ग्रेटर नोएडा में आयोजित हुआ जागरूकता शिविर, किशोरियों को उनके कानूनी अधिकारों की दी गई जानकारी, बताए गए सुरक्षा उपाय
- Shiv Kumar
- 09 Jun, 2026
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, गौतमबुद्धनगर की ओर से जगशांति उद्यान गृह (बालिका गृह) सेक्टर गामा, ग्रेटर नोएडा में किशोरियों के लिए एक विशेष विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर का उद्देश्य किशोरियों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना और उन्हें कानूनी सुरक्षा के बारे में विस्तृत जानकारी देना था। कार्यक्रम का आयोजन उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देशों के तहत किया गया, जिसमें सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण शिवानी रावत ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की।
शिक्षा के अधिकार और मौलिक कानूनों की दी गई जानकारी
शिविर के दौरान किशोरियों को शिक्षा के अधिकार कानून के बारे में विस्तार से समझाया गया। बताया गया कि भारत में 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा देना मौलिक अधिकार है। इसके तहत कक्षा 1 से 8 तक की शिक्षा सभी बच्चों के लिए मुफ्त उपलब्ध कराई जाती है। इसके साथ ही उन्हें संविधान में दिए गए अन्य मौलिक अधिकारों की भी जानकारी दी गई, जिससे वे अपने अधिकारों को समझ सकें और उनका सही उपयोग कर सकें। अधिकारियों ने यह भी बताया कि शिक्षा केवल अधिकार ही नहीं, बल्कि उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव है।
मानव तस्करी और यौन शोषण के खिलाफ सख्त कानूनों की जानकारी
कार्यक्रम में किशोरियों को मानव तस्करी और यौन शोषण के खिलाफ कानूनों के बारे में भी जागरूक किया गया। बताया गया कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 23 और 24 के तहत किसी भी प्रकार के शोषण, बेगार और जबरन मजदूरी पर सख्त प्रतिबंध है। इसके अलावा अनैतिक व्यापार (रोकथाम) अधिनियम, 1956 और पॉक्सो एक्ट जैसे कानूनों की जानकारी भी दी गई, जो बच्चों और किशोरियों की सुरक्षा के लिए बनाए गए हैं। अधिकारियों ने कहा कि इन कानूनों का उद्देश्य पीड़ितों को न्याय दिलाना और समाज में सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करना है।
किशोरियों के बीच बढ़ाया गया आत्मविश्वास
इस अवसर पर सचिव शिवानी रावत और जगशांति उद्यान गृह की प्रबंधक निधि सहित बड़ी संख्या में किशोरियां और स्टाफ मौजूद रहे। अधिकारियों ने किशोरियों को न केवल उनके कानूनी अधिकारों के बारे में बताया, बल्कि उन्हें आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने के लिए भी प्रेरित किया। कार्यक्रम के दौरान यह संदेश दिया गया कि हर बच्ची को अपने अधिकारों की जानकारी होना जरूरी है, ताकि वह किसी भी प्रकार के शोषण या अन्याय के खिलाफ आवाज उठा सके।
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