ग्रेनो वेस्ट मेट्रो परियोजना को जून में मिलेगी मंजूरी, 1.25 लाख लोगों को होगा फायदा, बनेंगे 5 नए स्टेशन

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ग्रेटर नोएडा वेस्ट मेट्रो परियोजना को जून के पहले सप्ताह में पीआईबी से मंजूरी मिल सकती है। सेक्टर-51 से किसान चौक तक बनने वाले इस कॉरिडोर से करीब 1.25 लाख लोगों को फायदा होगा।

ग्रेटर नोएडा वेस्ट मेट्रो परियोजना को लेकर बड़ी अपडेट सामने आई है। परियोजना को जून के पहले सप्ताह में पब्लिक इनवेस्टमेंट बोर्ड (PIB) से मंजूरी मिल सकती है। इसके लिए 6 या 7 जून को बैठक प्रस्तावित मानी जा रही है, जिसमें नोएडा मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के अधिकारी परियोजना की उपयोगिता और जरूरत को लेकर प्रस्तुतीकरण देंगे। यदि इस बैठक में परियोजना को मंजूरी मिल जाती है तो इसके बाद इसे मंत्रालय स्तर से स्वीकृति मिलने का रास्ता साफ हो जाएगा। इसके बाद प्रस्ताव केंद्रीय कैबिनेट के पास भेजा जाएगा। लंबे समय से ग्रेटर नोएडा वेस्ट के लोग इस मेट्रो परियोजना का इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि इससे लाखों यात्रियों को राहत मिलने की उम्मीद है।


सेक्टर-51 से किसान चौक तक बनेगा मेट्रो कॉरिडोर

नोएडा मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने सेक्टर-51 से ग्रेटर नोएडा वेस्ट सेक्टर-4 स्थित किसान चौक तक 5 स्टेशन वाला कॉरिडोर बनाने का प्रस्ताव तैयार किया है। इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 900 करोड़ रुपये बताई जा रही है। 7.5 किलोमीटर लंबे इस रूट पर सेक्टर-61, सेक्टर-70, सेक्टर-122, सेक्टर-123 और ग्रेटर नोएडा वेस्ट सेक्टर-4 में मेट्रो स्टेशन प्रस्तावित हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह रूट भविष्य में प्रस्तावित आरआरटीएस लाइन से भी जुड़ सकेगा, लेकिन दोनों परियोजनाएं अलग-अलग रहेंगी। इससे नोएडा और ग्रेटर नोएडा वेस्ट के बीच बेहतर कनेक्टिविटी विकसित होगी और लोगों को आवागमन में काफी सुविधा मिलेगी।


जाम से राहत और एयरपोर्ट कनेक्टिविटी होगी बेहतर

मेट्रो अधिकारियों के मुताबिक यह लाइन गाजियाबाद से जेवर एयरपोर्ट तक प्रस्तावित आरआरटीएस कॉरिडोर को जोड़ने में भी अहम भूमिका निभाएगी। इसके जरिए लोग मेट्रो और आरआरटीएस दोनों माध्यमों से आसानी से जेवर एयरपोर्ट तक पहुंच सकेंगे। परियोजना के पूरा होने में करीब दो साल का समय लग सकता है। इस रूट के बनने से करीब 1.25 लाख से अधिक लोगों को सीधा फायदा मिलने का अनुमान है। खासकर ग्रेटर नोएडा वेस्ट, गौर चौक और नोएडा के बीच रोजाना लगने वाले ट्रैफिक जाम से राहत मिलेगी। परियोजना के लिए केंद्र सरकार, राज्य सरकार, नोएडा प्राधिकरण और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण मिलकर फंडिंग करेंगे।

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