यमुना-हिंडन डूब क्षेत्र में चलेगा बुलडोजर, अवैध निर्माणों पर नोएडा अथॉरिटी का बड़ा एक्शन |
- Babli Ansari
- 16 Jun, 2026
नोएडा। यमुना और हिंडन के डूब क्षेत्र में खड़े हो चुके अवैध ढांचों पर अब नोएडा अथॉरिटी का बुलडोजर चलने वाला है। नदी क्षेत्र को फिर से सुरक्षित और मुक्त करने की तैयारी तेज हो गई है। जानकारी के मुताबिक पहले चरण में उन निर्माणों को निशाने पर लिया जाएगा, जिन्होंने बाढ़ की जमीन पर पक्की नींव डालकर कब्जा जमाया है। इस कार्रवाई को लेकर प्राधिकरण ने साफ संकेत दे दिए हैं कि अब ढील नहीं दी जाएगी। जिन इलाकों में अवैध निर्माण की शिकायतें लगातार मिल रही थीं, वहां जमीन की दोबारा नापजोख और चिह्नांकन का काम भी साथ-साथ चल रहा है। यह कदम ऐसे वक्त उठ रहा है जब बाढ़ के मौसम से पहले नदी के प्रवाह क्षेत्र को खाली कराने पर जोर बढ़ गया है।
अवैध निर्माणों पर सीधा शिकंजा
सूत्रों के अनुसार प्राधिकरण की टीम ने डूब क्षेत्र में बने ढांचों की सूची तैयार कर ली है। इनमें कुछ छोटे पक्के निर्माण हैं, तो कुछ जगहों पर दीवारें, अस्थायी शेड और कब्जे वाली बाउंड्री भी शामिल हैं। अफसरों का कहना है कि पहले नोटिस, फिर सीमांकन और उसके बाद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी। जिन जगहों पर हाल के महीनों में निर्माण सामग्री पहुंचाई गई, वहां निगरानी और सख्त कर दी गई है। स्थानीय स्तर पर यह भी देखा जा रहा है कि कहीं नई कॉलोनियों की शक्ल में तो अतिक्रमण नहीं फैलाया जा रहा। इस पूरे अभियान का मकसद सिर्फ तोड़फोड़ नहीं, बल्कि नदी की प्राकृतिक धारा और जलभराव क्षेत्र को वापस अपने मूल रूप में लाना है।
खबर है कि प्रशासनिक मशीनरी को इस अभियान के लिए जमीन पर लगातार सक्रिय रहने के निर्देश दिए गए हैं। जिन इलाकों में मलबा डालकर जमीन ऊंची की गई थी, वहां भी कार्रवाई की तैयारी है। पिछले कुछ दिनों में यमुना फ्लडप्लेन से बड़े पैमाने पर निर्माण और मलबा हटाने की बात सामने आई है, जिससे साफ है कि अभियान केवल दिखावे का नहीं बल्कि चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है। नोएडा के साथ-साथ आसपास के डूब क्षेत्र में भी इसी तरह की सख्ती का असर दिखने लगा है। अधिकारी मान रहे हैं कि अगर अभी कब्जे नहीं हटाए गए तो आने वाले महीनों में बारिश के दौरान हालात और बिगड़ सकते हैं।
डूब क्षेत्र को लेकर सख्त रुख
यमुना और हिंडन दोनों ही नदी तंत्र के लिहाज से बेहद संवेदनशील इलाके माने जाते हैं। यहां किसी भी तरह का स्थायी निर्माण न सिर्फ पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन है, बल्कि बाढ़ के खतरे को भी कई गुना बढ़ा देता है। यही वजह है कि प्राधिकरण अब डूब क्षेत्र में किसी भी नए ढांचे को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। चर्चा यह भी है कि कई जगहों पर वर्षों से चली आ रही ढिलाई के कारण अतिक्रमण ने पांव पसार लिए थे। अब प्राधिकरण की कोशिश है कि पुराने कब्जों को हटाकर दोबारा जमीन को चिन्हित किया जाए और भविष्य में नए निर्माण पर रोक लगाई जाए।
अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई केवल नोएडा तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि नदी के पूरे संवेदनशील हिस्से में निगरानी बढ़ाई जाएगी। स्थानीय लोगों में भी हलचल है, क्योंकि कई जगहों पर निर्माण करने वालों ने उम्मीद लगा रखी थी कि अभियान टल जाएगा। मगर मौजूदा संकेत बता रहे हैं कि प्रशासन पीछे हटने के मूड में नहीं है। आने वाले दिनों में बुलडोजर की कार्रवाई और नोटिस दोनों तेज हो सकते हैं। जिन लोगों ने डूब क्षेत्र में जमीन पर कब्जा कर रखा है, उनके लिए अब राहत की गुंजाइश बहुत कम बची है।
कार्रवाई के बाद क्या बदलेगा
इस अभियान का सीधा असर उन कॉलोनियों और निर्माणों पर पड़ेगा जो नदी की जमीन पर खड़े हो गए हैं। एक तरफ प्राधिकरण डूब क्षेत्र को खाली कराना चाहता है, दूसरी तरफ स्थानीय स्तर पर यह चिंता भी है कि कार्रवाई के दायरे में कौन-कौन आएगा। फिलहाल प्रशासनिक रुख साफ है कि वैध और अवैध में फर्क कर आगे बढ़ा जाएगा, लेकिन नदी क्षेत्र में बने हर ढांचे पर जांच जरूर होगी। अगर सीमांकन के दौरान किसी निर्माण को डूब क्षेत्र में पाया गया, तो उसे बचाना आसान नहीं होगा। यही वजह है कि कई जगह लोग अब अपने कागज और स्वामित्व दावों की जांच में जुट गए हैं।
अभी तक जो संकेत मिले हैं, उनसे साफ है कि नोएडा अथॉरिटी इस मुद्दे को अब टालने के मूड में नहीं है। बाढ़ से पहले नदी क्षेत्र को मुक्त कराने का दबाव बढ़ा है और ऊपर से पर्यावरणीय एजेंसियों की निगरानी भी सख्त हो चुकी है। ऐसे में यह कार्रवाई आने वाले दिनों में बड़े राजनीतिक और प्रशासनिक संदेश के तौर पर देखी जाएगी। जिन इलाकों में वर्षों से अतिक्रमण पर आंखें मूंदी जाती रही थीं, वहां अब पहली बार मशीनें जमीन पर उतरती दिख सकती हैं।
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