सिद्धार्थनगर के लोटन में तेज आंधी-बारिश से बिजली व्यवस्था चरमराई, कई खंभे टूटे

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लोटन क्षेत्र में देर शाम आई तेज आंधी-बारिश से बिजली आपूर्ति ठप हो गई और कई बिजली के खंभे क्षतिग्रस्त हो गए। ग्रामीण इलाकों में अंधेरा पसरा रहा, जबकि मरम्मत दल को बहाली में मशक्कत करनी पड़ी।

सिद्धार्थनगर। लोटन क्षेत्र में देर शाम आई तेज आंधी और बारिश ने बिजली व्यवस्था की कमर तोड़ दी। कई जगह बिजली के खंभे झुक गए, कुछ टूटकर गिर पड़े और तारों के उलझने से सप्लाई पूरी तरह ठप हो गई। अचानक हुए इस नुकसान से दर्जनों गांवों में अंधेरा छा गया और लोग घंटों तक बिजली बहाली का इंतजार करते रहे। गर्मी के बीच कटौती ने घरों, दुकानों और छोटे कारोबारियों की परेशानी बढ़ा दी। स्थानीय लोगों के मुताबिक हवा इतनी तेज थी कि सड़क किनारे लगे खंभे एक के बाद एक हिलने लगे और कुछ जगहों पर तार नीचे आ गिरे।

तेज हवा ने बिछाया तारों और खंभों का जाल

जानकारी के मुताबिक आंधी का सबसे ज्यादा असर लोटन कस्बे और आसपास के ग्रामीण इलाकों में दिखा, जहां कई फीडरों की सप्लाई बंद करनी पड़ी। जिन इलाकों में खंभे क्षतिग्रस्त हुए, वहां बिजली विभाग को एहतियातन लाइन काटनी पड़ी ताकि किसी बड़े हादसे से बचा जा सके। ग्रामीणों का कहना है कि रात भर अंधेरा रहने से पानी की आपूर्ति भी प्रभावित हुई और मोबाइल चार्जिंग तक मुश्किल हो गई। कई जगह लोगों ने अपने स्तर पर रास्तों से गिरे तार हटाने की कोशिश की, लेकिन लगातार तेज हवा और बूंदाबांदी के बीच हालात संभालना आसान नहीं था। विभागीय कर्मचारियों ने देर रात से ही मरम्मत शुरू की, मगर नुकसान का दायरा बड़ा होने से बहाली में समय लगना तय माना जा रहा था।

जर्जर लाइनें और मौसम की मार ने बढ़ाई मुश्किल

स्थानीय सूत्रों के अनुसार यह इलाका पहले से ही जर्जर बिजली ढांचे की समस्या झेल रहा है। कई खंभे पुराने हैं और तारों की ऊंचाई भी बराबर नहीं रखी गई है, जिससे तेज हवा में नुकसान और बढ़ जाता है। बारिश के मौसम में यह कमजोरी बार-बार सामने आती है, लेकिन स्थायी सुधार की गति धीमी रही है। बिजलीकर्मियों का कहना है कि टूटे खंभों को बदलने, तारों को कसने और फीडर को दोबारा जोड़ने में समय लगता है, खासकर तब जब एक साथ कई जगहों पर क्षति हो। इसी वजह से कई गांवों में सप्लाई बहाल होने में देर लगी और लोग रातभर विभागीय टीम का इंतजार करते रहे।

रात भर इंतजार करते रहे लोग, सुबह तक राहत की उम्मीद

बिजली गुल होने के बाद सबसे ज्यादा दिक्कत बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को हुई। ग्रामीणों ने बताया कि न तो पंखे चल पाए और न ही पीने के पानी की व्यवस्था ठीक से हो सकी। दुकानदारों को भी नुकसान उठाना पड़ा, क्योंकि देर रात तक कामकाज रुक गया। प्रशासन और बिजली विभाग के स्तर पर नुकसान का आकलन कराया जा रहा है, ताकि प्राथमिकता के आधार पर बहाली की जा सके। उधर, मौसम विभाग की चेतावनियों के बीच लोग अब भी सावधानी बरत रहे हैं, क्योंकि इलाके में बादल और तेज हवाओं की आशंका बनी हुई है। विभाग ने टीमों को अलर्ट पर रखा है और माना जा रहा है कि मरम्मत पूरी होते ही चरणबद्ध तरीके से आपूर्ति बहाल की जाएगी।

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