नोएडा में कंपनी अकाउंटेंट से 18 लाख की साइबर ठगी, डायरेक्टर बनकर व्हाट्सऐप से कर दिया कांड
- Shiv Kumar
- 28 May, 2026
नोएडा में साइबर ठगों ने एक निजी कंपनी के अकाउंटेंट को निशाना बनाकर 18 लाख रुपए की ठगी कर ली। मामला सेक्टर-63 स्थित एक कंपनी का है, जहां ठगों ने बेहद शातिर तरीके से कंपनी डायरेक्टर की फोटो का इस्तेमाल कर अकाउंटेंट को अपने जाल में फंसा लिया। आरोपी ने व्हाट्सऐप पर कंपनी डायरेक्टर की डीपी लगाकर मैसेज किया और खुद को जरूरी मीटिंग में व्यस्त बताते हुए तुरंत पेमेंट करने के निर्देश दिए। अकाउंटेंट को लगा कि मैसेज सच में कंपनी डायरेक्टर ने भेजा है, इसलिए उसने बिना पुष्टि किए अलग-अलग बैंक खातों में पूरी रकम ट्रांसफर कर दी। कुछ देर बाद जब असली डायरेक्टर से बातचीत हुई तो पूरे मामले का खुलासा हुआ। घटना के बाद कंपनी में हड़कंप मच गया। पीड़ित पक्ष ने साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई है और पुलिस अब बैंक खातों व मोबाइल नंबरों के जरिए आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
व्हाट्सऐप डीपी देखकर भरोसे में आया अकाउंटेंट
पुलिस को दी शिकायत में कंपनी डायरेक्टर संजीव चौहान ने बताया कि उनकी कंपनी बामा पावर कंट्रोल सिस्टम प्राइवेट लिमिटेड सेक्टर-63 में स्थित है। कंपनी में आरके सिन्हा अकाउंटेंट के तौर पर काम करते हैं और फाइनेंस से जुड़े सभी काम संभालते हैं। 11 मई को अकाउंटेंट के मोबाइल पर एक अनजान नंबर से व्हाट्सऐप मैसेज आया। मैसेज भेजने वाले ने अपनी डीपी पर कंपनी डायरेक्टर की फोटो लगा रखी थी। प्रोफाइल फोटो देखकर अकाउंटेंट को शक नहीं हुआ और उसने समझा कि मैसेज खुद कंपनी डायरेक्टर ने भेजा है। आरोपी ने पहले कंपनी खाते में मौजूद रकम की जानकारी ली और फिर खुद को जरूरी मीटिंग में बताकर तत्काल भुगतान करने के लिए कहा। इसके बाद अलग-अलग बैंक खातों की डिटेल भेजी गई और पैसे ट्रांसफर करने का दबाव बनाया गया।
बिना पुष्टि किए ट्रांसफर कर दी पूरी रकम
अकाउंटेंट ने इसे कंपनी डायरेक्टर का निर्देश समझा और बिना कॉल या किसी अन्य तरीके से पुष्टि किए कई बार में करीब 18 लाख रुपए बताए गए खातों में ट्रांसफर कर दिए। पैसे भेजने के कुछ समय बाद जब कंपनी डायरेक्टर संजीव चौहान से बातचीत हुई तो उन्होंने साफ कहा कि उन्होंने किसी तरह का मैसेज नहीं भेजा था। इसके बाद अकाउंटेंट और कंपनी अधिकारियों के होश उड़ गए। तुरंत बैंक और पुलिस को सूचना दी गई, लेकिन तब तक रकम अलग-अलग खातों में भेजी जा चुकी थी। साइबर क्राइम थाना पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब बैंक डिटेल, मोबाइल नंबर और डिजिटल ट्रांजैक्शन के आधार पर ठगों का पता लगाने में जुटी हुई है। शुरुआती जांच में यह मामला सुनियोजित साइबर फ्रॉड का माना जा रहा है।
ऐसे काम करते हैं साइबर ठग
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि यह इंपर्सनेशन स्कैम का नया तरीका है, जिसमें ठग कंपनी मालिकों या अधिकारियों की फोटो सोशल मीडिया और वेबसाइट से निकाल लेते हैं। फिर उसी फोटो को व्हाट्सऐप डीपी पर लगाकर कर्मचारियों से संपर्क करते हैं। ज्यादातर मामलों में अकाउंट्स और एचआर विभाग के कर्मचारियों को निशाना बनाया जाता है, क्योंकि उनके पास फाइनेंशियल एक्सेस होता है। ठग जल्दबाजी का माहौल बनाते हैं ताकि कर्मचारी बिना जांच किए पैसे ट्रांसफर कर दें। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी बड़े भुगतान से पहले फोन कॉल या वीडियो कॉल के जरिए पुष्टि जरूर करनी चाहिए। इसके अलावा कंपनियों को भी अपने कर्मचारियों को साइबर सुरक्षा को लेकर नियमित ट्रेनिंग देनी चाहिए ताकि इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके।
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