नोएडा पुलिस ने फर्जी कॉल सेंटर का किया भंडाफोड़, केवाईसी अपडेट के नाम पर करते थे ठगी, 2 गिरफ्तार
- Shiv Kumar
- 13 May, 2026
नोएडा में साइबर ठगी करने वाले एक फर्जी कॉल सेंटर का पुलिस ने खुलासा किया है। थाना फेज-1 पुलिस ने सेक्टर-2 स्थित एक बिल्डिंग में छापा मारकर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपी खुद को बैंक के क्रेडिट कार्ड विभाग का कर्मचारी बताकर लोगों को ठगी का शिकार बनाते थे। पुलिस के मुताबिक, ये लोग केवाईसी अपडेट कराने और रिवॉर्ड प्वाइंट रिडीम कराने का झांसा देकर मोबाइल फोन का एक्सेस हासिल कर लेते थे। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से मोबाइल फोन और सोने-चांदी जैसे सामान भी बरामद किए हैं। शुरुआती जांच में पता चला है कि आरोपी लंबे समय से इस तरीके से लोगों को निशाना बना रहे थे। मामले की जांच अब और गहराई से की जा रही है।
बैंक कर्मचारी बनकर लोगों को फंसाते थे आरोपी
पुलिस के अनुसार, लोकल इंटेलिजेंस और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस की मदद से मंगलवार को सेक्टर-2 की एक बिल्डिंग की चौथी मंजिल पर चल रहे कॉल सेंटर पर छापा मारा गया। यहां से विकास कुमार और सूरज नाम के दो युवकों को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे कमीशन के आधार पर काम करते थे और अलग-अलग बैंकों के क्रेडिट कार्ड धारकों का डेटा हासिल करते थे। इसके बाद वे खुद को एयू बैंक, एक्सिस बैंक और अन्य बैंकों के क्रेडिट कार्ड विभाग का कर्मचारी बताकर कॉल करते थे। आरोपी ग्राहकों को कहते थे कि उनका केवाईसी अपडेट करना जरूरी है या उनके रिवॉर्ड प्वाइंट एक्सपायर होने वाले हैं। इसी बहाने वे लोगों को एक एपीके फाइल डाउनलोड करवाते थे।
मोबाइल का एक्सेस लेकर करते थे ठगी
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी जिस एपीके फाइल को डाउनलोड करवाते थे, वह देखने में बिल्कुल बैंकिंग ऐप जैसी लगती थी। जैसे ही कोई व्यक्ति उसे इंस्टॉल करता, आरोपियों को उसके मोबाइल का एक्सेस मिल जाता था। इसके बाद वे पीड़ित से उसी ऐप में क्रेडिट कार्ड नंबर, सीवीवी और दूसरी जरूरी जानकारी भरवाते थे। कई मामलों में ट्रांजेक्शन का ओटीपी भी सीधे आरोपियों तक पहुंच जाता था। इसके जरिए आरोपी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से गोल्ड और सिल्वर क्वाइन खरीद लेते थे। पुलिस ने बताया कि ठगी के बाद आरोपी इस्तेमाल किए गए सिम कार्ड तोड़कर फेंक देते थे और सामान की डिलीवरी अलग-अलग पतों पर मंगवाते थे। बाद में खरीदे गए क्वाइन बेचकर रकम बांट लेते थे। जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों के खिलाफ देश के कई राज्यों में 20 से ज्यादा शिकायतें दर्ज हैं।
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