। जेवर विधायक धीरेंद्र सिंह ने किसानों के मुआवजे और सर्किल रेट में बढ़ोतरी की मांग उठाते हुए प्रशासन को विस्तृत पत्र भेजा है। विधायक ने कहा कि पिछले चार वर्षों में प्राधिकरण क्षेत्रों में आवासीय और औद्योगिक भूखंडों की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है, लेकिन किसानों को अब भी पुराने दरों पर मुआवजा दिया जा रहा है, जो पूरी तरह अन्यायपूर्ण है। उन्होंने प्रशासन से इस मामले में जल्द फैसला लेने और नई दरें लागू करने की मांग की है।
भूखंड दरों में 63 प्रतिशत तक बढ़ोतरी का दावा
विधायक धीरेंद्र सिंह का दावा है कि पिछले चार वर्षों के दौरान आवासीय भूखंडों की दरों में लगभग 53 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है, जबकि औद्योगिक भूखंडों की कीमतें 63 प्रतिशत तक बढ़ चुकी हैं। उनका कहना है कि जब प्राधिकरण बाजार मूल्य के आधार पर भूखंड बेच रहे हैं, तब किसानों की जमीन अधिग्रहित करते समय पुराने सर्किल रेट लागू करना उचित नहीं है। विधायक ने पत्र में यह भी कहा कि विकास परियोजनाओं के कारण जमीनों का मूल्य लगातार बढ़ा है और इसका लाभ उन किसानों तक भी पहुंचना चाहिए, जिन्होंने अपनी जमीन देकर विकास में योगदान दिया।
पुनर्वास लाभ बढ़ाने की भी मांग
धीरेंद्र सिंह ने केवल मुआवजा ही नहीं, बल्कि किसानों को मिलने वाले पुनर्वास लाभों में भी समुचित वृद्धि की मांग की है। उन्होंने कहा कि किसानों के हितों की अनदेखी कर विकास की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जा सकती। उनके मुताबिक जिन किसानों की जमीन पर आज बड़े औद्योगिक और आवासीय प्रोजेक्ट खड़े हैं, उन्हें भी उसी अनुपात में लाभ मिलना चाहिए। विधायक ने प्रशासन से अपील की है कि किसानों की आर्थिक सुरक्षा और भविष्य को ध्यान में रखते हुए नई नीति लागू की जाए।
प्रशासन से जल्द फैसले की मांग
विधायक ने अपने पत्र में प्रशासन से तत्काल निर्णय लेने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि भूमि दरों में लगातार वृद्धि हो रही है तो किसानों के मुआवजे और सर्किल रेट में भी उसी अनुपात में संशोधन होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि किसानों की समस्याओं को लेकर सरकार और प्रशासन को संवेदनशील रवैया अपनाने की जरूरत है। इस मुद्दे को लेकर क्षेत्र के किसानों में भी चर्चा तेज हो गई है और अब सभी की नजर प्रशासन के अगले कदम पर टिकी है।
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