छतरपुर में 4 किमी एलिवेटेड कॉरिडोर को मंजूरी, दक्षिणी दिल्ली के जाम को मिलेगी राहत
- Babli Ansari
- 17 Jun, 2026
नई दिल्ली। दक्षिणी दिल्ली की सड़कों पर रोज की जाम की मार झेल रहे लोगों के लिए राहत भरी खबर आई है। दिल्ली सरकार ने छतरपुर इलाके में 4 किलोमीटर लंबे सिग्नल-फ्री एलिवेटेड कॉरिडोर को मंजूरी दे दी है। यह कॉरिडोर एसएसएन मार्ग पर अणुव्रत मार्ग से डीएलएफ फार्म्स तक बनाया जाएगा और सरकार इसे शहर की भीड़भाड़ कम करने वाली अहम कड़ी मान रही है। पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश वर्मा के मुताबिक इस परियोजना से न सिर्फ यात्रा समय घटेगा, बल्कि महरौली, लाडो सराय, साकेत और सैनिक फार्म जैसे इलाकों पर भी ट्रैफिक का दबाव कम होगा। अधिकारियों का अनुमान है कि रोजाना करीब 75 हजार वाहन इससे प्रभावित होंगे।
एसएसएन मार्ग पर क्या बदलेगा
सरकारी आकलन के अनुसार अभी अणुव्रत मार्ग से डीएलएफ फार्म्स तक की दूरी तय करने में करीब 18.9 मिनट लगते हैं और औसत रफ्तार 12.7 किलोमीटर प्रति घंटा रहती है। एलिवेटेड कॉरिडोर बनने के बाद यही सफर 6.6 मिनट में पूरा होने की उम्मीद जताई गई है, जबकि औसत गति बढ़कर 36.4 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। मतलब साफ है, ट्रैफिक सिग्नलों और चौराहों पर रुकने की मजबूरी काफी हद तक खत्म होगी। पीडब्ल्यूडी का दावा है कि यह कॉरिडोर दक्षिणी दिल्ली के लिए एक सीधा, तेज और बिना रुकावट वाला रूट देगा, जिससे रोजाना दफ्तर जाने वाले, स्थानीय निवासी और सेवा वाहनों तीनों को फायदा होगा।
यह प्रोजेक्ट उस वक्त मंजूर हुआ है जब दिल्ली में सड़क नेटवर्क पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। छतरपुर, साकेत और महरौली बेल्ट में आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियां तेज हुई हैं, लेकिन मौजूदा सड़क ढांचा उसी रफ्तार से नहीं बढ़ पाया। सूत्रों के मुताबिक यही वजह है कि सरकार ने इस कॉरिडोर को प्राथमिकता सूची में रखा। दिल्ली-एनसीआर में हाल के महीनों में एक्सप्रेसवे, फ्लाइओवर और एलिवेटेड रोड की कई योजनाएं चर्चा में रही हैं, और यह प्रोजेक्ट भी उसी बड़े ट्रैफिक-मैनेजमेंट मॉडल का हिस्सा माना जा रहा है। विभाग का कहना है कि निर्माण शुरू होने के बाद काम को इस तरह अंजाम दिया जाएगा कि मौजूदा यातायात पर कम से कम असर पड़े।
दक्षिण दिल्ली के लिए इसका असर
इस कॉरिडोर का सीधा असर उन कॉलोनियों पर पड़ेगा जो हर दिन जाम की वजह से परेशान रहती हैं। महरौली, लाडो सराय, साकेत, सैनिक फार्म और आसपास के रिहायशी इलाकों के लोगों को अब लंबी कतारों और बार-बार रुकने वाली ट्रैफिक फाइल से राहत मिलने की उम्मीद है। स्थानीय कारोबारियों का मानना है कि कनेक्टिविटी सुधरने से इलाके में आवाजाही सुगम होगी और छोटी दूरी की यात्रा पर लगने वाला वक्त घटेगा। वहीं, आपातकालीन सेवाओं के लिए भी यह रूट अहम साबित हो सकता है, क्योंकि एलिवेटेड स्ट्रक्चर पर ट्रैफिक सिग्नल की बाधा नहीं रहेगी।
फिलहाल सरकार ने परियोजना को मंजूरी दी है, लेकिन जमीन पर काम शुरू होने के साथ ही निगाहें इसके डिजाइन, निर्माण समयसीमा और यातायात प्रबंधन पर टिकेंगी। दक्षिणी दिल्ली में ऐसे प्रोजेक्ट्स से अक्सर उम्मीदें बहुत ऊंची होती हैं, क्योंकि यहां सड़क चौड़ीकरण की गुंजाइश सीमित है और आबादी के साथ ट्रैफिक भी तेजी से बढ़ा है। प्रशासन के सामने अब चुनौती यही होगी कि परियोजना कागज पर राहत न बने, बल्कि सचमुच सड़क पर फर्क दिखाए। अगर यह कॉरिडोर तय समय और मानक के साथ तैयार हो गया, तो छतरपुर और आसपास के इलाकों के लिए यह लंबे समय बाद ठोस राहत का रास्ता खोल सकता है।
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