नालों की सफाई में लापरवाही पर होगी कार्रवाई, जलभराव हुआ तो सीनियर होंगे मैनेजर सस्पेंड
- Shiv Kumar
- 26 May, 2026
नोएडा में मानसून से पहले नालों की सफाई का काम इस बार अधूरा रहने की आशंका है। अधिकांश सर्किलों में अब तक नाला सफाई के टेंडर जारी नहीं किए गए हैं। इस लापरवाही को लेकर नोएडा प्राधिकरण ने सख्त रुख अपनाया है। प्राधिकरण के ओएसडी क्रांति शेखर ने साफ कहा है कि जिन अधिकारियों ने समय पर टेंडर जारी नहीं किए, उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। वहीं मानसून के दौरान जिस क्षेत्र में जलभराव मिलेगा, वहां के सीनियर मैनेजर को सीधे सस्पेंड किया जाएगा।
हर साल अप्रैल में टेंडर प्रक्रिया पूरी कर 15 जून तक शहर के छोटे और बड़े नालों की सफाई करा दी जाती थी, ताकि बरसात में लोगों को जलभराव की समस्या का सामना न करना पड़े। लेकिन इस बार मई खत्म होने को है और कई सर्किलों में टेंडर प्रक्रिया तक शुरू नहीं हो सकी है। ऐसे में मानसून से पहले सफाई कार्य पूरा होना मुश्किल माना जा रहा है। प्राधिकरण के इस ढीले रवैये से शहरवासियों की चिंता बढ़ गई है।
जनवरी में बदली व्यवस्था, अब बढ़ी परेशानी
जनवरी में प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी कृष्ण करुणेश ने व्यवस्था में बदलाव करते हुए जन स्वास्थ्य विभाग को सिविल विभाग के साथ जोड़ दिया था। पहले नाला सफाई और स्वच्छता व्यवस्था अलग विभाग के जरिए संचालित होती थी, लेकिन नई व्यवस्था में इसे दस वर्क सर्किलों के अधीन कर दिया गया। मकसद यह था कि ज्यादा अधिकारियों की निगरानी में सफाई व्यवस्था बेहतर हो सके। नई व्यवस्था के तहत सुपरवाइजर, जूनियर इंजीनियर और प्रबंधकों को क्षेत्र में जाकर सड़क, नाली और नालों की स्थिति पर नजर रखनी थी। हालांकि व्यवस्था बदलने के बाद टेंडर प्रक्रिया को लेकर भ्रम की स्थिति बन गई। अधिकारियों को समझ नहीं आ पाया कि नाला सफाई का काम किस तरीके से विभाजित किया जाए। इसी वजह से समय पर टेंडर जारी नहीं हो सके और सफाई कार्य अटक गया।
10 हिस्सों में बंटा काम, समय पर नहीं हो पाएगी सफाई
पहले जन स्वास्थ्य विभाग की ओर से पांच-पांच करोड़ रुपये के दो बड़े टेंडर जारी किए जाते थे। नई व्यवस्था लागू होने के बाद अब यह काम दस सर्किलों में बांट दिया गया है। यानी अब दस अलग-अलग टेंडर जारी होने थे। अधिकारियों के अनुसार सबसे बड़ी दिक्कत फ्लोटिंग मैटेरियल को लेकर सामने आई। नाला एक सर्किल से दूसरे सर्किल तक गुजरता है। ऐसे में एक क्षेत्र में सफाई होने पर कचरा बहकर दूसरे क्षेत्र में पहुंच जाता है। इसी समन्वय की कमी के चलते टेंडर प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई। अधिकारियों का कहना है कि अगर आज टेंडर जारी भी कर दिए जाएं, तब भी नियमानुसार प्रक्रिया पूरी होने और टेंडर खुलने में करीब 45 दिन लगेंगे। ऐसे में 15 जून तक नालों की सफाई पूरी होना लगभग नामुमकिन माना जा रहा है।
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