जेवर में प्लॉट खरीदना हुआ अब महंगा, वजह बना एयरपोर्ट !
- Babli Ansari
- 16 Jun, 2026
नोएडा। जेवर में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का संचालन शुरू होते ही आसपास की जमीनों की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल रहा है। ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाके, जो अभी तक अपेक्षाकृत सस्ते माने जाते थे, अब निवेशकों की पहली पसंद बनते जा रहे हैं। जमीन खरीदने वालों की दिलचस्पी इतनी बढ़ी है कि कई गांवों में रजिस्ट्री रेट, बाजार भाव और सौदे की बातचीत, तीनों में अचानक गर्मी आ गई है। सूत्रों के मुताबिक एयरपोर्ट से जुड़ी कनेक्टिविटी, लॉजिस्टिक्स और भविष्य के औद्योगिक विकास की उम्मीद ने इस पूरे क्षेत्र को रियल एस्टेट के नए हॉटस्पॉट में बदल दिया है।
एयरपोर्ट शुरू होते ही बाजार में आया उछाल
जानकारी के मुताबिक जेवर एयरपोर्ट से पहली व्यावसायिक उड़ानों की शुरुआत और किसानों को सम्मानित किए जाने की खबरों ने इलाके में नई आर्थिक हलचल पैदा कर दी है। जिन किसानों ने इस परियोजना के लिए अपनी जमीन दी थी, उनके लिए यह सिर्फ भावनात्मक क्षण नहीं रहा, बल्कि जमीन की कीमतों में आई तेजी ने उनके आसपास के गांवों में भी नई उम्मीदें जगा दी हैं। स्थानीय दलालों और संपत्ति कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि एयरपोर्ट के आसपास के दायरे में छोटी-बड़ी दोनों तरह की जमीनों की मांग बढ़ी है। कई खरीदार अब लंबे निवेश की सोच से प्लॉट, खेत और कमर्शियल जमीन पर नजर रख रहे हैं।
इसी बीच बाजार में एक और बदलाव साफ दिख रहा है। पहले जहां जेवर और उसके आसपास की जमीनें मुख्यतः कृषि उपयोग के लिए खरीदी जाती थीं, वहीं अब लोग इन्हें भविष्य के आवासीय, व्यावसायिक और वेयरहाउस प्रोजेक्ट के तौर पर देख रहे हैं। जमीन के पुराने मालिक भी इस तेजी से अछूते नहीं हैं। कुछ परिवार सौदा टाल रहे हैं तो कुछ बेहतर कीमत मिलने की उम्मीद में बातचीत बढ़ा रहे हैं। रियल एस्टेट से जुड़े लोगों के अनुसार, यह उछाल केवल अस्थायी सट्टेबाजी नहीं है, बल्कि बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के असर से बनी दीर्घकालिक मांग का संकेत है।
किसानों से लेकर निवेशकों तक, सबकी नजर भविष्य पर
इस पूरे घटनाक्रम की जड़ में वह बड़ा बदलाव है, जो जेवर एयरपोर्ट के शुरू होने के साथ क्षेत्र की पहचान को बदल रहा है। अब तक यह इलाका खेती और गांवों की सीमित अर्थव्यवस्था तक सिमटा हुआ था, लेकिन एयरपोर्ट ने इसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी वाले कॉरिडोर के रूप में स्थापित कर दिया है। जिन किसानों ने जमीन दी, वे खुद इस बदलाव को प्रतीकात्मक जीत के रूप में देख रहे हैं। कुछ किसानों को पहली उड़ान में लखनऊ भेजे जाने की खबर ने इस परियोजना को मानवीय चेहरा भी दिया है और विकास की कहानी को जमीन से जोड़ दिया है।
दूसरी तरफ, निवेशकों और बिल्डरों की नजर अब इस बात पर है कि सरकार और प्राधिकरण आने वाले महीनों में आसपास के क्षेत्रों का नियोजन किस तरह करते हैं। सड़क, मेट्रो, औद्योगिक पार्क और ट्रांसपोर्ट नेटवर्क जैसी सुविधाएं अगर तेजी से आगे बढ़ती हैं, तो जमीन के दाम में और उछाल आ सकता है। हालांकि स्थानीय लोग यह भी मानते हैं कि अचानक बढ़ी कीमतें छोटे खरीदारों की पहुंच से जमीन को दूर कर सकती हैं। फिलहाल जेवर और नोएडा के इस हिस्से में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यह रफ्तार कितनी टिकाऊ साबित होगी और विकास का लाभ आम लोगों तक किस तरह पहुंचेगा।
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